शंकराचार्य का CM योगी को अल्टीमेटम: गाय को 'राज्य माता' घोषित करने और गोमांस प्रतिबंध की मांग

ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को 39 दिनों का समय दिया है। उन्होंने मांग की है कि गाय को 'राज्य माता' घोषित किया जाए और गोमांस निर्यात पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए। ऐसा करने पर उन्होंने मुख्यमंत्री को प्रधानमंत्री पद के लिए समर्थन देने की बात कही है।

ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को एक महत्वपूर्ण अल्टीमेटम दिया है। प्रयागराज से काशी पहुंचने पर उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा कि मुख्यमंत्री के पास गाय को 'राज्य माता' घोषित करने और उत्तर प्रदेश से गोमांस के निर्यात पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के लिए केवल 39 दिनों का समय शेष है। शंकराचार्य के अनुसार, यदि मुख्यमंत्री इन मांगों को पूरा करते हैं, तो वे स्वयं उन्हें भावी प्रधानमंत्री के रूप में प्रोजेक्ट करेंगे और उनका अभिनंदन करेंगे। इसके विपरीत, उन्होंने चेतावनी दी कि यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर निर्णय नहीं लिया गया, तो संत समाज उन्हें 'नकली हिंदू' घोषित करने पर विचार कर सकता है।

गो माता को 'राज्य माता' का दर्जा और निर्यात पर प्रतिबंध की मांग

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने स्पष्ट किया कि उनका आंदोलन पूरी तरह से गो माता की रक्षा और उनकी प्रतिष्ठा के लिए समर्पित है। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से आग्रह किया कि वे अपने मूल स्वरूप को याद करें और उत्तर प्रदेश में गोवंश की सुरक्षा सुनिश्चित करें। उनकी मुख्य मांगों में गाय को आधिकारिक रूप से 'राज्य माता' का दर्जा देना और राज्य से होने वाले गोमांस के बड़े पैमाने पर निर्यात को तत्काल प्रभाव से रोकना शामिल है। शंकराचार्य ने कहा कि प्रयागराज में लंबे समय तक अवसर देने के बाद भी जब सुधार नहीं दिखा, तब उन्होंने काशी का रुख किया और अब इस मुहिम को निर्णायक मोड़ पर ले जाने की तैयारी है।

प्रधानमंत्री पद के लिए समर्थन और 'नकली हिंदू' की चेतावनी

इस आंदोलन का एक महत्वपूर्ण राजनीतिक और धार्मिक पहलू मुख्यमंत्री को दिए गए समर्थन के प्रस्ताव से जुड़ा है। शंकराचार्य ने कहा कि यदि योगी आदित्यनाथ गो रक्षा के क्षेत्र में ठोस कदम उठाते हैं, तो वे उनके नाम को प्रधानमंत्री पद के लिए आगे बढ़ाएंगे। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि यदि मुख्यमंत्री इस अवसर का लाभ नहीं उठाते हैं, तो उनकी हिंदूवादी छवि पर प्रश्नचिह्न लग सकता है। उनके अनुसार, यह मुख्यमंत्री के लिए खुद को 'सच्चा हिंदू' साबित करने का एक बड़ा अवसर है। उन्होंने संकेत दिया कि लखनऊ में होने वाली आगामी बैठक में इस संबंध में कुछ ऐसी घोषणाएं की जा सकती हैं जो व्यापक प्रभाव डालेंगी।

चारों शंकराचार्यों की एकजुटता और क्षेत्राधिकार पर स्पष्टीकरण

शंकराचार्यों के बीच समन्वय के प्रश्न पर अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा कि गो माता की प्रतिष्ठा का मुद्दा किसी एक पीठ तक सीमित नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यद्यपि शंकराचार्यों के अधिकार क्षेत्र भौगोलिक रूप से उत्तर, दक्षिण, पूर्व और पश्चिम में बंटे हुए हैं, लेकिन जब विषय राष्ट्रव्यापी और समस्त हिंदू समाज से जुड़ा हो, तो क्षेत्राधिकार की सीमाएं समाप्त हो जाती हैं। उन्होंने कहा कि यदि चारों में से कोई एक भी इस विषय पर कार्य कर रहा है, तो उसे चारों शंकराचार्यों का सामूहिक कार्य माना जाना चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि गो रक्षा के मुद्दे पर पूरा संत समाज और चारों पीठ एकमत हैं।

आगामी रणनीति और लखनऊ में बड़ी बैठक का प्रस्ताव

शंकराचार्य ने अपनी भविष्य की रणनीति का खुलासा करते हुए बताया कि वे जल्द ही लखनऊ में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित करेंगे। इस बैठक में लिए जाने वाले निर्णय अत्यंत प्रभावशाली होंगे। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि प्रयागराज में माघ मेले के लिए तारीखें तय कर ली गई हैं और तब तक वे काशी में अपनी मुहिम को आगे बढ़ाएंगे। स्नान और अन्य धार्मिक विवादों पर उन्होंने फिलहाल चुप्पी साधते हुए कहा कि उनका प्राथमिक उद्देश्य गो माता की रक्षा है और वे इस मुख्य मुद्दे से ध्यान भटकने नहीं देना चाहते। उन्होंने मीडिया की भूमिका की भी सराहना की, जिसने गोवंश के प्रति हो रहे अत्याचारों को जनता के सामने लाने का कार्य किया है।

विश्लेषणात्मक परिप्रेक्ष्य और निष्कर्ष

धार्मिक विश्लेषकों के अनुसार, शंकराचार्य का यह रुख उत्तर प्रदेश की राजनीति और धार्मिक विमर्श में एक नया मोड़ ला सकता है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, जो स्वयं एक प्रमुख पीठ के महंत हैं, के लिए यह स्थिति चुनौतीपूर्ण हो सकती है क्योंकि यह सीधे तौर पर उनकी छवि और शासन की प्राथमिकताओं से जुड़ी है। विश्लेषकों का मानना है कि गो रक्षा का मुद्दा हमेशा से संवेदनशील रहा है और शंकराचार्य द्वारा दी गई समय सीमा सरकार पर प्रशासनिक और नैतिक दबाव बना सकती है। अब सभी की निगाहें राज्य सरकार की प्रतिक्रिया और 39 दिनों की इस अवधि के भीतर होने वाले घटनाक्रमों पर टिकी हैं।

[DISCLAIMER_START]यह समाचार रिपोर्ट केवल सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है और इसमें दिए गए बयान संबंधित व्यक्तियों के व्यक्तिगत विचार हैं। यह लेख किसी भी प्रकार की निवेश सलाह या राजनीतिक भविष्यवाणी का समर्थन नहीं करता है।

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