उत्तर प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के दौरान एक अभूतपूर्व स्थिति उत्पन्न हुई जब विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने सत्ता पक्ष के एक विधायक के आचरण पर गहरी नाराजगी व्यक्त की। सदन की कार्यवाही के दौरान हंगामे से क्षुब्ध होकर स्पीकर ने अपना हेडफोन मेज पर फेंक दिया और सदन की कार्यवाही को 10 मिनट के लिए स्थगित करने की घोषणा कर दी। यह घटना उस समय हुई जब सदन में प्रश्नकाल की प्रक्रिया चल रही थी और विपक्षी सदस्यों के साथ-साथ सत्ता पक्ष के सदस्य भी अपनी सीटों पर खड़े होकर शोर-शराबा कर रहे थे।
प्रश्नकाल के दौरान हंगामे की शुरुआत
विधानसभा की कार्यवाही के दौरान स्पीकर सतीश महाना ने समाजवादी पार्टी के विधायक कमाल अख्तर का नाम पुकारा ताकि वे अपना प्रश्न पूछ सकें। इसी दौरान विपक्षी सदस्य विभिन्न मुद्दों को लेकर नारेबाजी और हंगामा करने लगे। स्पीकर ने बार-बार विपक्षी सदस्यों से अपनी सीटों पर बैठने और सदन की गरिमा बनाए रखने का आग्रह किया। हालांकि, स्थिति तब और जटिल हो गई जब सत्ता पक्ष के कुछ विधायक भी अपनी सीटों से खड़े होकर विपक्षी सदस्यों को जवाब देने लगे। स्पीकर ने सत्ता पक्ष को टोकते हुए कहा कि सदस्यों को शांत कराना उनका कार्य है, न कि सत्ता पक्ष के विधायकों का।
भाजपा विधायक केतकी सिंह और स्पीकर के बीच तीखी नोकझोंक
सदन में शोर-शराबा कम न होने पर स्पीकर का धैर्य जवाब दे गया। उन्होंने भाजपा विधायक केतकी सिंह को संबोधित करते हुए कड़े शब्दों में पूछा कि क्या वे सदन चलाना चाहती हैं। स्पीकर ने नाराजगी भरे लहजे में कहा, "अब आप हाउस चलाओगे क्या? आपको हाउस चलाना है क्या? " इस तीखी प्रतिक्रिया के तुरंत बाद सतीश महाना ने अपने कान से हेडफोन निकाला और उसे मेज पर पटक दिया। इसके साथ ही उन्होंने सदन की कार्यवाही को 10 मिनट के लिए स्थगित कर दिया और अपने कक्ष की ओर चले गए।
अखिलेश यादव का भाजपा पर राजनीतिक कटाक्ष
इस घटनाक्रम के तुरंत बाद समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया के माध्यम से भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधा। उन्होंने इस घटना को भाजपा की आंतरिक हताशा का परिणाम बताया और अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा की हार की हताशा अब सड़क से लेकर सदन तक दिखाई दे रही है। उन्होंने तंज कसते हुए सवाल किया कि क्या भाजपा के लोग अगला चुनाव आपस में ही लड़ेंगे। सपा प्रमुख ने भाजपा विधायक और मंत्री के बीच हालिया विवादों का भी उल्लेख किया और कहा कि अब सदन के भीतर भी अनुशासन की कमी स्पष्ट दिख रही है।
सदन की गरिमा और संसदीय नियमों का संदर्भ
संसदीय विशेषज्ञों के अनुसार, विधानसभा अध्यक्ष का पद सर्वोच्च होता है और सदन के संचालन की पूरी जिम्मेदारी उन्हीं की होती है। सतीश महाना द्वारा हेडफोन फेंकने की घटना को सदन के भीतर अनुशासन बनाए रखने के लिए एक कड़े संदेश के रूप में देखा जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, जब सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ही नियंत्रण से बाहर होने लगते हैं, तो पीठासीन अधिकारी को इस तरह के कड़े कदम उठाने पड़ते हैं। इस घटना ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में सत्ता पक्ष के भीतर समन्वय और सदन के भीतर विधायी व्यवहार पर नई बहस छेड़ दी है।
स्थगन के बाद सदन की पुनः कार्यवाही
10 मिनट के स्थगन के बाद जब सदन की कार्यवाही दोबारा शुरू हुई, तो माहौल में कुछ शांति देखी गई। हालांकि, विपक्षी दल इस मुद्दे को लेकर लगातार हमलावर बने रहे। सदन में मौजूद वरिष्ठ मंत्रियों ने स्थिति को संभालने का प्रयास किया, लेकिन स्पीकर की नाराजगी ने यह स्पष्ट कर दिया कि सदन के संचालन में किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप स्वीकार्य नहीं होगा। बजट सत्र के दौरान हुई इस घटना ने सत्र की शेष अवधि के लिए एक गंभीर माहौल तैयार कर दिया है, जहां अब सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के व्यवहार पर कड़ी नजर रखी जा रही है।
भाजपा की हार की हताशा सड़क से लेकर सदन तक पहुँच गयी है, अब देखते हैं कौन किसको अवमानना का नोटिस देता है।
— Akhilesh Yadav (@yadavakhilesh) February 13, 2026
पहले भाजपा के ही विधायक जी ने माननीय भाजपाई मंत्री जी के साथ सड़क पर सरेआम अभद्रता की, अब फिर भाजपाई विधायक के दुर्व्यवहार के कारण भाजपाई सभापति महोदय सदन में रुष्ट हो गये।… pic.twitter.com/Ugq7HZ0WSG
