चंद्रपुर मेयर चुनाव: मनसे का उद्धव गुट पर एक करोड़ रुपये लेने का आरोप

महाराष्ट्र के चंद्रपुर महानगरपालिका मेयर चुनाव में बीजेपी की जीत के बाद राजनीतिक विवाद गहरा गया है। राज ठाकरे की मनसे ने उद्धव ठाकरे गुट के पार्षदों पर बीजेपी से एक-एक करोड़ रुपये लेकर समर्थन देने का आरोप लगाया है, जिसे शिवसेना (यूबीटी) ने सिरे से खारिज कर दिया है।

महाराष्ट्र के चंद्रपुर महानगरपालिका में मेयर चुनाव के नतीजों के बाद राज्य की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा हो गया है। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के उम्मीदवार ने मेयर पद पर जीत हासिल की है, लेकिन इस जीत के पीछे उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) के समर्थन की चर्चा जोरों पर है। राज ठाकरे की पार्टी महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) ने इस घटनाक्रम को लेकर उद्धव गुट पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। मनसे का दावा है कि उद्धव गुट के पार्षदों ने बीजेपी उम्मीदवार को समर्थन देने के बदले भारी मात्रा में धन लिया है।

मनसे के संदीप देशपांडे के गंभीर आरोप

मनसे के वरिष्ठ नेता और प्रवक्ता संदीप देशपांडे ने इस मामले में सार्वजनिक रूप से बयान जारी कर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं। देशपांडे के अनुसार, उनके पास विश्वसनीय सूत्रों से जानकारी मिली है कि चंद्रपुर में जो पार्षद बीजेपी के पक्ष में गए, उन्हें बड़ी रकम दी गई है। 00 लाख का भुगतान किया गया। देशपांडे ने इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है और इसे ‘खोखे की राजनीति’ का हिस्सा बताया है।

शिवसेना (यूबीटी) का पलटवार और संजय राउत का बयान

शिवसेना (यूबीटी) ने मनसे द्वारा लगाए गए इन आरोपों को पूरी तरह से निराधार और बेबुनियाद करार दिया है और पार्टी के राज्यसभा सांसद और मुख्य प्रवक्ता संजय राउत ने इन आरोपों पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। राउत ने कहा कि चंद्रपुर में जो कुछ भी हुआ वह स्थानीय स्तर का राजनीतिक समीकरण था और इसमें उद्धव ठाकरे की कोई सीधी भूमिका नहीं थी। उन्होंने मनसे पर तंज कसते हुए पूछा कि क्या आरोप लगाने वाले वहां पैसे गिनने के लिए मौजूद थे? राउत ने स्पष्ट किया कि स्थानीय परिस्थितियों के आधार पर निर्णय लिए जाते हैं और इसे भ्रष्टाचार से जोड़ना गलत है।

चंद्रपुर महानगरपालिका का चुनावी समीकरण

चंद्रपुर महानगरपालिका में कुल 76 पार्षदों की संख्या है। मेयर चुनाव के दौरान किसी भी एक दल के पास स्पष्ट बहुमत नहीं था। बीजेपी को अपनी जीत सुनिश्चित करने के लिए अतिरिक्त मतों की आवश्यकता थी। चुनावी प्रक्रिया के दौरान उद्धव गुट के पार्षदों के समर्थन से बीजेपी का पलड़ा भारी हो गया और उनके उम्मीदवार ने जीत दर्ज की। मनसे का तर्क है कि वैचारिक मतभेदों के बावजूद उद्धव गुट का बीजेपी को समर्थन देना केवल वित्तीय लेनदेन के कारण ही संभव हुआ है।

ठाकरे भाइयों के बीच बढ़ती राजनीतिक दूरियां

यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब पिछले कुछ महीनों से उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे के बीच संबंधों में सुधार की अटकलें लगाई जा रही थीं। पिछले महीने ही दोनों भाइयों को एक सार्वजनिक मंच पर साथ देखा गया था, जिससे यह संकेत मिल रहे थे कि वे आगामी चुनावों में साथ आ सकते हैं। हालांकि, चंद्रपुर की इस घटना और मनसे के कड़े रुख ने एक बार फिर दोनों गुटों के बीच तनाव पैदा कर दिया है। राजनीतिक जानकारों के अनुसार, इस तरह के आरोप भविष्य में किसी भी संभावित गठबंधन की संभावनाओं को प्रभावित कर सकते हैं।

स्थानीय राजनीति बनाम राज्य स्तरीय गठबंधन

चंद्रपुर की घटना ने महाराष्ट्र की राजनीति में स्थानीय और राज्य स्तरीय प्राथमिकताओं के बीच के अंतर को उजागर किया है। जहां राज्य स्तर पर शिवसेना (यूबीटी) और बीजेपी एक-दूसरे के धुर विरोधी हैं, वहीं स्थानीय निकायों में समीकरण अक्सर अलग होते हैं। शिवसेना (यूबीटी) के नेताओं का कहना है कि स्थानीय विकास और क्षेत्रीय राजनीति को ध्यान में रखते हुए कई बार ऐसे फैसले लेने पड़ते हैं। दूसरी ओर, मनसे इस मुद्दे को राज्य भर में भुनाने की कोशिश कर रही है ताकि उद्धव गुट की छवि को नुकसान पहुंचाया जा सके।

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