प्रयागराज की एक विशेष पॉक्सो (POCSO) अदालत के निर्देश पर ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके शिष्य मुकुंदानंद ब्रह्मचारी के खिलाफ गंभीर आपराधिक धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की गई है। यह मामला दो नाबालिग लड़कों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 351(3) और पॉक्सो अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। प्राथमिकी दर्ज होने के बाद प्रयागराज के झूंसी थाने की एक पुलिस टीम वाराणसी पहुंच गई है, जहां शंकराचार्य से पूछताछ की जा सकती है।
आरोपों का खंडन और षड्यंत्र का दावा
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने मीडिया से बातचीत में इन आरोपों को 'मनगढ़ंत' और 'बनावटी' करार दिया। शंकराचार्य के अनुसार, यह पूरी कहानी उन्हें और सनातन धर्म को बदनाम करने के लिए रची गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिन लड़कों के शोषण का आरोप लगाया जा रहा है, वे कभी उनके गुरुकुल में नहीं रहे और न ही उनका उनसे कोई संबंध रहा है और उन्होंने कहा कि उनका अंतकरण साफ है और वे जांच में पूरा सहयोग करेंगे, लेकिन उन्हें न्याय मिलने की प्रक्रिया पर संदेह है।
जांच एजेंसी पर अविश्वास और राजनीतिक बयानबाजी
शंकराचार्य ने इस मामले की जांच के लिए उत्तर प्रदेश पुलिस या किसी भी भाजपा शासित राज्य की पुलिस पर भरोसा जताने से इनकार कर दिया है। उन्होंने मांग की है कि इस संवेदनशील मामले की जांच किसी गैर-भाजपा शासित राज्य की पुलिस से कराई जानी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार उनके खिलाफ प्रतिशोध की भावना से काम कर रही है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि पुलिस उन्हें गिरफ्तार करने आती है, तो वे कोई विरोध नहीं करेंगे और कानून का पालन करेंगे। उन्होंने कहा कि जनता सब देख रही है और सत्य जल्द ही सामने आएगा।
गौ-रक्षा आंदोलन और गिरफ्तारी की आशंका
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने इस कानूनी कार्रवाई को उनके द्वारा चलाए जा रहे गौ-हत्या विरोधी आंदोलन से जोड़कर देखा है। उन्होंने कहा कि गौ-हत्या पर पूर्ण प्रतिबंध की उनकी मांग को दबाने के लिए सरकार द्वारा यह 'कुत्सित प्रयास' किया जा रहा है। उनके अनुसार, कुछ लोग हिंदू चोला पहनकर सनातन धर्म को भीतर से नष्ट करने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने गिरफ्तारी की संभावना पर कहा कि यदि उन्हें गिरफ्तार किया जाता है, तो यह 'कालनेमी' जैसा कृत्य होगा जो एक शंकराचार्य को अपमानित करने का प्रयास है। उन्होंने दावा किया कि प्रयागराज में सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में रहने के बावजूद उन पर ऐसे आरोप लगाना हास्यास्पद है।
कानूनी धाराएं और शिकायतकर्ता का विवरण
यह प्राथमिकी कृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद में वादी और शंकुरी पीठाधीश्वर आशुतोष महाराज की याचिका पर दर्ज की गई है। पॉक्सो जज विनोद कुमार चौरसिया ने शनिवार को झूंसी पुलिस को मामला दर्ज करने का आदेश दिया था और स्टेशन ऑफिसर महेश मिश्रा के अनुसार, प्राथमिकी में बीएनएस की धारा 351(3) के साथ-साथ पॉक्सो एक्ट की धारा 5, 6, 3, 4(2), 16 और 17 शामिल की गई हैं। शिकायत में अविमुक्तेश्वरानंद और मुकुंदानंद ब्रह्मचारी के अलावा तीन अज्ञात व्यक्तियों का भी उल्लेख है। आरोप है कि पिछले साल एक कैंप के दौरान नाबालिगों का शोषण किया गया था और यह सिलसिला 2025 के महाकुंभ की तैयारियों के संदर्भ में भी जोड़ा गया है।
पुलिस की वर्तमान कार्रवाई और वाराणसी में हलचल
प्राथमिकी दर्ज होने के 24 घंटे के भीतर प्रयागराज पुलिस की टीम वाराणसी पहुंच चुकी है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, वर्तमान में साक्ष्य जुटाने और प्रारंभिक पूछताछ की प्रक्रिया चल रही है और वाराणसी में शंकराचार्य के शिविर के आसपास सुरक्षा और निगरानी बढ़ा दी गई है। पुलिस टीम इस बात की जांच कर रही है कि क्या आरोपों के समर्थन में कोई तकनीकी या भौतिक साक्ष्य उपलब्ध हैं। शंकराचार्य ने कहा है कि वे कहीं भाग नहीं रहे हैं और पुलिस जब चाहे उनसे सवाल पूछ सकती है, लेकिन वे अपनी मांगों और सिद्धांतों से पीछे नहीं हटेंगे।
