ईरान-अमेरिका तनाव और $270 अरब का आधिकारिक बिल
ईरान और अमेरिका के बीच तनाव के बीच कूटनीतिक पहल एक बार फिर तेज हो गई है। इस्लामाबाद में पहले दौर की बातचीत नाकाम होने के बाद दोनों देशों ने दूसरे दौर की वार्ता के लिए सहमति जताई है। माना जा रहा है कि दोनों पक्ष जल्द ही पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में फिर आमने-सामने बैठ सकते हैं। इसी बीच, ईरान की सरकारी प्रवक्ता फातेमा मुहाजेरानी ने बुधवार को दुनिया के सामने $270 अरब डॉलर का आंकड़ा रखा है। यह 47 दिनों की जंग में हुई तबाही का पहला आधिकारिक बिल है। ईरान ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि या तो यह रकम दी जाए, अन्यथा होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) को फिर से बंद कर दिया जाएगा। मुहाजेरानी के अनुसार, यह सिर्फ मुआवजे की मांग नहीं बल्कि एक नई जंग की भाषा है।
28 फरवरी की वह रात और मिनाब स्कूल पर हमला
जंग की शुरुआत 28 फरवरी 2026 की रात को हुई जब अमेरिका और इजराइल ने ईरान पर हमले शुरू किए। इन हमलों में ईरान की परमाणु साइटों, तेल-गैस संयंत्रों और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया। सबसे दर्दनाक घटना ईरान के दक्षिणी शहर मिनाब में हुई, जहां शाजरा तय्यबा प्राइमरी स्कूल पर एक अमेरिकी मिसाइल गिरी और एमनेस्टी इंटरनेशनल की मार्च 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, इस हमले में 100 से ज्यादा बच्चे मारे गए, जबकि ईरानी सरकार का दावा है कि यह संख्या 170 के करीब थी। संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञों ने इसे ‘बच्चों पर एक गंभीर हमला’ करार दिया और हालांकि, अमेरिकी डेमोक्रेटिक सांसदों द्वारा जवाब मांगे जाने पर ट्रंप प्रशासन की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई।
नुकसान का तीन चरणों में आकलन
रूस की समाचार एजेंसी RIA Novosti को दिए इंटरव्यू में फातेमा मुहाजेरानी ने बताया कि $270 अरब का नुकसान ईरान की आर्थिक, सामाजिक और औद्योगिक बर्बादी का पहला आकलन है।
मुहाजेरानी ने स्पष्ट किया कि मुआवजे का मुद्दा इस्लामाबाद वार्ता में उठाया गया था। हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि मौजूदा आर्थिक स्थिति ऐसी है कि सरकार अपने नागरिकों के टूटे घरों की भरपाई खुद नहीं कर सकती, इसलिए बाहरी मुआवजे का दावा किया जा रहा है।
बुनियादी ढांचे और एयरलाइंस की भारी तबाही
BBC की रिपोर्ट ‘Tracking recent US-Israeli strikes on Iranian infrastructure’ के अनुसार, तेल-गैस संयंत्रों, पेट्रोकेमिकल कंपनियों, स्टील और एल्यूमिनियम कारखानों को निशाना बनाया गया। तेहरान के पास स्थित प्रसिद्ध B1 Bridge सहित कई पुल, बंदरगाह, रेलवे नेटवर्क, यूनिवर्सिटी, अस्पताल और बिजली संयंत्र तबाह कर दिए गए। NPR की 3 अप्रैल 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इन हमलों की सार्वजनिक धमकी दी थी।
हवाई क्षेत्र में भी भारी नुकसान हुआ है। ईरानी एयरलाइन्स एसोसिएशन के सचिव मघसौद असदी समानी के अनुसार, 60 नागरिक विमान सेवा से बाहर हो गए हैं, जिनमें से 20 पूरी तरह नष्ट हो गए। अब ईरान के पास केवल 160 यात्री विमान बचे हैं। नवरोज के पीक सीजन के दौरान एयरलाइन्स को 300 खरब रियाल (लगभग 19 करोड़ डॉलर) का नुकसान हुआ है।
होर्मुज 'टोल टैक्स' और इंटरनेट बंदी का आर्थिक बोझ
ईरान ने संयुक्त राष्ट्र के जरिए बहरीन, सऊदी अरब, कतर, UAE और जॉर्डन से भी मुआवजे की मांग की है, क्योंकि उन्होंने अपनी जमीन का इस्तेमाल हमलों के लिए होने दिया। ईरान ने 'होर्मुज प्रोटोकॉल' का प्रस्ताव रखा है, जिसके तहत वहां से गुजरने वाले पश्चिमी जहाजों से प्रति जहाज $20 लाख तक का टोल वसूला जा सकता है। 5 करोड़ डॉलर का नुकसान हो रहा है।
वहीं, ईरान के भीतर 50 दिनों से जारी इंटरनेट बंदी से रोजाना $8 करोड़ का नुकसान हो रहा है। ईरान चैंबर ऑफ कॉमर्स के अफशिन कोलाही ने बताया कि यह नुकसान हर रोज दो मध्यम क्षमता वाले बिजली संयंत्रों को खोने के बराबर है। सरकार अब ‘Internet Pro’ नाम की एक महंगी टियर्ड इंटरनेट सेवा लाने की योजना बना रही है।
IMF की चेतावनी और वैश्विक मंदी का खतरा
1% तक सिकुड़ सकती है। 1% रहने का अनुमान है। 5% तक गिर सकती है। सऊदी अरब और कतर की GDP ग्रोथ में भी गिरावट का अनुमान लगाया गया है।
