भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने शनिवार को एक प्रेस वार्ता और सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर कुख्यात अमेरिकी अपराधी जेफ्री एपस्टीन के साथ कथित संबंधों को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने दावा किया कि एपस्टीन की फाइल्स में प्रधानमंत्री का नाम शामिल है और उन्होंने इस संबंध में कई सवाल उठाए हैं। दूसरी ओर, भारत सरकार के विदेश मंत्रालय ने इन आरोपों को पूरी तरह से निराधार बताते हुए खारिज कर दिया है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि एक घोषित अपराधी के बयानों या ई-मेल को आधिकारिक महत्व देना अनुचित है।
कांग्रेस के आरोप और पवन खेड़ा के सवाल
कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर साझा की गई पोस्ट में अमेरिकी न्याय विभाग के दस्तावेजों का हवाला दिया। खेड़ा ने दावा किया कि जेफ्री एपस्टीन, जो अमेरिका में मानव तस्करी और नाबालिगों के यौन शोषण का दोषी था, ने कथित तौर पर लिखा था कि प्रधानमंत्री मोदी ने उसकी सलाह मानी थी। खेड़ा ने एक ई-मेल का स्क्रीनशॉट भी साझा किया, जिसकी तारीख 24 मई 2019 बताई गई है। इस ई-मेल में कथित तौर पर एपस्टीन और स्टीव बैनन (डोनाल्ड ट्रंप के पूर्व रणनीतिकार) के बीच हुई बातचीत का जिक्र है। कांग्रेस ने प्रधानमंत्री से तीन मुख्य सवाल पूछे हैं: वे एपस्टीन से किस तरह की सलाह ले रहे थे, इजराइल दौरे के संदर्भ में 'नाच-गाना' शब्द का क्या अर्थ है, और ई-मेल में उल्लिखित 'IT WORKED' का क्या परिणाम निकला?
विदेश मंत्रालय का आधिकारिक स्पष्टीकरण
इन आरोपों के सार्वजनिक होने के तुरंत बाद विदेश मंत्रालय ने एक आधिकारिक बयान जारी किया। सरकार ने कहा कि प्रधानमंत्री का जुलाई 2017 का इजराइल दौरा पूरी तरह से आधिकारिक और द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने के उद्देश्य से था। मंत्रालय ने कहा, "हमने एपस्टीन फाइल्स से जुड़े एक ई-मेल की खबरें देखी हैं। ई-मेल में कही गई बातें एक दोषी अपराधी की मनगढ़ंत कल्पनाएं हैं। " सरकार ने स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में इस तरह के असत्यापित दस्तावेजों का कोई स्थान नहीं है और यह केवल राजनीतिक लाभ के लिए किया जा रहा दुष्प्रचार है।
जेफ्री एपस्टीन मामला और फाइल्स का विवरण
जेफ्री एपस्टीन न्यूयॉर्क का एक करोड़पति फाइनेंसर था, जिस पर 2005 में पहली बार नाबालिग के यौन उत्पीड़न का आरोप लगा था। 2008 में उसे दोषी ठहराया गया और 13 महीने की जेल हुई। 2019 में उसे फिर से सेक्स ट्रैफिकिंग के आरोपों में गिरफ्तार किया गया, जिसके बाद अगस्त 2019 में जेल के अंदर उसकी संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। 80 लाख तस्वीरें जारी की हैं। इन फाइल्स में दुनिया के कई प्रभावशाली व्यक्तियों जैसे डोनाल्ड ट्रंप, बिल गेट्स, एलन मस्क और ब्रिटेन के प्रिंस एंड्रयू के नामों का भी उल्लेख है।
राजनीतिक और कूटनीतिक विश्लेषण
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, कांग्रेस द्वारा इन फाइल्स के आधार पर प्रधानमंत्री को घेरना आगामी चुनावों और अंतरराष्ट्रीय छवि को प्रभावित करने की रणनीति का हिस्सा हो सकता है। हालांकि, विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि एपस्टीन जैसे व्यक्ति के निजी पत्राचार में किसी का नाम होने मात्र से कोई कानूनी दोष सिद्ध नहीं होता, जब तक कि ठोस साक्ष्य न हों। कूटनीतिक स्तर पर, भारत सरकार ने इसे 'चरित्र हनन' का प्रयास बताया है। फाइल्स में डोनाल्ड ट्रंप के साथ एपस्टीन के दोस्ताना संबंधों और उनके पाम बीच स्थित घर पर ट्रंप की आवाजाही का भी विवरण दिया गया है, जिससे अमेरिका में भी राजनीतिक सरगर्मी तेज है।
डिस्क्लेमर
यह समाचार रिपोर्ट उपलब्ध सार्वजनिक जानकारी और आधिकारिक बयानों पर आधारित है। यह लेख किसी भी प्रकार की राजनीतिक राय या कानूनी निष्कर्ष प्रदान नहीं करता है। पाठकों को सलाह दी जाती है कि वे आधिकारिक सरकारी दस्तावेजों और कानूनी रिपोर्टों का संदर्भ लें।
