अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में जारी तेजी ने भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए चिंताजनक स्थिति पैदा कर दी है। पिछले तीन हफ्तों से कच्चे तेल के दाम 100 डॉलर प्रति बैरल के मनोवैज्ञानिक स्तर से ऊपर बने हुए हैं। भारत अपनी तेल जरूरतों का लगभग 88 प्रतिशत हिस्सा आयात के माध्यम से पूरा करता है, जिसके कारण वैश्विक बाजार में होने वाली किसी भी बढ़ोतरी का सीधा असर घरेलू तेल विपणन कंपनियों (OMCs) की लागत पर पड़ता है। लागत में इस निरंतर वृद्धि के कारण कंपनियों पर दबाव बढ़ रहा है, जिसका परिणाम हाल ही में कीमतों में हुई बढ़ोतरी के रूप में सामने आया है।
महानगरों में पेट्रोल और डीजल की वर्तमान स्थिति
इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOCL) द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, शनिवार को देश के चारों प्रमुख महानगरों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। यह स्थिरता शुक्रवार को हुई 3 रुपये प्रति लीटर की भारी बढ़ोतरी के बाद आई है। इसका अर्थ यह है कि शनिवार को भी उपभोक्ताओं को शुक्रवार वाले दाम पर ही ईंधन खरीदना होगा। कीमतों में इस हालिया उछाल ने आम आदमी की जेब पर बोझ बढ़ा दिया है, खासकर तब जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं। पिछले 23 दिनों से कच्चे तेल की कीमत लगातार 100 डॉलर प्रति बैरल के पार बनी हुई है।
प्रमुख शहरों में ईंधन के दाम
67 रुपये प्रति लीटर पर स्थिर हैं। दिल्ली एकमात्र ऐसा महानगर है जहां पेट्रोल की कीमत अभी भी 100 रुपये से कम बनी हुई है। 13 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गए हैं। 14 रुपये प्रति लीटर की दर से बिक रहा है। 25 रुपये प्रति लीटर दर्ज की गई है। खास बात यह है कि चारों महानगरों में डीजल के दाम अभी 100 रुपये के पार नहीं गए हैं, हालांकि चेन्नई और कोलकाता में यह 95 रुपये के ऊपर निकल चुके हैं।
कच्चे तेल के बाजार का विश्लेषण
24 अप्रैल 2026 से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लगातार 100 डॉलर प्रति बैरल के पार बनी हुई हैं। 35 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। 75 डॉलर प्रति बैरल के उच्च स्तर तक भी पहुंचा था। 42 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव का यह दौर जारी रह सकता है, जिससे घरेलू बाजार में भी तेल की कीमतों को लेकर अनिश्चितता बनी रहेगी।
