दिवाली और धनतेरस का पावन अवसर नजदीक आते ही बाजारों में रौनक बढ़ जाती है और लोग सोने के साथ-साथ चांदी की खरीदारी करने के लिए भी उमड़ पड़ते हैं। इस त्योहारी सीजन में अगर आप भी चांदी के सिक्के, आकर्षक गहने, बर्तन या फिर पूजा का अन्य सामान खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो केवल उसकी कीमत और डिजाइन देखकर ही अपना फैसला बिल्कुल न करें। बाजार में खरीदारी करते समय चांदी की शुद्धता, उस पर मौजूद हॉलमार्क और खरीदारी के पक्के बिल की जांच करना बेहद जरूरी होता है। कई बार ग्राहक सिर्फ चमक-धमक देखकर ठगी का शिकार हो जाते हैं और उन्हें कम शुद्धता वाला सामान थमा दिया जाता है। इसलिए यह आवश्यक है कि आप खरीदारी से पहले चांदी से जुड़ी सभी तकनीकी बातों को अच्छी तरह समझ लें ताकि आपकी मेहनत की कमाई सुरक्षित रहे और आपको बिल्कुल असली सामान मिले।
बाजार में मिलने वाली चांदी के नंबरों का मतलब
बाजार में मुख्य रूप से 999, 925 और 800 जैसी अलग-अलग शुद्धता वाली चांदी उपलब्ध होती है। चांदी पर लिखा हुआ यह नंबर इस बात को स्पष्ट करता है कि उसके कुल एक हजार हिस्सों में से कितने हिस्से शुद्ध चांदी के हैं। हर तरह की चांदी का उपयोग अलग-अलग प्रकार की वस्तुएं और उत्पाद बनाने के लिए किया जाता है।
- 999 चांदी: इस श्रेणी की चांदी में 99 रुपये 9 पैसे प्रतिशत शुद्ध चांदी होती है। इसका इस्तेमाल आमतौर पर निवेश के उद्देश्य से खरीदे जाने वाले भारी चांदी के सिक्कों और छड़ों में किया जाता है।
- 925 चांदी: इस प्रकार की चांदी में 92 रुपये 5 पैसे प्रतिशत शुद्ध चांदी पाई जाती है। इसका बचा हुआ हिस्सा आमतौर पर तांबे जैसी अन्य मजबूत धातुओं का होता है। इस मिश्रण से बनने वाले गहने काफी मजबूत होते हैं और ग्राहकों को रोजाना इस्तेमाल करने में बहुत आसानी रहती है।
- 800 चांदी: इसमें 80 प्रतिशत शुद्ध चांदी होती है और शेष हिस्सा अन्य धातुओं का होता है। इस चांदी का इस्तेमाल मुख्य रूप से पायल और कुछ विशेष पूजा की वस्तुओं के निर्माण में किया जाता है।
भारतीय मानक ब्यूरो यानी बीआईएस चांदी के लिए 800, 835, 900, 925, 958, 970, 990 और 999 जैसे विभिन्न शुद्धता स्तरों को आधिकारिक रूप से मान्यता प्रदान करता है। एक आम धारणा यह होती है कि जितनी ज्यादा शुद्ध चांदी होगी, वह वस्तु उतनी ही अच्छी होगी, लेकिन यह हमेशा सही नहीं होता है। अत्यधिक शुद्ध चांदी स्वभाव से अपेक्षाकृत नरम होती है, जिसके कारण उसमें बहुत जल्दी खरोंच लगने, मुड़ने या उसका आकार बिगड़ने का खतरा काफी ज्यादा बढ़ जाता है। इसलिए उपयोग के अनुसार सही शुद्धता वाली चांदी का चयन करना ही सबसे समझदारी भरा कदम माना जाता है।
क्या चांदी के गहनों पर हॉलमार्क होना अनिवार्य है?
सोने के गहनों की तरह ही चांदी की हॉलमार्किंग भी उसकी प्रामाणिकता और शुद्धता की सही पहचान करने में बहुत बड़ी मदद करती है। हालांकि, मौजूदा नियमों के तहत चांदी के लिए हॉलमार्किंग की प्रक्रिया अभी स्वैच्छिक यानी वैकल्पिक है। इसका सीधा मतलब यह है कि बाजार में बिना हॉलमार्क वाली चांदी की वस्तुएं भी वैध रूप से बेची जा सकती हैं और इसके बावजूद, यदि आप अपनी सुरक्षा के लिए हॉलमार्क वाला सामान ही खरीदते हैं, तो उस पर दिए गए कुछ विशेष निशानों को बेहद सावधानी के साथ जरूर देखना चाहिए। इन निशानों में मुख्य रूप से भारतीय मानक ब्यूरो का मानक चिह्न शामिल होता है और इसके साथ ही चांदी की सटीक पहचान के लिए उस पर अंग्रेजी में एसआईएलवीआर यानी SILVER लिखा होना चाहिए। इसके अलावा शुद्धता का आधिकारिक नंबर जैसे 800, 925 या 999 और छह अंकों का एक विशिष्ट अक्षर और नंबर वाला एचयूआईडी कोड भी उस पर अंकित होना चाहिए। एक सितंबर 2025 से हॉलमार्किंग के लिए आधिकारिक तौर पर जमा की जाने वाली चांदी की सभी वस्तुओं पर संशोधित मानक के तहत छह अंकों के एचयूआईडी कोड का अनिवार्य रूप से इस्तेमाल किया जाता है, जो इसकी सुरक्षा को और अधिक पुख्ता करता है।
बीआईएस केयर ऐप की मदद से ऐसे करें हॉलमार्क की जांच
यदि आप यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि आपने जो चांदी खरीदी है वह पूरी तरह से असली है या नहीं, तो आप सरकार द्वारा बनाए गए बीआईएस केयर ऐप का उपयोग कर सकते हैं। इसके सत्यापन की प्रक्रिया बेहद आसान है जिसे कोई भी ग्राहक अपने स्मार्टफोन के जरिए आसानी से पूरा कर सकता है और सबसे पहले आपको अपने मोबाइल फोन में बीआईएस केयर ऐप डाउनलोड करना होगा। उसके बाद ऐप के होमपेज पर जाकर एचयूआईडी सत्यापन का विकल्प चुनना होगा। इसके पश्चात चांदी की वस्तु पर उकेरे गए छह अंकों के विशिष्ट कोड को ऐप में सावधानीपूर्वक दर्ज करना होगा। कोड दर्ज करने के बाद जैसे ही आप खोजेंगे, आपकी स्क्रीन पर उस वस्तु से जुड़ी सभी आधिकारिक जानकारी खुलकर सामने आ जाएगी। अंत में आपको स्क्रीन पर दिखाई देने वाली सभी जानकारियों का मिलान अपने असली सामान पर दी गई डिटेल्स के साथ कर लेना चाहिए ताकि किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी की कोई गुंजाइश न बचे। त्योहारी सीजन में इस प्रकार की सतर्कता बरतकर आप अपनी दिवाली और धनतेरस को पूरी तरह सुरक्षित और आनंदमय बना सकते हैं।
