संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हवाई सुरक्षा में एक बड़ी चूक का गंभीर मामला सामने आया है, जिसने सुरक्षा एजेंसियों के बीच हड़कंप मचा दिया है। इस घटना के बाद फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन (FAA) ने तुरंत हरकत में आते हुए इस हवाई ‘सुरक्षा घटना’ की विस्तृत जांच शुरू कर दी है। जानकारी के अनुसार, राष्ट्रपति का आधिकारिक मरीन वन हेलिकॉप्टर वाशिंगटन DC के आसमान में एक दूसरे कमर्शियल विमान के बेहद करीब आ गया था। यह स्थिति विमानन नियमों के तहत निर्धारित सुरक्षा मानकों का स्पष्ट उल्लंघन थी। हालांकि व्हाइट हाउस ने इस बात पर जोर दिया है कि राष्ट्रपति को कोई खतरा नहीं था, लेकिन इस घटना ने राजधानी के प्रतिबंधित हवाई क्षेत्र में एयर ट्रैफिक कंट्रोल की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
कैसे हुई सुरक्षा में यह बड़ी चूक
यह घटना मंगलवार दोपहर की है जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को लेकर मिलिट्री हेलिकॉप्टर मरीन वन ने व्हाइट हाउस से अपनी उड़ान भरी थी। बताया जा रहा है कि जिस समय राष्ट्रपति का हेलिकॉप्टर हवा में था, उसी दौरान उत्तरी वर्जीनिया के रोनाल्ड रीगन नेशनल एयरपोर्ट पर तैनात एयर ट्रैफिक कंट्रोलर (ATC) गलती से कमर्शियल उड़ानों को रोकने में विफल रहे। नियमों के मुताबिक, राष्ट्रपति की उड़ान के दौरान आसपास के हवाई यातायात को नियंत्रित या स्थगित किया जाना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। इसी चूक के कारण मरीन वन और फ्लोरिडा जा रहे एक पैसेंजर जेट के बीच की दूरी खतरनाक रूप से कम हो गई। समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार, इसे ‘लॉस ऑफ सेपरेशन’ यानी विमानों के बीच की दूरी कम होने की घटना माना जा रहा है।
विमानों की पहचान और उड़ान का समय
इस घटना में शामिल कमर्शियल विमान एम्ब्रेयर E170 जेट था, जिसे अमेरिकन एयरलाइंस की सहायक कंपनी एनवॉय एयर द्वारा फ्लाइट 3742 के रूप में संचालित किया जा रहा था। ट्रैकिंग वेबसाइट फ्लाइटअवेयर के आंकड़ों के अनुसार, यह विमान मंगलवार को दोपहर 2:18 बजे रीगन नेशनल एयरपोर्ट पर अपने गेट से निकला था, लेकिन इसे उड़ान भरने में 34 मिनट की देरी हुई। अंततः इस विमान ने दोपहर 2:34 बजे उड़ान भरी। वहीं दूसरी ओर, राष्ट्रपति ट्रंप को लेकर मरीन वन ने दोपहर 2:33 बजे व्हाइट हाउस के पास एलिप्स से उड़ान भरी थी। यानी दोनों विमान लगभग एक ही समय पर हवा में थे, जिससे उनके बीच की दूरी नियमों के उल्लंघन की सीमा तक कम हो गई।
क्या कहते हैं सुरक्षा के कड़े नियम
पिछले साल जनवरी में वाशिंगटन DC के ऊपर एक कमर्शियल एयरलाइनर और सेना के ब्लैक हॉक हेलिकॉप्टर के बीच हुई भीषण टक्कर के बाद हवाई सुरक्षा नियमों को काफी सख्त कर दिया गया था और उस हादसे में 67 लोगों की मौत हो गई थी, जिसके बाद सरकार ने अपनी लापरवाही स्वीकार की थी। 5 मील की क्षैतिज (Horizontal) और 500 फीट की ऊर्ध्वाधर (Vertical) दूरी बनाए रखना अनिवार्य है। मंगलवार की घटना में मरीन वन और एनवॉय जेट के बीच यह तय दूरी बरकरार नहीं रह सकी थी। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि दोनों विमान एक-दूसरे से टकराने की स्थिति में नहीं थे और उन्होंने बिना किसी बाधा के अपनी यात्रा पूरी की। एनवॉय जेट दोपहर 3:33 बजे सुरक्षित रूप से पेन्साकोला में लैंड कर गया।
तीसरे विमान की मौजूदगी और जांच का दायरा
जांच में यह भी सामने आया है कि उस समय एक तीसरा विमान भी क्षेत्र में मौजूद था। नॉर्थ कैरोलिना के रैले-डरहम इंटरनेशनल एयरपोर्ट से वाशिंगटन DC आ रही रीजनल फ्लाइट ‘रिपब्लिक 4700’ उस समय रीगन नेशनल एयरपोर्ट से महज 3 मील यानी लगभग 5 किलोमीटर की दूरी पर थी। स्थिति को देखते हुए इस विमान को लैंड करने के बजाय हवा में ही चक्कर लगाने का निर्देश दिया गया, जिसके बाद यह दोपहर 2:52 बजे लैंड कर सका। व्हाइट हाउस के प्रवक्ता कुश देसाई ने इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि मरीन वन की उड़ानें दुनिया के बेहतरीन पायलटों द्वारा संचालित की जाती हैं और राष्ट्रपति को किसी भी समय कोई खतरा नहीं था। फिलहाल FAA ने इस घटना की समीक्षा के लिए एक विशेष सुरक्षा टीम गठित करने का निर्णय लिया है ताकि भविष्य में ऐसी चूकों को रोका जा सके।
