अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान की बेहद सुरक्षित और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण भूमिगत साइट पिकएक्स माउंटेन पर हमला करने की सीधी धमकी देकर अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल मचा दी है। 4 सितंबर को दिए गए अपने बयान में ट्रंप ने स्पष्ट किया कि यदि इस स्थान पर कोई भी संदिग्ध गतिविधि दिखाई देती है, तो अमेरिका बहुत जल्द इस जगह पर सैन्य कार्रवाई कर सकता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि अमेरिकी खुफिया एजेंसियां पिकएक्स माउंटेन पर होने वाली हर छोटी-बड़ी गतिविधि पर पैनी नजर रख रही हैं ताकि ईरान की किसी भी गुप्त परमाणु योजना को समय रहते विफल किया जा सके।
परमाणु हथियारों को रोकने का अमेरिकी संकल्प
ट्रंप ने अपने संबोधन में कहा कि ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य अभियान का मुख्य और एकमात्र मकसद उसे परमाणु हथियार बनाने से रोकना है। उनका दावा है कि पिछले पांच महीने की निरंतर कार्रवाई के बाद अब ईरान परमाणु हथियार हासिल करने की स्थिति में नहीं रह पाएगा। यह बयान दर्शाता है कि ट्रंप प्रशासन ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर किसी भी तरह का समझौता करने के मूड में नहीं है और वह सैन्य विकल्प को प्राथमिकता दे रहा है। पिकएक्स माउंटेन पर हमले की धमकी इसी रणनीति का एक हिस्सा मानी जा रही है।
पिकएक्स माउंटेन की भौगोलिक स्थिति और संरचना
पिकएक्स माउंटेन, जिसे स्थानीय स्तर पर ईरान में कू-ए-कोलांग के नाम से जाना जाता है, ईरान के सबसे बड़े यूरेनियम संवर्धन केंद्र नतांज के ठीक दक्षिण में स्थित है। नतांज की संवेदनशीलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 2025 और 2026 में अमेरिका और इजराइल इस पर हमले कर चुके हैं। पिकएक्स माउंटेन पहाड़ के सीने को चीरकर बनाई गई एक अभेद्य भूमिगत साइट है। इसमें दो विशाल और गहरी सुरंगों वाले कॉम्प्लेक्स शामिल हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस साइट का मुख्य हिस्सा जमीन के करीब 100 मीटर नीचे स्थित हो सकता है। इस पूरी सुविधा में प्रवेश के लिए चार मुख्य द्वार हैं, जिनमें से दो पूर्व दिशा में और दो पश्चिम दिशा में खुलते हैं।
सैटेलाइट तस्वीरों से मिले निर्माण के संकेत
पिकएक्स माउंटेन की गतिविधियों को लेकर सैटेलाइट तस्वीरों ने कई बड़े खुलासे किए हैं और 30 जून 2026 को ली गई तस्वीरों में इस साइट के पश्चिमी प्रवेश द्वार के पास भारी निर्माण वाहन देखे गए थे, जो इस बात का संकेत देते हैं कि यहां लगातार विस्तार कार्य चल रहा है। हाल के महीनों में यहां तक पहुंचने वाली सड़कों और सुरंगों के एंट्री पॉइंट पर भी काम जारी रहने की खबरें सामने आई हैं। वॉल स्ट्रीट जनरल की एक रिपोर्ट के अनुसार, इजराइली खुफिया एजेंसी का यह आकलन है कि ईरान ने इस सुरक्षित स्थान पर हजारों सेंट्रीफ्यूज पहुंचा दिए हैं। सेंट्रीफ्यूज का उपयोग यूरेनियम को परमाणु ग्रेड तक शुद्ध करने के लिए किया जाता है। इसके अलावा, यह भी दावा किया जा रहा है कि ईरान ने अपने अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम का एक बड़ा हिस्सा इसी पहाड़ के नीचे छिपा कर रखा है।
ईरान का पक्ष और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
इन तमाम आरोपों के बीच ईरान ने पिकएक्स माउंटेन में किसी भी प्रकार की परमाणु गतिविधि होने से साफ इनकार किया है। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने 22 जुलाई को एक बयान जारी कर कहा था कि इस साइट पर कोई परमाणु कार्य नहीं हो रहा है। हालांकि, इस जगह के वास्तविक उपयोग को लेकर दुनिया भर में संशय बना हुआ है और माना जाता है कि इसे नतांज में 2020 में क्षतिग्रस्त हुई एडवांस सेंट्रीफ्यूज असेंबली इमारत के विकल्प के रूप में तैयार किया जा रहा है। सितंबर 2020 में ईरान के परमाणु संगठन के तत्कालीन प्रमुख अली अकबर सालेही ने भी नतांज के पास पहाड़ों के भीतर एक अधिक आधुनिक और बड़ी सुविधा बनाने की योजना का जिक्र किया था ताकि बाहरी हमलों से बचा जा सके।
सैन्य चुनौती और GBU-57 बंकर बस्टर की सीमाएं
पिकएक्स माउंटेन पर हमला करना अमेरिका के लिए तकनीकी रूप से एक बड़ी चुनौती है। इसकी सबसे बड़ी सुरक्षा इसकी 100 मीटर की गहराई है, जो ईरान की अन्य साइटों जैसे फोर्डो और नतांज से भी अधिक हो सकती है। पिछले साल अमेरिका ने इन साइटों को निशाना बनाने के लिए GBU-57 बंकर बस्टर बमों का इस्तेमाल किया था। यह बम लगभग 13000 किलो वजनी है और इसमें 18 मीटर कंक्रीट या 61 मीटर मिट्टी को भेदने की क्षमता है। इसके बावजूद, विशेषज्ञों का कहना है कि 100 मीटर की गहराई पर स्थित पिकएक्स माउंटेन को पूरी तरह नष्ट करना इस बम के लिए भी मुश्किल हो सकता है। सुरंगों का सटीक नक्शा न होने के कारण हर भूमिगत हिस्से को निशाना बनाना लगभग असंभव कार्य है।
क्षेत्रीय तनाव और भविष्य की आशंकाएं
ट्रंप की यह नई धमकी ऐसे समय में आई है जब अमेरिका ने हाल ही में ईरान के IRGC से जुड़े कई ठिकानों पर हमले किए हैं। इन हमलों में एयर डिफेंस सिस्टम, रडार, समुद्री ठिकाने और संचार केंद्रों को निशाना बनाया गया था। अमेरिका का तर्क है कि यह कार्रवाई होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों और अमेरिकी सैनिकों पर ईरान के कथित हमलों के जवाब में की गई थी और दूसरी ओर, ईरान ने इन हमलों को अपनी संप्रभुता का खुला उल्लंघन करार दिया है और पश्चिम एशिया में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर जवाबी हमले की चेतावनी दी है। ऐसे में यदि पिकएक्स माउंटेन पर हमला होता है, तो यह ईरान के परमाणु ढांचे के खिलाफ अब तक का सबसे बड़ा अभियान होगा, जिससे पूरे क्षेत्र में युद्ध की स्थिति पैदा हो सकती है।
