ट्रंप का नॉर्वे पर फूटा गुस्सा: नोबेल नहीं मिला तो ग्रीनलैंड पर कब्जे की धमकी!

डोनाल्ड ट्रंप ने नोबेल शांति पुरस्कार न मिलने पर नॉर्वे को निशाने पर लिया है। उन्होंने ग्रीनलैंड पर कब्जे की धमकी देते हुए कहा कि अब शांति की उनकी कोई जिम्मेदारी नहीं है।

अमेरिकी राजनीति में एक बार फिर हलचल मच गई है क्योंकि पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नोबेल शांति पुरस्कार को लेकर नॉर्वे के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। ट्रंप ने अपनी नाराजगी को सीधे तौर पर ग्रीनलैंड पर नियंत्रण करने की अपनी पुरानी इच्छा से जोड़ दिया है। उन्होंने नॉर्वे के प्रधानमंत्री को एक पत्र लिखकर स्पष्ट किया है कि चूंकि उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार से नवाजा नहीं गया, इसलिए अब वे अंतरराष्ट्रीय शांति बनाए रखने की किसी भी नैतिक जिम्मेदारी से खुद को मुक्त महसूस करते हैं। यह विवाद न केवल व्यक्तिगत नाराजगी का है, बल्कि इसमें वैश्विक। कूटनीति और रणनीतिक क्षेत्रों पर कब्जे की मंशा भी छिपी हुई है।

नोबेल पुरस्कार और ट्रंप की नाराजगी

डोनाल्ड ट्रंप लंबे समय से नोबेल शांति पुरस्कार पाने की इच्छा रखते रहे हैं और उनका मानना है कि उनके कार्यकाल के दौरान हुए कई समझौतों के लिए वे इस सम्मान के हकदार थे। हालांकि, जब उन्हें यह पुरस्कार नहीं मिला, तो उन्होंने इसका ठीकरा नॉर्वे पर फोड़ दिया। ट्रंप ने अपने पत्र में कड़े शब्दों का इस्तेमाल करते हुए कहा कि नॉर्वे ने उन्हें नजरअंदाज किया है। उन्होंने इसे एक व्यक्तिगत अपमान की तरह लिया है और अब वे ग्रीनलैंड जैसे रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर अमेरिकी नियंत्रण को लेकर अधिक आक्रामक रुख अपना रहे हैं।

ग्रीनलैंड पर कब्जे की जिद और टैरिफ का डर

ग्रीनलैंड वर्तमान में डेनमार्क का एक स्व-शासित क्षेत्र है, लेकिन ट्रंप इसे अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानते हैं। उन्होंने फिर से ग्रीनलैंड पर कब्जा करने या उसे पूरी तरह से नियंत्रित करने की धमकी दी है और नॉर्वे ने इस मामले में डेनमार्क का समर्थन किया है, जिससे ट्रंप और अधिक भड़क गए हैं। अपनी नाराजगी जाहिर करने के लिए ट्रंप ने डेनमार्क का सहयोग करने वाले देशों पर 10 प्रतिशत टैरिफ लगाने की घोषणा की है। यह आर्थिक दबाव यूरोपीय देशों के बीच तनाव पैदा कर रहा है, क्योंकि ट्रंप फरवरी से इन टैरिफ को लागू करने पर अड़े हुए हैं।

कौन देता है नोबेल पुरस्कार और क्या है प्रक्रिया?

नोबेल पुरस्कार दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित सम्मानों में से एक है, जो विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वालों को दिया जाता है। नोबेल शांति पुरस्कार की जिम्मेदारी विशेष रूप से नॉर्वे की नोबेल समिति के पास होती है। अल्फ्रेड नोबेल ने अपनी वसीयत में स्पष्ट किया था कि शांति पुरस्कार का चयन नॉर्वे की संसद द्वारा चुनी गई एक स्वतंत्र समिति करेगी। अन्य नोबेल पुरस्कार स्वीडन में दिए जाते हैं, लेकिन शांति पुरस्कार ओस्लो, नॉर्वे में प्रदान किया जाता है और यह समिति पूरी तरह से स्वतंत्र होती है और इस पर नॉर्वे की सरकार का कोई सीधा नियंत्रण नहीं होता है।

नॉर्वे के प्रधानमंत्री का स्पष्टीकरण

नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनास गहर स्टॉरे ने ट्रंप के आरोपों और उनके पत्र का सार्वजनिक रूप से जवाब दिया है। स्टॉरे ने साफ किया कि नोबेल शांति पुरस्कार देने का निर्णय सरकार का नहीं, बल्कि एक स्वतंत्र समिति का होता है। उन्होंने कहा कि उन्होंने राष्ट्रपति ट्रंप सहित सभी को यह स्पष्ट कर दिया है कि इसमें राजनीतिक हस्तक्षेप की कोई गुंजाइश नहीं है और इसके साथ ही नॉर्वे ने ग्रीनलैंड पर अमेरिका के किसी भी तरह के जबरन नियंत्रण का विरोध किया है और बातचीत के जरिए समाधान निकालने की अपील की है।

भू-राजनीतिक प्रभाव और भविष्य की राह

ट्रंप का यह रुख अंतरराष्ट्रीय संबंधों में एक नई अस्थिरता पैदा कर सकता है। ग्रीनलैंड अपनी भौगोलिक स्थिति के कारण आर्कटिक क्षेत्र में बहुत महत्वपूर्ण है। यदि अमेरिका इस पर नियंत्रण की कोशिश करता है, तो इससे नाटो सहयोगियों के बीच दरार पड़ सकती है। ट्रंप की 'शांति की जिम्मेदारी नहीं' वाली टिप्पणी वैश्विक सुरक्षा के लिहाज से चिंताजनक मानी जा रही है। अब देखना यह होगा कि क्या यूरोपीय देश ट्रंप के आर्थिक दबाव के आगे झुकते हैं या फिर नोबेल समिति की स्वतंत्रता और डेनमार्क की संप्रभुता पर कायम रहते हैं।