अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर ने ईरान के खिलाफ जारी सैन्य कार्रवाई पर एक महत्वपूर्ण अपडेट साझा किया है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, पिछले 72 घंटों के भीतर अमेरिकी बमवर्षक विमानों ने ईरान की सीमा के अंदर लगभग 200 रणनीतिक लक्ष्यों पर सटीक हमले किए हैं। यह कार्रवाई 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य ईरान की आक्रामक सैन्य क्षमताओं को पंगु बनाना है और एडमिरल कूपर ने स्पष्ट किया कि इन हमलों ने न केवल ईरान के वर्तमान हथियार भंडार को नुकसान पहुँचाया है, बल्कि उसकी भविष्य की युद्धक क्षमता को भी गंभीर रूप से प्रभावित किया है।
संघर्ष की पृष्ठभूमि और वर्तमान स्थिति
इस सैन्य टकराव की शुरुआत 28 फरवरी को हुई थी, जब अमेरिका और इजरायल ने एक संयुक्त अभियान के दौरान ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई सहित कई शीर्ष सैन्य और राजनीतिक नेताओं को निशाना बनाया था। इस घटना के बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए कई अरब देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइलों से हमले शुरू कर दिए थे। इसी के जवाब में अमेरिकी सेना ने 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' को गति दी है, ताकि ईरान की हमलावर क्षमता को पूरी तरह से समाप्त किया जा सके और सैन्य अधिकारियों के अनुसार, यह ऑपरेशन अब अपने सबसे आक्रामक चरण में पहुँच चुका है।
ऑपरेशन एपिक फ्यूरी और बी-2 बमवर्षकों की भूमिका
एडमिरल कूपर ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बताया कि अमेरिकी वायु सेना के बी-2 स्पिरिट स्टील्थ बमवर्षक इस अभियान में मुख्य भूमिका निभा रहे हैं। पिछले कुछ घंटों के दौरान, इन विमानों ने 2000 पाउंड वाले दर्जनों 'पेनेट्रेटर' बम गिराए हैं। ये बम विशेष रूप से जमीन के काफी नीचे बने कंक्रीट के बंकरों और छिपे हुए बैलिस्टिक मिसाइल लॉन्चरों को नष्ट करने के लिए डिजाइन किए गए हैं। कूपर के अनुसार, अमेरिकी बमवर्षक बल ईरान के अंदर काफी गहराई तक जाकर उन ठिकानों को निशाना बना रहे हैं जिन्हें ईरान सुरक्षित समझता था।
ईरानी मिसाइल और ड्रोन क्षमता में गिरावट
CENTCOM द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, अमेरिकी हमलों का ईरान की युद्धक क्षमता पर व्यापक असर पड़ा है। एडमिरल कूपर ने बताया कि ऑपरेशन शुरू होने के बाद से पिछले 24 घंटों में ईरान द्वारा किए जाने वाले बैलिस्टिक मिसाइल हमलों में 90% की भारी गिरावट दर्ज की गई है। इसके अतिरिक्त, ड्रोन हमलों में भी 83% की कमी आई है। नौसैनिक मोर्चे पर भी ईरान को बड़ा नुकसान हुआ है, जहाँ अब तक उसके 30 से अधिक युद्धपोत और सैन्य जहाज नष्ट किए जा चुके हैं। अधिकारियों का कहना है कि यह गिरावट अमेरिकी हवाई हमलों की सटीकता और प्रभावशीलता को दर्शाती है।
राष्ट्रपति ट्रंप का रणनीतिक निर्देश और उत्पादन ढांचा
एडमिरल कूपर ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सेना को एक विशिष्ट और दीर्घकालिक लक्ष्य सौंपा है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति का निर्देश केवल ईरान के मौजूदा हथियारों को नष्ट करने तक सीमित नहीं है, बल्कि उसकी मिसाइल बनाने की औद्योगिक क्षमता को पूरी तरह से जमींदोज करना है। अमेरिकी सेना अब ईरान की मिसाइल उत्पादन फैक्ट्रियों, अनुसंधान केंद्रों और बुनियादी ढांचे को व्यवस्थित रूप से निशाना बना रही है और इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ईरान निकट भविष्य में अपनी खोई हुई सैन्य शक्ति को दोबारा हासिल न कर सके।
क्षेत्रीय सुरक्षा और भविष्य की सैन्य योजनाएं
अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, यह अभियान तब तक जारी रहेगा जब तक ईरान की मिसाइल इंडस्ट्री पूरी तरह से निष्क्रिय नहीं हो जाती। एडमिरल कूपर ने कहा कि हम केवल उनके पास मौजूद हथियारों को ही नष्ट नहीं कर रहे हैं, बल्कि उनके पुनर्निर्माण की क्षमता को भी खत्म कर रहे हैं। वर्तमान में अमेरिकी खुफिया एजेंसियां और सैन्य बल ईरान के भीतर उन गुप्त ठिकानों की पहचान कर रहे हैं जहाँ मिसाइल घटकों का निर्माण किया जाता है। अधिकारियों के मुताबिक, यह रणनीति क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने और अमेरिकी सहयोगियों पर होने वाले खतरों को कम करने के लिए अपनाई गई है।
