देश / महामारी में गंगा जल लाने के लिए कांवड़ियों की आवाजाही को अनुमति न दें राज्य: केंद्र

Zoom News : Jul 16, 2021, 01:47 PM
नई दिल्‍ली: केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर कर राज्य सरकार को कोविड-19 के मद्देनजर हरिद्वार से 'गंगा जल' लाने के लिए कांवड़ियों की आवाजाही की अनुमति नहीं देने का आग्रह किया है। सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश में कांवड़ यात्रा की इजाजत पर स्वतः संज्ञान लिया था। कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार और केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर माँगा जवाब था कि क्‍यों कांवड़ यात्रा होनी चाहिए।

केंद्र सरकार ने कहा कि कोरोना महामारी की तीसरी लहर की आशंका के मद्देनजर ऐसे किसी भी कार्यक्रम को इजाजत नहीं दी जानी चाहिए, जिससे भीड़ इकट्ठा हो। हालांकि, लोगों की धार्मिक भावनाओं को ध्‍यान में रखते हुए राज्‍य सरकारों को ऐसा सिस्‍टम बनाना चाहिए कि गंगा जल टैंकरों में भरकर उनतक पहुंच जाए।

केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि टैंकर चिन्हित/निर्धारित स्थानों पर उपलब्ध हों, ताकि आस-पास के भक्त 'गंगा जल' को इकट्ठा कर सकें और अपने नजदीकी शिव मंदिरों में 'अभिषेक' कर सकें। केंद्र ने आगे सुप्रीम कोर्ट को बताता है कि राज्य सरकारों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि ऐसे भक्तों द्वारा आस-पास के शिव मंदिरों में भक्तों और अनुष्ठानों के बीच 'गंगा जल' का वितरण अनिवार्य रूप से सामाजिक दूरी सुनिश्चित करने, मास्क पहनने और कोविड-19 संकट के दौरान आवश्यक सभी चरणों का पालन करने के लिए किया जाए।

कोर्ट ने कहा- कावड़ यात्रा कराने के निर्णय पर पुनर्विचार करे यूपी सरकार

सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार से कहा, 'वह कावड़ यात्रा कराने के निर्णय पर पुनर्विचार करे। कोर्ट ने प्रदेश सरकार को पुनर्विचार के लिए सोमवार तक का वक्त दिया है। सोमवार को मामले पर फिर सुनवाई होगी। कोर्ट उत्तर प्रदेश की सांकेतिक कावड़ यात्रा कराने की दलील से सहमत नहीं हुआ। कोर्ट ने कहा कोरोना महामारी है। सारे नागरिक इससे प्रभावित हैं। जीवन का अधिकार सर्वोपरि है। बाकी सारी भावनाएं और धार्मिक भावनाएं इस अधिकार के अधीन है। यात्रा की अनुमति नहीं दी जा सकती।

बता दें कि उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से कांवड़ यात्रा के लिए की गई तैयारियों का ब्यौरा कोर्ट में दिया जाना है। राज्य में 25 जुलाई से प्रस्तावित कांवड़ यात्रा के लिए कोरोना प्रोटोकाल के साथ पूरी तैयारी हो चुकी है। इसके तहत प्रत्येक श्रद्धालु को अपने साथ RTPCR नेगेटिव रिपोर्ट रखना होगा। वे शिव मंदिरों में गंगाजल चढ़ा सकते हैं लेकिन शारीरिक दूरी समेत तमाम कोविड प्रोटोकाल का पालन करते हुए।

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