कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) अपने करोड़ों सब्सक्राइबर्स के लिए पीएफ निकासी की प्रक्रिया को पूरी तरह से डिजिटल और सुपरफास्ट बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठा रहा है। इस नई योजना के तहत, अब ईपीएफओ सदस्यों को सीधे अपने यूपीआई आईडी (UPI ID) का उपयोग करके पीएफ का पैसा निकालने या ट्रांसफर करने का विकल्प मिलेगा। वर्तमान व्यवस्था में, पीएफ क्लेम करने के बाद पैसा बैंक खाते में पहुंचने में आमतौर पर 3 से 7 दिनों का समय लगता है, और कई बार यह अवधि इससे भी अधिक हो जाती है। यूपीआई सुविधा शुरू होने के बाद, जैसे ही क्लेम अप्रूव होगा, पैसा रियल-टाइम में तुरंत सदस्य के खाते में ट्रांसफर हो जाएगा।
मंत्री मनसुख मंडाविया ने दी जानकारी
केंद्रीय श्रम मंत्री मनसुख मंडाविया ने घोषणा की है कि ईपीएफओ के सदस्य जल्द ही अपना एम्प्लॉईज प्रोविडेंट फंड (EPF) यूपीआई के माध्यम से निकाल सकेंगे। उन्होंने बताया कि यूपीआई पेमेंट गेटवे के जरिए इस राशि को सीधे बैंक खातों में ट्रांसफर किया जा सकेगा और इस पूरी प्रक्रिया की टेस्टिंग सफलतापूर्वक पूरी कर ली गई है। मंगलवार को पत्रकारों से बातचीत के दौरान मंत्री ने स्पष्ट किया कि कर्मचारी भविष्य निधि संगठन अपनी सर्विस डिलीवरी की गुणवत्ता को बेहतर बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है और उन्होंने कहा कि हमने उस तकनीक का परीक्षण पूरा कर लिया है जिसके तहत सदस्य यूपीआई का उपयोग करके अपनी जमा राशि निकाल पाएंगे और यह पैसा सीधे उनके लिंक किए गए बैंक खाते में जमा हो जाएगा।
यूपीआई से निकासी की प्रक्रिया
श्रम मंत्रालय एक विशेष प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है जिसमें ईपीएफ का एक निश्चित हिस्सा सुरक्षित यानी फ्रीज रहेगा, जबकि एक बड़ा हिस्सा यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (UPI) का उपयोग करके बैंक खाते के माध्यम से निकालने के लिए उपलब्ध कराया जाएगा और सदस्य अपने लिंक किए गए बैंक खातों में ट्रांसफर के लिए उपलब्ध योग्य ईपीएफ बैलेंस को देख सकेंगे। सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए, सदस्यों को ट्रांजेक्शन पूरा करने के लिए अपने लिंक किए गए यूपीआई पिन का उपयोग करने की अनुमति दी जाएगी। एक बार जब पैसा बैंक खाते में ट्रांसफर हो जाता है, तो सदस्य अपनी आवश्यकतानुसार उसका उपयोग कर सकते हैं, जैसे कि डिजिटल भुगतान करना या बैंक एटीएम से डेबिट कार्ड के जरिए नकदी निकालना।
ऑटो-सेटलमेंट की सीमा 5 गुना बढ़ी
ईपीएफओ इस सिस्टम को सुचारू रूप से चलाने के लिए सॉफ्टवेयर संबंधी चुनौतियों को हल करने में जुटा है, जिससे 7 करोड़ से अधिक सदस्यों को सीधा लाभ मिलेगा। वर्तमान में, सदस्यों को पीएफ निकालने के लिए क्लेम आवेदन करना पड़ता है जिसमें समय लगता है। हालांकि, ऑटो-सेटलमेंट मोड के तहत, मानवीय हस्तक्षेप के बिना 3 दिनों के भीतर क्लेम का निपटारा कर दिया जाता है। सरकार ने इस ऑटो-सेटलमेंट मोड की सीमा को मौजूदा 1 लाख रुपये से बढ़ाकर 5 लाख रुपये कर दिया है। इस बदलाव से सदस्यों को बीमारी, शिक्षा, विवाह और घर निर्माण जैसे महत्वपूर्ण कार्यों के लिए 3 दिनों के भीतर 5 लाख रुपये तक की राशि निकालने में बड़ी आसानी होगी।
WhatsApp के जरिए नई डिजिटल पहल
मंत्री ने यह भी बताया कि ईपीएफओ ने अपनी पहुंच बढ़ाने और सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए व्हाट्सएप (WhatsApp) का उपयोग शुरू किया है। चूंकि अधिकांश मोबाइल उपयोगकर्ता व्हाट्सएप का उपयोग करते हैं, इसलिए ईपीएफओ ने इस प्लेटफॉर्म को चुना है। इस सुविधा के तहत, सदस्य ईपीएफओ के रजिस्टर्ड व्हाट्सएप नंबर पर केवल Hello टाइप करके अपनी बातचीत शुरू कर सकते हैं। सुरक्षा और विश्वसनीयता के लिए इस आधिकारिक नंबर पर एक हरे रंग का टिक मार्क (green tick mark) होगा। सदस्य अपने रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर ईपीएफओ से संदेश प्राप्त करने का विकल्प भी चुन सकते हैं। यह पूरी बातचीत स्थानीय और क्षेत्रीय भाषाओं में होगी, जिससे सदस्यों को अपनी भाषा में जुड़ने में आसानी होगी। यह सुविधा 24/7 उपलब्ध रहेगी और ऑटोमेटेड सिस्टम बार-बार पूछे जाने वाले सवालों के जवाब देगा।
लंबित मामलों और मुकदमों में कमी
इस पहल का एक मुख्य उद्देश्य उन सदस्यों की मदद करना है जो PMVBRY के तहत पात्र हैं लेकिन जिनके डेटा में कुछ कमियां हैं, जैसे कि आधार प्रमाणीकरण के लिए फेस ऑथेंटिकेशन (FAT) का पूरा न होना या बैंक खाते में डीबीटी (DBT) चालू न होना। व्हाट्सएप के जरिए इन समस्याओं का समाधान किया जाएगा और इसके अलावा, ईपीएफओ ने निधि आपके निकट (NAN) कार्यक्रम के माध्यम से मुकदमों को कम करने के लिए मिशन-मोड में काम किया है। इसके परिणामस्वरूप, उपभोक्ता अदालतों में लंबित मामलों की संख्या 1 अप्रैल 2024 को 4936 से घटकर 31 मार्च 2026 को 2646 रह गई है। कुल लंबित मुकदमों की संख्या 1 अप्रैल 2025 को 31036 से घटकर 1 अप्रैल 2026 को 27639 रह गई है, जो 3397 मामलों की कमी दर्शाती है। 10 साल से अधिक पुराने मामलों में 45 दशमलव 4 प्रतिशत की कमी आई है, जो 8539 से घटकर 4665 हो गए हैं। साथ ही, नियोक्ताओं द्वारा देरी से जमा की गई राशि पर ब्याज विवादों से जुड़ी 353 अपीलों का निपटारा भी विशेष अभियान के तहत किया गया है।
