विश्व बैंक की एक नई रिपोर्ट में भारत की एक चौंकाने वाली और जटिल आर्थिक तस्वीर सामने आई है जो विभिन्न राज्यों के बीच बढ़ते अंतर को उजागर करती है। जहां एक तरफ देश समग्र रूप से प्रगति कर रहा है वहीं राज्यों के बीच की आर्थिक खाई और गहरी होती जा रही है। इस रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली, गुजरात और कर्नाटक सहित भारत के 5 राज्यों ने शानदार आर्थिक प्रगति करते हुए विश्व बैंक के प्रतिष्ठित अपर-मिडिल इनकम यानी उच्च-मध्यम आय वाले क्लब में अपनी जगह पक्की कर ली है। इसके विपरीत उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे बड़े राज्य अब भी आर्थिक रूप से इतने पिछड़े हैं कि वहां के लोगों की औसत कमाई पड़ोसी देश नेपाल और उप-सहारा अफ्रीका के कई गरीब देशों से भी कम दर्ज की गई है।
राष्ट्रीय औसत और विश्व बैंक के मानक
इस विकास की गहराई को समझने के लिए राष्ट्रीय औसत और विश्व बैंक द्वारा निर्धारित पैमानों को देखना आवश्यक है। राष्ट्रीय स्तर पर भारत 2,760 डॉलर की प्रति व्यक्ति आय (एटलस पद्धति) के साथ अभी भी एक लोअर-मिडिल इनकम यानी निचली-मध्यम आय वाला देश बना हुआ है। यह आंकड़ा निचली-मध्यम आय के वैश्विक औसत 2,488 डॉलर से थोड़ा ही अधिक है। विश्व बैंक देशों को उनकी प्रति व्यक्ति आय के आधार पर चार श्रेणियों में बांटता है। इसमें 1,175 डॉलर से कम आय वालों को लो इनकम, 1,175 से 4,635 डॉलर वालों को लोअर-मिडिल इनकम, 4,636 से 14,375 डॉलर वालों को अपर-मिडिल इनकम और 14,375 डॉलर से ऊपर वालों को हाई इनकम वाला देश माना जाता है। मनीकंट्रोल की एक रिपोर्ट के अनुसार भारत के पांच राज्यों ने 4,636 डॉलर के बेंचमार्क को पार कर लिया है।
दिल्ली और कर्नाटक ने पेश की मिसाल
राज्यों के आंकड़ों का विश्लेषण करें तो दिल्ली 6,217 डॉलर की प्रति व्यक्ति आय के साथ पूरे देश में शीर्ष पर है। इसके बाद कर्नाटक का नंबर आता है जिसकी आय 5,579 डॉलर है। तेलंगाना 5,407 डॉलर, तमिलनाडु 5,329 डॉलर और गुजरात 4,734 डॉलर की प्रति व्यक्ति आय के साथ इस सूची में शामिल हैं। ये पांचों राज्य न केवल विश्व बैंक के मानक से ऊपर हैं बल्कि वैश्विक स्तर पर कई देशों को टक्कर दे रहे हैं। उदाहरण के लिए दिल्ली की अर्थव्यवस्था आज दक्षिण अफ्रीका (6,270 डॉलर), फिजी (6,230 डॉलर) और मंगोलिया (6,210 डॉलर) जैसे देशों के बराबर पहुंच गई है। वहीं कर्नाटक और तेलंगाना की प्रति व्यक्ति आय इंडोनेशिया (5,120 डॉलर) और वियतनाम (4,970 डॉलर) से भी अधिक हो चुकी है। यह एक बड़ी उपलब्धि है क्योंकि साल 1994 में भारत का कोई भी बड़ा राज्य इस आय वर्ग के करीब भी नहीं था।
महाराष्ट्र और हरियाणा बहुत मामूली अंतर से चूके
इस रिपोर्ट में कुछ ऐसे राज्यों का भी जिक्र है जो बहुत ही कम अंतर से इस क्लब में शामिल होने से रह गए। देश की आर्थिक राजधानी महाराष्ट्र की प्रति व्यक्ति आय 4,628 डॉलर रही जो अपर-मिडिल इनकम के कटऑफ से मात्र 8 डॉलर पीछे है। इसी तरह हरियाणा 4,627 डॉलर के साथ केवल 9 डॉलर से और केरल 4,610 डॉलर की आय के साथ महज 26 डॉलर के अंतर से इस बेंचमार्क को पार करने से चूक गया। ये राज्य आर्थिक परिवर्तन के मुहाने पर खड़े हैं और उम्मीद है कि जल्द ही वे इस श्रेणी में शामिल हो जाएंगे।
यूपी और बिहार की चिंताजनक स्थिति
जहां कुछ राज्य नए कीर्तिमान स्थापित कर रहे हैं वहीं देश का एक बड़ा हिस्सा गंभीर आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहा है। बिहार 984 डॉलर की प्रति व्यक्ति आय के साथ भारत का सबसे गरीब बड़ा राज्य बना हुआ है। उत्तर प्रदेश की आय 1,403 डॉलर और झारखंड की 1,470 डॉलर दर्ज की गई है। आंकड़े बताते हैं कि इन राज्यों के लोगों की औसत कमाई नेपाल और अफ्रीका के कई गरीब देशों से भी कम है और आर्थिक असमानता को मापने वाला गिनी गुणांक जो साल 1994-95 में 0 दशमलव 230 था वह 2025-26 के अनुमानों में बढ़कर 0 दशमलव 261 हो गया है। सबसे अमीर और सबसे गरीब राज्यों के बीच का अंतर 2 दशमलव 38 गुना से बढ़कर 3 दशमलव 73 गुना हो गया है जो दर्शाता है कि विकास का लाभ सभी को समान रूप से नहीं मिला है।
30 सालों का सफर और बदलती किस्मत
पिछले तीन दशकों के विकास का विश्लेषण करने पर पता चलता है कि मध्यम आय वाले राज्यों ने सबसे तेज गति से तरक्की की है। 1994-95 के बाद से इन राज्यों की अर्थव्यवस्था में 36 दशमलव 7 गुना की वृद्धि हुई है। वहीं सबसे अमीर राज्यों के समूह में 28 दशमलव 3 गुना और सबसे गरीब राज्यों में मात्र 26 दशमलव 6 गुना का विकास देखा गया। इन तीस सालों में कई राज्यों की स्थिति बदल गई है और कभी उत्तर प्रदेश और ओडिशा की प्रति व्यक्ति आय लगभग बराबर थी लेकिन आज ओडिशा के लोग यूपी वालों की तुलना में 75 प्रतिशत ज्यादा कमाते हैं। इसी तरह असम की प्रति व्यक्ति आय आज झारखंड से 48 प्रतिशत ज्यादा हो चुकी है। सबसे बड़ा नुकसान पंजाब को हुआ है जो 1994-95 में सबसे ज्यादा कमाई करने वाला राज्य था लेकिन आज वह राजस्थान के स्तर पर आ गया है और सात अन्य राज्यों से पीछे छूट गया है।
