प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस समय इंडोनेशिया के आधिकारिक दौरे पर हैं, जो दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो रहा है। मंगलवार को इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता में प्रधानमंत्री का औपचारिक और भव्य स्वागत किया गया। जकार्ता के प्रेसीडेंशियल पैलेस में पीएम मोदी का स्वागत बेहद खास रहा, क्योंकि इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने प्रोटोकॉल तोड़कर खुद प्रधानमंत्री की आगवानी की। इस दौरान पीएम मोदी को गार्ड ऑफ ऑनर भी दिया गया, जो भारत और इंडोनेशिया के बीच बढ़ते सम्मान और मजबूत होते रिश्तों का प्रतीक है। औपचारिक स्वागत के बाद, दोनों नेताओं ने एक विस्तृत द्विपक्षीय बैठक की और इसके बाद विभिन्न क्षेत्रों में हुए समझौतों की जानकारी देते हुए एक संयुक्त बयान जारी किया।
सामरिक और रक्षा सहयोग
प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के बीच हुई बैठक का सबसे महत्वपूर्ण परिणाम रक्षा सहयोग के क्षेत्र में रहा है। दोनों देशों के बीच इंडोनेशियाई सैन्य बलों को ब्रह्मोस मिसाइल प्रणालियों की आपूर्ति करने पर सहमति बनी है। इसके अलावा, इंडोनेशिया ने भारत से हवा से हवा में मार करने वाली अस्त्र मिसाइलों का आयात करने का भी फैसला किया है, जो भारतीय रक्षा तकनीक पर बढ़ते भरोसे को दर्शाता है। दोनों नेताओं ने समुद्री सुरक्षा सहयोग को मजबूत करने और महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति श्रृंखला को सुदृढ़ करने पर भी चर्चा की। सामरिक दृष्टि से एक बड़े कदम के रूप में, भारत और इंडोनेशिया ने मिलकर सबांग बंदरगाह को विकसित करने का निर्णय लिया है। यह बंदरगाह मलक्का स्ट्रेट के करीब स्थित है और भारत की ग्रेट निकोबार बंदरगाह परियोजना से लगभग 100 मील की दूरी पर है, जो इसे क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बनाता है।
औद्योगिक और आर्थिक समझौते
द्विपक्षीय वार्ता में औद्योगिक विकास और निवेश पर भी गहरा ध्यान दिया गया और इंडोनेशिया में स्टेनलेस-स्टील स्लैब बनाने की सुविधा शुरू करने के लिए स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया (SAIL) और Pt. क्राकाताउ स्टील के बीच एक रणनीतिक जॉइंट वेंचर स्थापित किया गया है। इसके साथ ही, मिनरल्स और स्टील सप्लाई चेन की टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में सहयोग के लिए एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। तकनीकी विकास को आगे बढ़ाने के लिए, दुर्लभ स्थायी चुंबकों (रेयर अर्थ मैग्नेट) के विकास पर नॉन-फेरस मैटेरियल्स टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट सेंटर (NFTDC), मिडवेस्ट लिमिटेड और PT PERMINAS के बीच एक MoU हुआ। दोनों देश इस्पात, निकल और दुर्लभ स्थायी चुंबकों के निर्माण में निवेश करने पर भी सहमत हुए हैं, जिससे एक मजबूत औद्योगिक साझेदारी सुनिश्चित होगी।
संस्थागत और सामाजिक भागीदारी
सहयोग का दायरा विभिन्न संस्थागत ढांचों तक भी फैला और भारत के नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी (NDMA) और इंडोनेशिया की नेशनल एजेंसी फॉर डिजास्टर मैनेजमेंट के बीच समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए। स्वास्थ्य क्षेत्र में, सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गेनाइजेशन (CDSCO) और इंडोनेशिया की BPOM ने चिकित्सा उत्पादों के नियमन में सहयोग के लिए समझौता किया और इसके अलावा, स्वास्थ्य कार्यबल सहयोग पर एक कार्यान्वयन व्यवस्था स्थापित की गई। डिजिटल और तकनीकी क्षेत्र में, दूरसंचार प्रौद्योगिकी और सेवाओं के साथ-साथ अनुसंधान, प्रौद्योगिकी और नवाचार में सहयोग के लिए समझौते हुए। चुनावी प्रक्रिया में भी एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया, जिसके तहत भारत के चुनाव आयोग (ECI) और इंडोनेशिया के जनरल इलेक्शन कमीशन (KPU) के बीच एक MoU पर हस्ताक्षर किए गए।
सांस्कृतिक, शैक्षिक और कृषि संबंध
'विकास भी, विरासत भी' के दर्शन को अपनाते हुए, भारत योग्याकार्ता में प्रम्बानन मंदिर परिसर के संरक्षण और जीर्णोद्धार में इंडोनेशिया की मदद करेगा। दोनों देशों ने सांस्कृतिक और शैक्षिक कूटनीति के लिए टैगोर-देवान्तारा वर्ष मनाने की भी घोषणा की। उच्च शिक्षा के क्षेत्र में, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट (IIM) बैंगलोर इंडोनेशिया के सिंघासारी SEZ में अपना एक कैंपस स्थापित करेगा। कृषि सहयोग भी एक प्रमुख आकर्षण रहा, जिसके तहत इस क्षेत्र के लिए एक MoU पर हस्ताक्षर किए गए और भारत इंडोनेशिया को 100 टन उच्च गुणवत्ता वाले DWR 162 गेहूं के बीज की आपूर्ति करने पर सहमत हुआ। इसके अतिरिक्त, ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स (ONDC) और इंडोनेशिया ओपन नेटवर्क (ION) के बीच सहयोग स्थापित किया गया, साथ ही रियल-टाइम समुद्री जानकारी साझा करने में सुधार के लिए IFC-IOR में एक इंडोनेशियाई संपर्क अधिकारी की तैनाती की जाएगी। शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए बाहरी अंतरिक्ष की खोज और उसके इस्तेमाल में सहयोग के लिए फ्रेमवर्क समझौते का भी विस्तार किया गया है।
