सावधान रहें हिंसा वाली जगहों से दूर रहें, फ्रांस मे विरोध प्रदर्शनों के बीच भारतीय नागरिको के लिए एडवाइजरी जारी

फ्रांस में विरोध प्रदर्शनों के हिंसक होने और कर्फ्यू लगने के बाद पेरिस स्थित भारतीय दूतावास ने नागरिकों के लिए ट्रैवल एडवाइजरी जारी की है। इस बीच फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने डोनाल्ड ट्रंप के बयानों और विदेशी स्तर पर फैल रही गलत सूचनाओं पर तीखी प्रतिक्रिया दी है।

फ्रांस में जारी विरोध प्रदर्शनों और उनके हिंसक रूप लेने के बाद भारतीय दूतावास ने वहां रह रहे और यात्रा कर रहे भारतीय नागरिकों के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण और सख्त ट्रैवल एवं सुरक्षा संबंधी एडवाइजरी जारी की है। फ्रांस में लगातार हो रहे उग्र प्रदर्शनों और उसके बाद लागू किए गए कर्फ्यू के हालात को देखते हुए यह कदम उठाया गया है। भारतीय दूतावास ने स्पष्ट रूप से निर्देश दिए हैं कि फ्रांस में मौजूद सभी भारतीय नागरिक पूरी तरह से सतर्क रहें और किसी भी प्रकार की हिंसा वाली जगहों से पूरी तरह दूर रहें। वर्तमान परिस्थितियों को भांपते हुए नागरिकों को अत्यधिक सावधानी बरतने की सलाह दी गई है ताकि किसी भी अनहोनी से बचा जा सके।

दूतावास की तरफ से जारी की गई इस आधिकारिक एडवाइजरी में भारतीय नागरिकों से विशेष तौर पर यह अपील की गई है कि वे बड़ी भीड़-भाड़ वाली जगहों और उन तमाम स्थानों पर जाने से बिल्कुल बचें जहां इस समय विरोध-प्रदर्शन हो रहे हैं। इसके साथ ही भारतीय नागरिकों को यह भी हिदायत दी गई है कि वे फ्रांस के स्थानीय प्रशासन द्वारा समय-समय पर जारी किए जाने वाले सभी दिशा-निर्देशों, नियमों और सलाह का पूरी निष्ठा के साथ पालन करें। स्थानीय प्रशासन की ओर से सुरक्षा को लेकर जो भी कदम उठाए जा रहे हैं, उनका सम्मान करना इस समय सभी के लिए अनिवार्य बताया गया है।

किसी भी आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए भारतीय दूतावास ने संपर्क सूत्र भी साझा किए हैं। दूतावास की तरफ से कहा गया है कि किसी भी प्रकार की आपात स्थिति में भारतीय नागरिक पेरिस में स्थित भारतीय दूतावास से तुरंत संपर्क कर सकते हैं। इसके लिए विशेष तौर पर फोन नंबर और ईमेल पते सार्वजनिक किए गए हैं ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत सहायता पहुंचाई जा सके। आपात स्थिति में पेरिस स्थित भारतीय दूतावास से संपर्क करने के लिए फोन नंबर +33 6 48 34 00 63 जारी किया गया है।

in तय की गई है। in उपलब्ध कराई गई है ताकि देश के विभिन्न हिस्सों में रह रहे भारतीय नागरिक अपनी जरूरत के अनुसार सही कार्यालय से संपर्क स्थापित कर सकें।

दूसरी ओर, फ्रांस के राजनीतिक गलियारों में अंतरराष्ट्रीय बयानों को लेकर भी गहमागहमी तेज हो गई है। फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने बुधवार को एक बड़ा दावा करते हुए कहा कि कुछ विदेशी नेता फ्रांस के इस तनावपूर्ण सामाजिक माहौल का अपने राजनीतिक एजेंडे को साधने के लिए फायदा उठाने की कोशिश कर रहे हैं। गौरतलब है कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस हिंसा का इस्तेमाल कथित तौर पर अपने राजनीतिक समर्थकों को लामबंद करने के लिए किया था और बिना किसी ठोस सबूत के यह दावा किया था कि मुस्लिम प्रवासी इस पूरी अशांति और हिंसा के लिए जिम्मेदार हैं।

डोनाल्ड ट्रंप ने फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से आग्रह करते हुए कहा था कि अपनी सीमाएं बंद कीजिए और बहुत देर होने से पहले नियंत्रण अपने हाथ में लीजिए। इस बयान पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए मैक्रों ने पलटवार किया और कहा कि पिछले वीकेंड पेरिस और फ्रांस के अन्य शहरों में हुई लूटपाट की घटनाओं के बाद अंतरराष्ट्रीय या विदेशी स्तर पर बड़े पैमाने पर गलत सूचनाओं का प्रसार किया गया है। राष्ट्रपति मैक्रों ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इसके कारण कई लोगों, जिनमें कई विदेशी नेता भी शामिल हैं, की ओर से ऐसी टिप्पणियां की गईं जो जितनी अस्वीकार्य हैं, उतनी ही पूरी तरह बेतुकी भी हैं।

जब एक पत्रकार ने फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से यह सीधा सवाल पूछा कि क्या उनका इशारा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर था, तो मैक्रों ने इस पर कोई सीधा और स्पष्ट जवाब देने से परहेज किया। हालांकि, उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई के दुरुपयोग पर बड़ा खुलासा किया। मैक्रों ने कहा कि हमने एआई से बनाई गई ऐसी तस्वीरें देखी हैं, जिनमें ऐसे दृश्य दिखाए गए हैं जो वास्तव में फ्रांस में कभी हुए ही नहीं थे। उन्होंने बताया कि कुछ लोगों द्वारा यह झूठा दावा किया गया कि प्रवासियों और इस्लामवादियों की भारी भीड़ ने हमले किए, जबकि यह पूरी तरह से असत्य और मनगढ़ंत है।

इस बीच, यूरोप के अन्य देशों में भी सामाजिक और आर्थिक असंतोष के स्वर उठने लगे हैं। फ्रांस, स्पेन और अल्बानिया के बाद अब यूरोप के एक और प्रमुख देश ग्रीस में भी बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। ग्रीस की राजधानी समेत कई अन्य शहरों में बड़ी संख्या में आम नागरिकों ने सड़कों पर उतरकर महंगाई, रोजी-रोटी के गंभीर संकट और लगातार महंगे हो रहे ईंधन के खिलाफ कड़ा विरोध प्रदर्शन किया है। यूरोप के इन देशों में बढ़ती महंगाई और आर्थिक दबाव के चलते जनता का आक्रोश लगातार फूट रहा है, जिससे यूरोपीय महाद्वीप की आंतरिक सुरक्षा और राजनीतिक स्थिरता पर भी गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं।