फ्रांस की सड़कों पर इन दिनों भारी गुस्सा, उग्र प्रोटेस्ट, आगजनी और हिंसा का माहौल देखने को मिल रहा है। देश के शहर-शहर में हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की ओर से की गई तमाम अपीलें पूरी तरह से बेअसर साबित हो रही हैं। हालात को काबू में करने के लिए अब तक कोई बात नहीं बन पाई है और प्रशासन लगातार स्थिति से निपटने के लिए कड़े कदम उठा रहा है और इस हिंसक प्रदर्शन को पूरी गंभीरता से लेते हुए फ्रांसीसी सरकार ने पूरे देश में सत्तर हजार से ज्यादा सुरक्षाकर्मियों को तैनात कर दिया है। सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए सड़कों पर हेलीकॉप्टरों और बख्तरबंद गाड़ियों से लगातार गश्त की जा रही है। प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने और भीड़ को तितर-बितर करने के लिए सुरक्षा बलों द्वारा वॉटर कैनन और टीयर गैस यानी आंसू गैस का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जा रहा है।
फ्रांस में पिछले दो हफ्तों से लगातार विरोध प्रदर्शन का सिलसिला जारी है और शुरुआत में यह प्रोटेस्ट छात्रों की कुछ स्थानीय मांगों को लेकर शुरू हुआ था, लेकिन देखते ही देखते यह आंदोलन पूरे देश में फैल चुका है। राजधानी पेरिस समेत फ्रांस के अलग-अलग प्रमुख शहरों में इस समय लाखों लोग सड़कों पर उतर आए हैं। प्रदर्शन स्थलों पर लगातार सरकार विरोधी नारे बाजी गूंज रही है, जगह-जगह आगजनी की घटनाएं सामने आ रही हैं और उग्र भीड़ द्वारा दुकानों को लूटा जा रहा है। हालात इतने बेकाबू हो चुके हैं कि प्रदर्शनकारी सीधे तौर पर पुलिसवालों पर हमले कर रहे हैं। सड़कों पर मौजूद प्रदर्शनकारियों का यह आक्रामक रूप देश की कानून व्यवस्था के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है।
शनिवार को पेरिस के अलावा लियोन, क्लेरमोंट-फेरां और स्ट्रासबर्ग जैसे महत्वपूर्ण शहरों में पुलिस ने उग्र प्रदर्शनकारियों पर आंसू गैस के गोले दागकर भीड़ को खदेड़ने का काम किया। वहीं दूसरी ओर, नीस और नांतेस जैसे शहरों में प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने के लिए वॉटर कैनन का भरपूर इस्तेमाल किया गया ताकि हालात पर काबू पाया जा सके। इस बीच देश के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने एक बार फिर लोगों से अपील की है कि वे इस आंदोलन को खत्म करें और शांति का मार्ग चुनें, लेकिन जमीनी स्तर पर प्रदर्शनकारी किसी भी कीमत पर पीछे हटने को तैयार नजर नहीं आ रहे हैं और उनका विरोध प्रदर्शन लगातार जारी है।
इस पूरे आंदोलन की शुरुआत स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी को लेकर हुए प्रदर्शन से हुई थी, जिसमें शनिवार को हजारों की संख्या में छात्र भी सक्रिय रूप से शामिल हुए। शुरुआती दिनों में यह प्रोटेस्ट केवल पेरिस के स्कूलों की बदतर हालत और शिक्षकों की कमी तक सीमित था, लेकिन अब यह शिक्षकों की सैलरी, पेंशन और देश में बढ़ रही आर्थिक असमानता के खिलाफ एक बहुत बड़ा राष्ट्रव्यापी आंदोलन बन चुका है। आंदोलनरत छात्रों ने सरकार के सामने अपनी कुल दस सूत्रीय मांगें रखी हैं जिन पर वे अड़े हुए हैं।
छात्र नेता रियाद रानी ने मीडिया से बातचीत करते हुए अपनी बात रखी और कहा कि आज भी हम अपनी दस मांगों को लेकर पूरी दृढ़ता के साथ प्रदर्शन कर रहे हैं और हमारी मुख्य मांग है कि पारकोर्सअप को तुरंत प्रभाव से रद्द किया जाए और यूनिवर्सिटीज तथा अन्य शैक्षणिक कार्यक्रमों में हजारों नई सीटें बढ़ाई जाएं। इसके अलावा हमारी मांग है कि शिक्षकों की बड़े पैमाने पर स्थायी पदों पर सीधी भर्ती की जाए ताकि शिक्षा व्यवस्था में सुधार हो सके। शिक्षकों को एक उचित और सम्मानजनक दर्जा दिया जाए, साथ ही शैक्षणिक संस्थानों की इमारतों के नवीनीकरण के लिए एक व्यापक राष्ट्रीय योजना बनाई जाए।
छात्र नेता रियाद रानी ने आगे कहा कि हम अभी भी सरकार की तरफ से शुरुआती घोषणाओं का इंतजार कर रहे हैं और कल देश के राष्ट्रपति ने हमारे सामने अच्छी-अच्छी बातें कहीं और बड़े-बड़े वादे किए थे, ठीक वैसे ही जैसे पहले मिस्टर बैप्टिस्ट या मिस्टर गेफ्रे ने किए थे। हमने उनसे बहुत स्पष्ट शब्दों में कह दिया है कि अब बड़े-बड़े भाषणों और कोरे आश्वासनों का दौर हमेशा के लिए खत्म हो चुका है। आज की तारीख में हमें सिर्फ और सिर्फ ठोस और व्यावहारिक कदम चाहिए, कोरे वादे अब नहीं चलेंगे।
देशभर में लगातार जारी हिंसक प्रदर्शनों और गंभीर हालातों के बीच राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने देश की जनता से एक बार फिर शांति और संयम बनाए रखने की अपील की है। उनका कहना है कि आम जनता को समाज में नफरत और वैमनस्य फैलाने वालों के बहकावे में बिल्कुल नहीं आना चाहिए। देश को संबोधित करते हुए इमैनुएल मैक्रों ने कहा कि यह तनाव पिछले कुछ सालों से लगातार कई अलग-अलग वजहों से पनप रहा था। हमने इस बढ़ते तनाव को समय रहते रोकने के बजाय बढ़ने दिया और हाल के सालों में ऐसी कई दुर्भाग्यपूर्ण घटनाएं हुईं जिन्होंने हमारे महान गणतंत्र की मूल नींव को हिलाकर रख दिया है।
राष्ट्रपति मैक्रों ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि देश में पहले हुए कुछ हिंसक हमलों की वजह से आज अलग-अलग धर्मों को बहुत ही गलत नजरिए से देखा जाने लगा है। इसलिए आज के समय में सबसे ज्यादा जरूरी बात यह है कि हम सब मिलकर किसी भी चीज को आपस में मिला न दें और हालात की नजाकत को समझें। मैक्रों ने जोर देकर कहा कि सबसे अहम बात यह है कि हम समाज में एक पक्ष को दूसरे पक्ष के खिलाफ खड़ा करने के किसी भी राजनीतिक जाल में न फंसें। इतिहास गवाही देता है कि कभी भी बहुत देर नहीं होती और मैं यहां मौजूद सभी लोगों को यह बात याद दिलाना चाहता हूँ कि हमारा गणतंत्र हमेशा से आपसी एकता और भाईचारे के सद्भाव पर ही टिका हुआ है।
