इजराइल चुनाव में बेंजामिन नेतन्याहू की सत्ता दांव पर, सरकार गठन के 8 समीकरण

इजराइल में 27 अक्टूबर को होने वाले आम चुनाव में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का भविष्य दांव पर है। नेसेट की 120 सीटों के लिए होने वाले इस चुनाव में सरकार गठन के लिए 61 सांसदों का समर्थन जरूरी है। जानिए चुनाव के बाद सरकार बनाने के 8 संभावित रास्ते।

इजराइल में 27 अक्टूबर को होने वाले आम चुनाव में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की सत्ता दांव पर है। देश की संसद नेसेट की सभी 120 सीटों के लिए मतदान होगा। चुनाव में किसी पार्टी या गठबंधन को कितनी सीटें मिलती हैं, उससे तय होगा कि अगली सरकार किसकी बनेगी। असली चुनौती 61 सांसदों का समर्थन जुटाने की होगी। हालिया सर्वे में नेतन्याहू के धार्मिक-राष्ट्रवादी गठबंधन को 50 और विपक्षी गठबंधन को 52 सीटें मिलने का अनुमान है। अरब पार्टियों को करीब 13 सीटें मिलने का अनुमान भी सरकार गठन के समीकरण को अहम बना सकता है। ये सर्वे के अनुमान हैं, चुनाव के नतीजे नहीं और इजराइल में मतदाता किसी एक उम्मीदवार के बजाय पार्टी को वोट देते हैं। सीटों का बंटवारा पार्टियों को मिले वोटों के अनुपात में होता है। 25 प्रतिशत वोट हासिल करने होते हैं। चुनाव के बाद सरकार बनाने के लिए गठबंधन की बातचीत होती है। ऐसे में चुनाव में सबसे ज्यादा सीटें हासिल करना भी सरकार बनाने की गारंटी नहीं है।

सरकार गठन के 8 संभावित नतीजे

इजराइल चुनाव के परिणामों के बाद सरकार गठन को लेकर कुल 8 संभावित रास्ते सामने आ रहे हैं, जो राजनीतिक भविष्य तय करेंगे।

1. नेतन्याहू फिर बना सकते हैं सरकार: सर्वे में पीछे रहने के बावजूद नेतन्याहू की लिकुड पार्टी सरकार बनाने की कोशिश कर सकती है। इसके लिए उन्हें अपने पुराने सहयोगियों और दूसरे दलों का समर्थन जुटाना होगा और इनमें इतामार बेन-ग्विर की ओत्जमा येहुदित, बेजालेल स्मोट्रिच की धार्मिक जायनिज्म पार्टी और अति-रूढ़िवादी दल शास व यूनाइटेड तोराह जूडिज्म शामिल हैं। अगर ये दल मिलकर जरूरी समर्थन जुटा लेते हैं, तो नेतन्याहू एक बार फिर प्रधानमंत्री बन सकते हैं।

2. विपक्षी गठबंधन की सरकार बन सकती है: नेतन्याहू के विरोध में चार प्रमुख दलों ने साथ मिलकर चुनाव लड़ने और सरकार बनाने की कोशिश करने पर सहमति जताई है। इनमें पूर्व सेना प्रमुख गादी आइजेनकोट की याशर पार्टी, यायर गोलान के डेमोक्रेट्स, अविग्दोर लिबरमैन की यिसराइल बेतेनु और नफ्ताली बेनेट तथा यायर लैपिड के नेतृत्व वाला टुगेदर गठबंधन शामिल हैं। विपक्ष को बहुमत के लिए अतिरिक्त सांसदों का समर्थन जुटाना होगा। आइजेनकोट को संभावित प्रधानमंत्री उम्मीदवार के रूप में देखा जा रहा है, हालांकि विपक्ष ने साझा सरकार का नेता औपचारिक रूप से तय नहीं किया है।

3. अरब पार्टी राअम के साथ गठबंधन: इजराइल के अरब नागरिकों का प्रतिनिधित्व करने वाली राअम पार्टी सरकार बनाने में अहम भूमिका निभा सकती है। इसके नेता मंसूर अब्बास ने विपक्षी गठबंधन को समर्थन देने की संभावना से इनकार नहीं किया है। उनकी प्राथमिकताओं में अरब समुदायों में बढ़ते हिंसक अपराध पर रोक लगाना और आवास से जुड़ी भेदभावपूर्ण नीतियों में बदलाव शामिल हैं। लेकिन विपक्ष के कई नेताओं ने अरब पार्टियों के साथ औपचारिक गठबंधन बनाने का विरोध किया है। इसलिए समर्थन की संभावना होने के बावजूद इस रास्ते में राजनीतिक बाधाएं हैं।

4. बहुमत के बिना अल्पमत सरकार: अगर कोई गठबंधन 61 सीटें नहीं जुटा पाता, तो वह संसद में मौजूद दूसरी पार्टियों के बाहरी समर्थन से सरकार बनाने की कोशिश कर सकता है। इस व्यवस्था में सहयोगी दल सरकार का हिस्सा बने बिना विश्वास मत जैसे अहम मौकों पर उसका साथ दे सकते हैं। जॉइंट लिस्ट ने नेतन्याहू-विरोधी गठबंधन को इस तरह का समर्थन देने की संभावना जताई है। इसके बदले वह फिलिस्तीनी राज्य के गठन की दिशा में कदम और संगठित अपराध पर कार्रवाई जैसी मांगें रख सकती है। हालांकि, ऐसी सरकार सांसदों के समर्थन वापस लेने या नीतियों पर मतभेद के कारण अस्थिर हो सकती है।

5. राष्ट्रीय एकता की सरकार: एक और विकल्प राष्ट्रीय एकता सरकार है, जिसमें राजनीतिक विरोधी दल किसी बड़े संकट के समय साथ आ सकते हैं। मई 2020 में नेतन्याहू और बेनी गैंट्ज ने तीन अनिर्णायक चुनावों के बाद ऐसी सरकार बनाई थी, लेकिन वह एक साल के भीतर गिर गई। 2023 में हमास के हमले के बाद गैंट्ज और उनकी पार्टी के सदस्य भी नेतन्याहू की सरकार में शामिल हुए थे। हालांकि, इस बार ऐसी सरकार बनेगी या नहीं, यह दलों के बीच बातचीत और नीतिगत सहमति पर निर्भर करेगा।

6. प्रधानमंत्री पद बारी-बारी से संभालने का समझौता: दल प्रधानमंत्री पद साझा करने के लिए भी सहमत हो सकते हैं। इस व्यवस्था में दो नेता तय समय के बाद बारी-बारी से प्रधानमंत्री बनते हैं। नेतन्याहू और गैंट्ज ने 2020 में ऐसा समझौता किया था, लेकिन सरकार गिरने के कारण गैंट्ज की बारी नहीं आई। 2021 में नफ्ताली बेनेट और यायर लैपिड ने भी प्रधानमंत्री पद साझा करने का समझौता किया था। बेनेट की सरकार का बहुमत खत्म होने के बाद जुलाई 2022 में लैपिड कार्यवाहक प्रधानमंत्री बने। इस बार भी ऐसा समझौता संभव है।

7. उसी राजनीतिक खेमे से कोई दूसरा प्रधानमंत्री: अगर गठबंधन की बातचीत में नेतन्याहू या विपक्ष के किसी नेता के नाम पर सहमति नहीं बनती, तो दल उसी राजनीतिक खेमे से किसी दूसरे सांसद को प्रधानमंत्री बनाने पर विचार कर सकते हैं। ऐसा नेता सहयोगी दलों को ज्यादा स्वीकार्य हो सकता है और सरकार गठन का रास्ता खोल सकता है। हालांकि, इसके लिए संबंधित खेमे के दलों के बीच सहमति जरूरी होगी। यह भी ध्यान रखना होगा कि इजराइल में प्रधानमंत्री को संसद का समर्थन हासिल करना होता है।

8. सहमति नहीं बनी तो फिर चुनाव: अगर कोई नेता जरूरी समर्थन नहीं जुटा पाता, तो इजराइल को एक बार फिर चुनाव का सामना करना पड़ सकता है। देश में 2019 से 2022 के बीच पांच बार चुनाव हुए थे, क्योंकि विरोधी राजनीतिक खेमे स्थिर सरकार बनाने में नाकाम रहे थे। इस बार भी सरकार गठन पर सहमति नहीं बनी, तो राजनीतिक अनिश्चितता बढ़ सकती है। नई सरकार के शपथ लेने तक नेतन्याहू कार्यवाहक प्रधानमंत्री बने रहेंगे।

सरकार गठन में सबसे अहम क्या होगा?

इस चुनाव में तीन बातें खास रहेंगी और किस गठबंधन को कितनी सीटें मिलती हैं, अरब पार्टियां किसे समर्थन देती हैं और क्या विरोधी दल अपने मतभेद दूर कर पाते हैं। नेतन्याहू के विरोध में खड़े दल उन्हें सत्ता से हटाना चाहते हैं, लेकिन अरब पार्टियों के साथ सरकार बनाने पर उनके बीच मतभेद हैं। दूसरी तरफ, नेतन्याहू के पुराने सहयोगी दलों का समर्थन भी अंतिम नतीजे में अहम होगा। इजराइल में सरकार बनाने की प्रक्रिया चुनाव के बाद भी चलती है। चुनाव के बाद सरकार गठन की बातचीत के लिए 28 दिन मिलते हैं, जिसे 14 दिन तक बढ़ाया जा सकता है। अगर इस दौरान कोई सरकार नहीं बनती, तो देश को नए चुनाव की ओर जाना पड़ सकता है। इसलिए 27 अक्टूबर को आने वाला चुनावी नतीजा सत्ता की तस्वीर का पहला हिस्सा होगा। अंतिम तस्वीर गठबंधन की बातचीत से तय होगी।