बड़ा खुलासा: नेतन्याहू ने आखिरी मिनट पर ईरान बॉर्डर से क्यों वापस बुलाए फाइटर जेट्स

इजराइल में चुनाव से पहले ईरान के साथ संभावित युद्ध को लेकर सरगर्मी तेज हो गई है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अमेरिकी दबाव के चलते ईरान की सीमा के पास भेजे गए दर्जनों लड़ाकू विमानों को आखिरी मिनट पर वापस बुला लिया। इस ऑपरेशन को बाद में युद्धाभ्यास बताया गया, जबकि ईरान के परमाणु कार्यक्रम और अमेरिकी कदमों को लेकर तनाव लगातार बढ़ रहा है।

इजराइल में आगामी चुनाव से ठीक पहले एक बेहद नाटकीय और खतरनाक मोड़ सामने आया है, जहां ईरान के साथ संभावित युद्ध को लेकर राजनीतिक और सैन्य हलकों में घमासान मचा हुआ है। इजराइल में इस बात को लेकर तीखी बहस छिड़ी हुई है कि चुनाव और ईरान के खिलाफ जंग में से किसे चुना जाना चाहिए। इस बीच, देश के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और उनकी कैबिनेट खुलकर ईरान के साथ लड़ाई के पक्ष में नजर आ रही है, जबकि दूसरी तरफ इजराइल रक्षा बल यानी आईडीएफ (IDF) के भीतर इसे लेकर गंभीर मतभेद उभरकर सामने आ रहे हैं। इस पूरी स्थिति को देखते हुए आने वाले चार दिन बेहद अहम और निर्णायक बताए जा रहे हैं, जो मध्य पूर्व के भू-राजनीतिक समीकरणों को पूरी तरह से बदल सकते हैं।

इसी सियासी और सामरिक सरगर्मी के बीच प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का एक बेहद चौंकाने वाला और खतरनाक एक्शन देखने को मिला है। उन्होंने ईरान की सीमा पर भेजे गए दर्जनों इजराइली फाइटर जेट्स को बिल्कुल आखिरी मिनट पर वापस लौटने का सख्त आदेश जारी कर दिया। ये सभी फाइटर जेट्स सीरिया और इराक के आसमान से होते हुए सीधे ईरान की सीमा तक पहुंच चुके थे और वहां से किसी भी संभावित ईरानी रिएक्शन का इंतजार कर रहे थे और शुरुआती जानकारी के अनुसार, नेतन्याहू द्वारा इन फाइटर जेट्स को वापस बुलाए जाने की यह पूरी कार्रवाई अमेरिका के भारी दबाव के चलते की गई थी। हालांकि, हैरान करने वाली बात यह है कि दो दिन पहले अंजाम दिए गए इस गुप्त और आक्रामक ऑपरेशन को बाद में आधिकारिक तौर पर एक युद्धाभ्यास करार दे दिया गया, ताकि कूटनीतिक स्तर पर इसके प्रभावों को कम किया जा सके।

इस पूरे घटनाक्रम पर प्रकाश डालते हुए इजराइली और अमेरिकी अधिकारियों ने मीडिया को महत्वपूर्ण जानकारियां साझा की हैं और अधिकारियों के मुताबिक, सोमवार के दिन इजराइली वायु सेना के दर्जनों अत्याधुनिक लड़ाकू विमानों ने ईरानी सीमा के बिल्कुल करीब एक उच्चस्तरीय ऑपरेशनल उड़ान को अंजाम दिया था। इजराइल की मुख्य भूमि से लगभग 1300 किलोमीटर की लंबी दूरी तय करके किया गया यह बेहद संवेदनशील मिशन ठीक चुनावों से एक हफ्ते पहले सतह पर आया था। संयोग से, इसी तय दिन पर अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने ओवदा एयर फोर्स बेस का दौरा किया था और वहां प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से मुलाकात की थी। हालांकि, इजराइली वायु सेना की इस रहस्यमयी उड़ान को लेकर आधिकारिक तौर पर यह स्पष्ट किया गया कि इस ऑपरेशन का रक्षा सचिव हेगसेथ की इस यात्रा से कोई सीधा संबंध नहीं था, लेकिन समय के तालमेल ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में कई तरह की अटकलों को जन्म जरूर दे दिया है।

सूत्रों और मीडिया रिपोर्ट्स में यह दावा किया जा रहा है कि प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को खुद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान पर किसी भी बड़े इजराइली हमले को रोकने के लिए कड़े निर्देश दिए गए थे और इस बात की पुष्टि अमेरिकी अधिकारियों द्वारा रॉयटर्स को दी गई उन जानकारियों से भी होती है, जिसमें बताया गया था कि अमेरिकी विदेश विभाग सऊदी अरब से अपने कुछ प्रमुख राजनयिक कर्मचारियों और उनके परिवारों को सुरक्षित वापस बुलाने की पुख्ता योजना तैयार कर रहा है। सऊदी अरब से कर्मचारियों को बाहर निकालने का यह अहम कदम क्षेत्र में फिर से भड़क सकने वाली बड़ी लड़ाई, और विशेष रूप से यमन में सक्रिय हूतियों से जुड़ी हिंसक गतिविधियों को लेकर जताई जा रही गहरी चिंताओं के कारण उठाया गया है। स्थिति की नज़ाकत को भांपते हुए अमेरिका ने बुधवार को सऊदी अरब में मौजूद अपने सभी गैर-आपातकालीन अमेरिकी सरकारी कर्मचारियों और उनके परिवार के सदस्यों को तुरंत देश छोड़ने का कड़ा आदेश जारी कर दिया है, जो इस बात का सबूत है कि अमेरिका इस क्षेत्र में किसी भी अनियोजित सैन्य escalation से बचना चाहता है।

दूसरी तरफ, ईरान के परमाणु कार्यक्रमों को लेकर भी इजराइल के भीतर खतरे की घंटी बज चुकी है। इसी महीने की शुरुआत में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ अपनी बातचीत में इस बात का खुलकर जिक्र किया था कि उन्हें इजराइली खुफिया एजेंसियों द्वारा जुटाई गई गोपनीय जानकारियों को लेकर भारी चिंता सता रही है। नेतन्याहू के अनुसार, इन खुफिया रिपोर्ट्स से साफ पता चलता है कि ईरान अपने खतरनाक परमाणु कार्यक्रम को एक बार फिर से पुनर्जीवित करने के लिए बेहद आक्रामक और गंभीर कदम उठा रहा है। नेतन्याहू ने अत्यंत चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि मुजतबा ने सुरक्षा लॉक को पूरी तरह से हटा दिया है और ईरान एक बार फिर से दुनिया को दहलाने वाले मौत के बम बनाने की नापाक कोशिश में जुटा हुआ है।

प्रधानमंत्री नेतन्याहू का मानना है कि ईरान के इस विध्वंसक खतरे को हमेशा के लिए जड़ से खत्म करने का अब केवल और केवल एक ही निश्चित तरीका बचा है, और वह है ईरान की वर्तमान कट्टरपंथी सत्ता को पूरी तरह से उखाड़ फेंकना और नेतन्याहू ने अपनी इस आक्रामक रणनीति को स्पष्ट करते हुए बताया कि यही कड़े निर्देश उन्होंने इजराइल रक्षा बल यानी आईडीएफ (IDF), देश की खूफिया एजेंसी मोसाद और अन्य तमाम प्रमुख सुरक्षा एजेंसियों को दे दिए हैं। चुनाव से ठीक पहले नेतन्याहू का यह रुख और ईरान बॉर्डर पर घटित हुआ यह नाटकीय घटनाक्रम यह साबित करता है कि मध्य पूर्व का यह क्षेत्र एक बार फिर से इतिहास के सबसे बड़े और खतरनाक सैन्य संघर्ष के मुहाने पर खड़ा है, जहां एक छोटी सी चूक भी महाविनाश का कारण बन सकती है।