सऊदी में बड़ा हमला, भारतीय नागरिक की मौत पर भारत का फूटा गुस्सा, पोलैंड के साथ ऐतिहासिक फैसलों का भी हुआ ऐलान

सऊदी अरब में हुए हमलों में एक भारतीय की मौत पर भारत ने कड़ी निंदा की है। इसके साथ ही पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क की भारत यात्रा के दौरान रणनीतिक, व्यापारिक और रक्षा मामलों पर महत्वपूर्ण समझौते हुए हैं।

सऊदी अरब में हाल ही में हुए हमलों को लेकर भारत ने अपनी कड़ी आपत्ति और निंदा दर्ज कराई है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने जानकारी दी है कि सऊदी अरब में हुए इन हमलों में एक भारतीय नागरिक की मौत हो गई है, जबकि कई अन्य घायल हुए हैं। भारत ने सऊदी अरब में सिविलियन और एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर पर हुए हमलों की कड़ी निंदा की है। इन हमलों में 21 अक्टूबर को दम्माम स्थित किंग फहद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे और पूर्वी प्रांत में सऊदी अरामको के शायबा तेल क्षेत्र पर हुए हमले भी शामिल हैं। इन हमलों में एक भारतीय नागरिक की मौत हुई है, जबकि दो अन्य भारतीय नागरिक घायल हुए हैं। वहीं, शायबा तेल क्षेत्र पर हुए हमले में एक अन्य भारतीय नागरिक घायल हुआ है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने स्पष्ट किया कि रियाद स्थित भारतीय दूतावास सऊदी अधिकारियों के लगातार संपर्क में है और इस दुखद घड़ी में पीड़ित भारतीयों को हर संभव मदद पहुंचाई जाएगी।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इस गंभीर मामले के साथ-साथ भारत और पोलैंड के बीच चल रही रणनीतिक साझेदारी और उच्चस्तरीय वार्ताओं पर भी विस्तार से चर्चा की और पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क 21 से 23 अक्टूबर तक भारत की आधिकारिक यात्रा पर हैं। उनके साथ लगभग 100 प्रमुख कंपनियों के मुख्य कार्यकारी अधिकारी और उद्योग प्रतिनिधियों सहित एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी भारत आया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क के बीच व्यापक बातचीत हुई है, जिसमें व्यापार, रक्षा, तकनीक और आतंकवाद के खिलाफ सहयोग बढ़ाने पर पूर्ण सहमति बनी है। दोनों देशों ने आपसी संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाते हुए 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने का बेहद महत्वपूर्ण लक्ष्य तय किया है।

कूटनीतिक मोर्चे पर एक बड़ा कदम उठाते हुए पोलैंड ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता की दावेदारी का अपना समर्थन एक बार फिर मजबूती से दोहराया है। इसके साथ ही पोलैंड ने वर्ष 2028-29 के लिए भारत की अस्थायी सदस्यता की उम्मीदवारी का भी खुलकर समर्थन किया है। प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी इस मुलाकात के दौरान पोलिश कंपनियों को भारत में निवेश और कारोबार बढ़ाने का खुला निमंत्रण दिया है। दूसरी ओर, प्रधानमंत्री टस्क ने पोलैंड को मध्य और पूर्वी यूरोप सहित व्यापक यूरोपीय बाजार में विस्तार करने वाली भारतीय कंपनियों के लिए एक सहज प्रवेश द्वार बताया है। इसके अलावा, दोनों देशों ने कृषि क्षेत्र में व्यापार और सहयोग बढ़ाने के लिए द्विपक्षीय कार्य समूह की गतिविधियों को फिर से शुरू करने पर अपनी सहमति जताई है।

तकनीकी और वैज्ञानिक सहयोग के क्षेत्र में भारत और पोलैंड ने भविष्य की तकनीकों पर मिलकर काम करने का फैसला किया है। रणधीर जायसवाल ने बताया कि भारत और पोलैंड आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई, सेमीकंडक्टर और क्वांटम तकनीक के अत्याधुनिक क्षेत्रों में संयुक्त शोध करेंगे। दोनों देशों के स्टार्टअप इकोसिस्टम के बीच आपसी साझेदारी को और अधिक मजबूत किया जाएगा तथा उद्योगों, शोध संस्थानों और इनोवेशन से जुड़े संस्थानों के बीच आपसी सहयोग को बड़े पैमाने पर प्रोत्साहित किया जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और डोनाल्ड टस्क ने इस बात पर पूरी सहमति जताई कि डिजिटल तकनीक और एआई आर्थिक विकास को गति देने, उत्पादकता में भारी सुधार करने और सरकारी सेवाओं की आपूर्ति को अधिक पारदर्शी तथा बेहतर बनाने में अत्यंत अहम भूमिका निभा सकते हैं।

अंतरिक्ष अनुसंधान, ऊर्जा और महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में भी दोनों देशों के बीच अभूतपूर्व सहमति बनी है। प्रधानमंत्री मोदी और डोनाल्ड टस्क की उच्चस्तरीय बातचीत में अंतरिक्ष क्षेत्र में सहयोग को रणनीतिक साझेदारी का एक अनिवार्य और महत्वपूर्ण हिस्सा बताया गया। दोनों देशों ने संस्थागत और उद्योग स्तर पर आपसी संपर्क को और अधिक बढ़ाने पर अपनी सहमति जताई है। इसके अलावा, स्वच्छ ऊर्जा और टिकाऊ तकनीकों के क्षेत्र में भी द्विपक्षीय सहयोग को तेजी से बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया है, जिससे पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास के लक्ष्यों को प्राप्त किया जा सके।

वार्ता के दौरान दोनों नेताओं ने ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों को भी विशेष रूप से याद किया। रणधीर जायसवाल ने बताया कि दोनों नेताओं ने वारसॉ में स्थित महाराजा जाम साहब और कोल्हापुर से जुड़े ऐतिहासिक स्मारकों को दोनों देशों की गहरी दोस्ती का एक जीवंत प्रतीक बताया। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान भारत ने हजारों पोलिश महिलाओं और बच्चों को शरण देकर आश्रय प्रदान किया था। हाल ही में जारी संयुक्त वक्तव्य में इस ऐतिहासिक अध्याय को दोनों देशों के रिश्तों की एक बेहद महत्वपूर्ण और मजबूत कड़ी बताया गया है। इसके साथ ही, दोनों देशों ने ऑपरेशन गंगा के दौरान यूक्रेन में फंसे 2,000 से अधिक भारतीय छात्रों की सुरक्षित निकासी और सहायता के लिए पोलिश अधिकारियों द्वारा निभाई गई सराहनीय भूमिका के प्रति आभार व्यक्त किया और उनकी प्रशंसा की।

आतंकवाद के मुद्दे पर भारत और पोलैंड ने अपनी साझा और अडिग प्रतिबद्धता को पूरी दुनिया के सामने रखा है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता के मुताबिक, दोनों देशों ने आतंकवाद और हिंसक उग्रवाद के सभी रूपों और अभिव्यक्तियों की कड़े शब्दों में निंदा की है, जिसमें सीमा पार आतंकवाद भी शामिल है। नेताओं ने यह बिल्कुल स्पष्ट कर दिया कि आतंकवाद को किसी भी परिस्थिति या आधार पर उचित नहीं ठहराया जा सकता है और बैठक के दौरान जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल 2025 को हुए जघन्य आतंकवादी हमले की भी कड़े शब्दों में निंदा की गई। दोनों नेताओं ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की 1267 प्रतिबंध समिति के तहत वैश्विक स्तर पर नामित आतंकवादी संगठनों और आतंकवादियों के खिलाफ कठोर एवं ठोस कार्रवाई करने की पुरजोर अपील की है।