जियो प्लेटफॉर्म्स आईपीओ में तूफान, खुलते ही बड़े निवेशकों का कोटा फुल, पहले घंटे में ही लगी 83 फीसदी बोली

रिलायंस जियो प्लेटफॉर्म्स के तीस हजार दो सौ तेरह करोड़ रुपये के आईपीओ को पहले ही घंटे में 83 फीसदी बोलियां मिल गईं हैं। संस्थागत निवेशकों का हिस्सा 2.86 गुना भर गया है जबकि ग्रे मार्केट में यह 268 रुपये के प्रीमियम पर पहुंच गया है।

भारतीय शेयर बाजार में निवेश की दुनिया से एक बेहद बड़ी और सनसनीखेज खबर सामने आ रही है। रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड की डिजिटल और टेलीकॉम आर्म मानी जाने वाली कंपनी रिलायंस जियो प्लेटफॉर्म्स का बहुप्रतीक्षित और विशालकाय आईपीओ यानी इनिशियल पब्लिक आॅफरिंग आधिकारिक तौर पर आम निवेशकों और बड़े निवेशकों की बोलियों के लिए खुल चुका है। बाजार में कदम रखते ही इस ऐतिहासिक इश्यू ने तमाम निवेशकों और वित्तीय विशेषज्ञों का ध्यान अपनी तरफ खींच लिया है। शुरुआती कारोबार के पहले ही घंटे में इस मेगा इश्यू को लेकर जिस तरह का उत्साह देखने को मिला है, उसने बाजार के तमाम अनुमानों को पीछे छोड़ दिया है। आंकड़े गवाह हैं कि बाजार में उतरने के साथ ही इस इश्यू ने रफ्तार पकड़ ली और सुबह 10 बजे तक यानी बोली शुरू होने के महज पहले एक घंटे के भीतर ही पूरा का पूरा इश्यू 83 फीसदी तक सब्सक्राइब हो चुका है। शुरुआती कारोबार के यह आंकड़े इस बात की तस्दीक करते हैं कि बड़े संस्थागत निवेशकों ने इस आईपीओ को हाथों-हाथ लिया है और इसमें जबरदस्त दिलचस्पी दिखाई है और हालांकि, बाजार के बड़े खिलाड़ियों के मुकाबले छोटे यानी रिटेल निवेशकों की तरफ से अभी शुरुआती दौर में माहौल थोड़ा शांत और सतर्क नजर आ रहा है।

रिलायंस जियो प्लेटफॉर्म्स के इस विशालकाय इश्यू का कुल आकार तीस हजार दो सौ तेरह करोड़ रुपये तय किया गया है। इतने बड़े आकार के आईपीओ के खुलने के बाद शुरुआती तीस मिनट के भीतर ही जो दृश्य देखने को मिला, उसने हर किसी को हैरान कर दिया। इस आईपीओ में क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स यानी क्यूआईबी कैटेगरी ने सबसे तगड़ी और आक्रामक डिमांड दिखाई है और बाजार से मिली आधिकारिक रिपोर्ट के मुताबिक, सुबह जब इश्यू खुला तो शुरुआती तीस मिनट के अंदर ही क्यूआईबी के लिए रिजर्व रखा गया पूरा का पूरा हिस्सा 100 फीसदी पूरी तरह से सब्सक्राइब हो चुका था। निवेशकों की यह दीवानगी यहीं नहीं रुकी, बल्कि इसके बाद भी बड़े निवेशकों की तरफ से ताबड़तोड़ बोलियां लगाने का सिलसिला पूरी तेजी के साथ जारी रहा और 86 गुना यानी लगभग तीन गुना ज्यादा बिडिंग आ चुकी थी। यह चौंकने वाला आंकड़ा इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि पहले घंटे की कुल बोलियों में देश और दुनिया के बड़े संस्थागत निवेशकों की भागीदारी सबसे अधिक और मजबूत रही है।

एक तरफ जहां बड़े संस्थागत निवेशकों ने पहले ही घंटे में अपना आरक्षित कोटा करीब तीन गुना तक भरकर अपनी मजबूत मंशा जाहिर कर दी है, वहीं दूसरी तरफ रिटेल यानी आम व्यक्तिगत निवेशकों की शुरुआती प्रतिक्रिया बेहद धीमी और संभली हुई बनी हुई है। सुबह 10 बजे तक के आंकड़ों के अनुसार, रिटेल निवेशकों के लिए आरक्षित हिस्से में सिर्फ 13 फीसदी सब्सक्रिप्शन ही दर्ज किया जा सका है। इसके अलावा, गैर-संस्थागत निवेशकों यानी एनआईआई कैटेगरी का हाल भी कुछ ऐसा ही सुस्त नजर आया, जहां पहले घंटे की समाप्ति पर मात्र 14 फीसदी बोलियां ही मिल पाईं। हालांकि, अगर अन्य रिजर्व कैटेगरी की बात की जाए, तो वहां शुरुआती घंटों में माहौल थोड़ा बेहतर और उत्साहजनक दिखाई दिया है। रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड के अपने कर्मचारियों के लिए रखे गए विशेष हिस्से में सुबह 10 बजे तक 35 फीसदी सब्सक्रिप्शन हो चुका था, जो कर्मचारियों के कंपनी के प्रति भरोसे को दर्शाता है। वहीं दूसरी तरफ, कंपनी के मौजूदा शेयरधारकों के लिए आरक्षित कोटे में भी 26 फीसदी बोलियां लग चुकी थीं। यहाँ यह ध्यान रखना बेहद जरूरी है कि यह सभी आंकड़े आईपीओ के पहले दिन केवल सुबह 10 बजे तक के शुरुआती घंटों के हैं। जैसे-जैसे दिन आगे बढ़ेगा और बोली की अवधि आगे बढ़ेगी, सब्सक्रिप्शन की यह तस्वीर और स्थिति पूरी तरह से बदल सकती है। अब देश भर के निवेशकों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले कारोबारी घंटों और दिनों में रिटेल समेत अन्य सभी श्रेणियों में सब्सक्रिप्शन की रफ्तार किस दिशा में आगे बढ़ती है।

जियो प्लेटफॉर्म्स के इस बहुचर्चित आईपीओ से जुड़ी कुछ बेहद अहम बातें और संरचनात्मक पहलू हैं, जिन्हें हर छोटे-बड़े निवेशक को निवेश करने से पहले अच्छी तरह जान लेना चाहिए। कुल तीस हजार दो सौ तेरह करोड़ रुपये का यह विशाल आईपीओ पूरी तरह से नए शेयर जारी करने वाला फ्रेश इश्यू है। इसका मतलब यह है कि इसमें ऑफर फॉर सेल यानी ओएफएस का कोई भी हिस्सा शामिल नहीं है। यानी इस इश्यू के जरिए जो भी पैसा जुटाया जाएगा, वह पूरी तरह से कंपनी के विकास और वित्तीय मजबूती के काम आएगा। कंपनी ने इस आईपीओ के लिए शेयरों का प्राइस बैंड प्रति शेयर एक हजार पैंसठ रुपये से एक हजार एक सौ उन्नीस रुपये तय किया है। निवेशकों को बोली लगाने के लिए इसी तयशुदा दायरे के भीतर अपना दांव लगाना होगा और इस मेगा इश्यू से बाजार के जरिए जुटाई जाने वाली भारी-भरकम रकम का एक बहुत बड़ा और मुख्य हिस्सा कंपनी के मौजूदा कर्ज को कम करने या पूरी तरह से चुकाने में इस्तेमाल किया जाएगा, जिससे कंपनी भविष्य में पूरी तरह कर्ज मुक्त या कम कर्ज वाली मजबूत स्थिति में आ सकेगी।

सब्सक्रिप्शन के इन शुरुआती और तेज आंकड़ों के बीच ग्रे मार्केट यानी अनौपचारिक बाजार में भी रिलायंस जियो प्लेटफॉर्म्स के इस आईपीओ को लेकर जबरदस्त चर्चा और गहमागहमी का माहौल बना हुआ है। वित्तीय बाजार के गलियारों से मिल रही जानकारियों के मुताबिक, ग्रे मार्केट में इस आईपीओ का प्रीमियम यानी जीएमपी दो सौ अड़सठ रुपये के आसपास चल रहा है। अगर इस ग्रे मार्केट प्रीमियम की तुलना इश्यू के एक हजार एक सौ उन्नीस रुपये के ऊपरी प्राइस बैंड के साथ करके देखी जाए, तो यह करीब 24 फीसदी के संभावित और आकर्षक लिस्टिंग गेन का साफ संकेत देता है। हालांकि, तमाम नए और पुराने निवेशकों के लिए यह समझना बेहद जरूरी है कि ग्रे मार्केट प्रीमियम पूरी तरह से एक अनौपचारिक और गैर-विनिमय बाजार प्रणाली है। यह केवल बाजार के सट्टेबाजों और जानकारों के अनुमानों पर आधारित होता है। जीएमपी कभी भी इस बात की सौ फीसदी गारंटी नहीं देता है कि शेयर बाजार में वास्तविक लिस्टिंग के समय निवेशकों को यही भाव मिलेगा। किसी भी शेयर की वास्तविक लिस्टिंग कीमत इस बात पर निर्भर करती है कि आईपीओ की प्रक्रिया पूरी होने के बाद उस समय शेयर बाजार की व्यापक स्थितियां कैसी हैं और निवेशकों की वास्तविक मांग का स्तर क्या रहता है।