उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के बेहद चर्चित और सनसनीखेज शिवा शर्मा हत्याकांड मामले में एक बहुत बड़ा और अहम मोड़ सामने आया है। इस हाई प्रोफाइल मामले में पिछले लगभग ग्यारह दिनों से लगातार फरार चल रही मुख्य आरोपी श्रद्धा दुबे को आखिरकार उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स और लखनऊ पुलिस की संयुक्त टीम ने महाराष्ट्र के नागपुर शहर से धर दबोचा है। इस सफल और सुनियोजित ऑपरेशन में पुलिस ने केवल श्रद्धा दुबे को ही नहीं बल्कि उसकी बहन रश्मि दुबे और उनके कार चालक दानिश को भी नागपुर से गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की है। इन तीनों आरोपियों पर कानून का शिकंजा कसने के लिए उत्तर प्रदेश पुलिस विभाग की तरफ से पचास-पचास हजार रुपये का भारी इनाम घोषित किया गया था, जो इनकी गिरफ्तारी के बाद से ही पुलिस रिकॉर्ड में दर्ज हो चुका था।
श्रद्धा दुबे की इस गिरफ्तारी के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा था कि आखिर पुलिस जैसी पेशेवर एजेंसी को एक महिला और उसके साथियों को दबोचने में इतना लंबा समय क्यों लग गया, जबकि पूरा पुलिस महकमा और एसटीएफ उसकी तलाश में दिन-रात एक किए हुए थी। इस अत्यंत महत्वपूर्ण सवाल का जवाब खुद उत्तर प्रदेश एसटीएफ के चीफ और एडीजी लॉ एंड ऑर्डर अमिताभ यश ने दिया है। मीडिया और जनता के सामने अपनी बात रखते हुए एसटीएफ चीफ अमिताभ यश ने स्पष्ट रूप से बताया कि फरार चल रही मुख्य आरोपी श्रद्धा दुबे को पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली के तौर-तरीकों की बहुत अच्छी जानकारी थी। इसके साथ ही उसे विभिन्न तकनीकी पहलुओं और पुलिस सर्विलांस से बचने के तरीकों का भी अच्छा ज्ञान था, जिसके कारण वह लगातार कानून की आंखों में धूल झोंकने में सफल हो रही थी और इसी तकनीकी जानकारी के चलते उसकी गिरफ्तारी में इतना अधिक समय लग गया।
एसटीएफ प्रमुख अमिताभ यश के अनुसार, श्रद्धा दुबे को पुलिस के काम करने के तरीकों की पूरी समझ थी, जिसका फायदा उठाकर वह अपनी लोकेशन लगातार बदल रही थी और पुलिस की गिरफ्त से बाहर बनी हुई थी। हालांकि इतनी चालाकी दिखाने के बावजूद उत्तर प्रदेश पुलिस की विभिन्न टीमें लगातार उसका पीछा कर रही थीं। राज्य के अलग-अलग हिस्सों की पुलिस और एसटीएफ की विशेष इकाइयां इस एक ही मकसद में पूरी शिद्दत के साथ जुटी हुई थीं। एसटीएफ चीफ अमिताभ यश ने मीडिया को जानकारी देते हुए आगे बताया कि अंततः उत्तर प्रदेश पुलिस और एसटीएफ की संयुक्त टीमों को अपनी इस लंबी और कड़ी मेहनत में बड़ी सफलता हासिल हो गई है। श्रद्धा दुबे और उसके सहयोगियों की इस गिरफ्तारी के बाद अब पुलिस हिरासत में उनसे गहन पूछताछ की जाएगी, जिससे इस पूरे हत्याकांड से जुड़े हुए कई अन्य अनसुलझे पहलुओं और छिपे हुए रहस्यों की अहम जानकारियां बाहर आने की पूरी संभावना है।
इस पूरे मामले की पृष्ठभूमि पर नजर डालें तो श्रद्धा दुबे और उसके अन्य सहयोगियों की तलाश के लिए उत्तर प्रदेश प्रशासन ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी थी और आरोपियों की धरपकड़ के लिए यूपी एसटीएफ मुख्यालय की विशेष टीमों के अलावा लखनऊ एसटीएफ, लखनऊ कमिश्नरेट की पुलिस और बनारस एसटीएफ की कई टीमों को मैदान में उतारा गया था। इन सभी खुफिया और मैदानी टीमों को निर्देश दिए गए थे कि वे हरसंभव प्रयास करके आरोपियों का सुराग लगाएं। अपनी तकनीकी सर्विलांस और खुफिया तंत्र का इस्तेमाल करते हुए जांच एजेंसियों को आखिरकार पुख्ता तौर पर यह जानकारी मिल गई कि आरोपी श्रद्धा दुबे अपनी बहन और ड्राइवर के साथ महाराष्ट्र के नागपुर शहर में छिपी हुई है। इस अचूक और पुख्ता लोकेशन के मिलने के तुरंत बाद ही यूपी एसटीएफ और लखनऊ पुलिस की एक संयुक्त विशेष टीम को नागपुर के लिए रवाना किया गया।
नागपुर पहुंचने के बाद इस संयुक्त टीम ने स्थानीय नागपुर पुलिस कमिश्नरेट और वहां की स्थानीय इकाइयों की मदद से एक सुनियोजित घेराबंदी और कार्रवाई को अंजाम दिया और इस संयुक्त ऑपरेशन की सफलता के परिणामस्वरूप मुख्य आरोपी श्रद्धा दुबे को उसकी बहन रश्मि दुबे और उनके कार चालक दानिश के साथ नागपुर से सुरक्षित और सफलतापूर्वक हिरासत में ले लिया गया। पुलिस कमिश्नरेट लखनऊ की ओर से इस पूरे मामले की आधिकारिक पुष्टि करते हुए जानकारी दी गई कि इन तीनों आरोपियों यानी श्रद्धा दुबे, रश्मि दुबे और दानिश पर पचास-पचास हजार रुपये का इनाम घोषित था, जिसे अब गिरफ्तार किए जाने के बाद आगे की प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत नियमानुसार पूरा किया जाएगा।
इस पूरे आपराधिक प्रकरण की शुरुआत लखनऊ के हजरतगंज थाने में हुई थी। पुलिस रिकॉर्ड और आधिकारिक दस्तावेजों के मुताबिक, हजरतगंज थाने में नौ अक्टूबर दो हजार छब्बीस के दिन रंजना शर्मा की तरफ से एक लिखित शिकायत दर्ज कराई गई थी। इसी लिखित शिकायत के आधार पर पुलिस ने इस गंभीर मामले में औपचारिक रूप से मुकदमा दर्ज किया था। पुलिस द्वारा दर्ज किया गया यह मामला भारतीय न्याय संहिता यानी बीएनएस की धारा दसती (एक) के अंतर्गत आता है, जो सीधे तौर पर हत्या के गंभीर अपराध से संबंधित है। जैसे ही हजरतगंज थाने में यह मुकदमा दर्ज हुआ और मामले की गंभीरता सार्वजनिक हुई, उसके तुरंत बाद से ही श्रद्धा दुबे, रश्मि दुबे और उनका चालक दानिश पुलिस की गिरफ्त से बचने के लिए फरार हो गए थे और लगातार छिपते फिर रहे थे।
मुकदमा दर्ज होने के बाद से ही इन आरोपियों की कोई आधिकारिक लोकेशन नहीं मिल रही थी, जिसके बाद लखनऊ पुलिस और एसटीएफ ने इनकी गिरफ्तारी के लिए विशेष टीमों का गठन किया था और इन पर पचास-पचास हजार रुपये का इनाम घोषित कर दिया था। अब चूंकि तीनों आरोपियों को महाराष्ट्र के नागपुर से पकड़ लिया गया है, इसलिए आगे की कानूनी प्रक्रिया तेजी से चलाई जा रही है और एसटीएफ चीफ अमिताभ यश के मुताबिक, नागपुर से पकड़े गए सभी गिरफ्तार आरोपियों को ट्रांजिट रिमांड पर कानूनी रूप से अपने कब्जे में लेकर लखनऊ कोर्ट में पेश करने की पूरी प्रक्रिया वर्तमान में जारी है। महाराष्ट्र से उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ लाने के लिए सभी आवश्यक कानूनी और प्रशासनिक औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं, जिन्हें पूरा करने के तुरंत बाद इन सभी को सुरक्षित रूप से लखनऊ अदालत में पेश किया जाएगा।
लखनऊ कोर्ट में पेश किए जाने के बाद पुलिस अदालत से आरोपियों की रिमांड की मांग करेगी, ताकि उनसे गहराई से पूछताछ की जा सके। पुलिस की इस पूछताछ में यह साफ तौर पर पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि शिवा शर्मा की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत और उसके बाद के घटनाक्रम में इन सभी आरोपियों की व्यक्तिगत रूप से क्या और कितनी भूमिका रही थी। इसके अलावा पुलिस यह भी जानने का प्रयास करेगी कि अपनी फरारी के दौरान इन ग्यारह दिनों में ये लोग उत्तर प्रदेश से भागकर देश के किन-किन अन्य शहरों या राज्यों में छिपे रहे और इन्हें इस दौरान किन-किन लोगों ने संरक्षण या आर्थिक मदद पहुंचाई थी। फिलहाल इस बहुचर्चित मामले में उत्तर प्रदेश पुलिस और एसटीएफ द्वारा आगे की सभी कानूनी और तकनीकी कार्रवाई पूरी मुस्तैदी के साथ जारी है।
