यूपी के रण में उतरेंगे शाह! 30 अक्टूबर को प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में लेंगे हिस्सा

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की तैयारियों के तहत केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह तीस अक्टूबर को लखनऊ में प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में हिस्सा लेंगे और कार्यकर्ताओं को संबोधित करेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी पच्चीस अक्टूबर को वाराणसी जा रहे हैं।

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी यानी बीजेपी ने अपनी चुनावी तैयारियों को और अधिक तेज कर दिया है। अब तक संगठन की बैठकों, फीडबैक और चुनावी रणनीति पर मंथन के जरिए तैयारी कर रही बीजेपी के लिए केंद्रीय नेतृत्व की सक्रियता और भी ज्यादा बढ़ने जा रही है। प्राप्त सूत्रों के मुताबिक, देश के केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह तीस अक्टूबर को उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ पहुंचेंगे। वह यहां भारतीय जनता पार्टी की प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में शामिल होने के साथ ही पार्टी के तमाम पदाधिकारियों और उपस्थित कार्यकर्ताओं को भी संबोधित करेंगे।

गौरतलब है कि साल 2027 के विधानसभा चुनाव में अब ज्यादा वक्त नहीं बचा है। बीजेपी के सामने इस बार केवल सत्ता में वापसी ही नहीं, बल्कि लगातार तीसरी बार अपनी सरकार बनाने की बड़ी चुनौती है। ऐसे में पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व की सक्रियता बढ़ना पूरी तरह तय माना जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, तीस अक्टूबर को अमित शाह का यह लखनऊ दौरा उत्तर प्रदेश में उनके चुनावी कार्यक्रमों की एक ठोस शुरुआत का संकेत होगा और इस महत्वपूर्ण बैठक में संगठन की मौजूदा स्थिति, चुनावी तैयारियों और पार्टी कार्यकर्ताओं की आगामी भूमिका पर विस्तार से चर्चा की जाएगी।

दूसरी ओर, देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद पच्चीस अक्टूबर को वाराणसी का दौरा करने जा रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की यह सक्रियता बीजेपी के पूरे चुनावी अभियान में बेहद अहम मानी जाती है। मोदी सरकार के कामकाज और जन कल्याणकारी योजनाओं को सीधे जनता तक पहुंचाने के साथ-साथ अमित शाह हमेशा से संगठन के स्तर पर चुनावी रणनीति को जमीन पर उतारने में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं। ऐसे में उत्तर प्रदेश में उनकी सक्रियता के बढ़ने को मिशन 2027 की तैयारी के अगले चरण के तौर पर देखा जा रहा है।

बीजेपी के भीतर पिछले कई दिनों से यह लगातार मांग उठ रही थी कि उत्तर प्रदेश चुनाव की तैयारियों को लेकर केंद्रीय नेतृत्व को अब सीधे मैदान में उतरना चाहिए। संगठन के स्तर पर लगातार बैठकों और समीक्षाओं के बावजूद चुनावी मोर्चे पर अब पार्टी के शीर्ष नेताओं की सक्रियता को और बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा था। पार्टी के सामने यह बड़ी चुनौती है कि वह अपने कार्यकर्ताओं में लगातार उत्साह बनाए रखे, बूथ स्तर तक संगठन को पूरी तरह मजबूत करे और स्थानीय स्तर पर मिल रहे फीडबैक के आधार पर अपनी अचूक रणनीति तय करे।

अमित शाह की राजनीतिक पहचान हमेशा से एक बेहतरीन चुनावी रणनीतिकार और संगठन के माइक्रोमैनेजमेंट के उस्ताद के तौर पर रही है। ऐसे में लखनऊ में होने वाली प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में उनकी मौजूदगी को केवल एक साधारण संगठनात्मक कार्यक्रम तक सीमित नहीं माना जा रहा है। इस बैठक के जरिए प्रदेश नेतृत्व और कार्यकर्ताओं को चुनावी प्राथमिकताओं का एक बहुत ही स्पष्ट संदेश देने की पूरी कोशिश की जाएगी।

प्रदेश कार्यसमिति की इस बैठक में क्या कुछ प्रमुख रूप से मंथन होगा, इसको लेकर भी सूत्रों ने कई बातें साझा की हैं। सूत्रों के मुताबिक, इस बैठक में मिशन 2027 की मुख्य रणनीति, संगठन की मजबूती और जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं की भूमिका जैसे मुद्दे सबसे प्रमुख रह सकते हैं। पार्टी की पैनी नजर बूथ स्तर पर संगठन की सक्रियता, सरकार के कामकाज को जनता तक पूरी तरह पहुंचाने और जमीनी चुनावी माहौल के सटीक आकलन पर भी बनी रहेगी। बीजेपी के लिए यह चुनाव कई मायनों में बेहद अहम और प्रतिष्ठा का प्रश्न बन चुका है। साल 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान उत्तर प्रदेश में पार्टी की सीटें घटने के बाद से ही संगठन और चुनावी रणनीति को लेकर लगातार मंथन का दौर जारी रहा है।

अब आगामी विधानसभा चुनाव से ठीक पहले पार्टी की मुख्य कोशिश यही होगी कि लोकसभा चुनाव के दौरान सामने आई तमाम चुनौतियों से जरूरी सबक लेकर संगठन को नए सिरे से पूरी ताकत के साथ सक्रिय किया जाए। अमित शाह के इस दौरे का एक सबसे अहम पहलू पार्टी के कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों को संबोधित करना भी होगा। किसी भी चुनाव में संगठन की असली ताकत हमेशा बूथ स्तर के समर्पित कार्यकर्ताओं पर ही निर्भर करती है। ऐसे में कार्यकर्ताओं को नए सिरे से सक्रिय करना, उनकी अलग-अलग जिम्मेदारियां तय करना और पार्टी के चुनावी लक्ष्य के प्रति पूरी तरह एकजुट करने पर विशेष जोर दिया जा सकता है।

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में बीजेपी की रणनीति अब धीरे-धीरे केवल संगठनात्मक तैयारियों के दायरे से आगे बढ़कर सीधे आक्रामक चुनावी मोड में आती हुई साफ दिखाई दे रही है। प्रदेश स्तर पर लगातार बैठकों और समीक्षाओं के दौर के बाद अब केंद्रीय नेतृत्व की यह बढ़ती सक्रियता पार्टी की चुनावी तैयारी का अगला और निर्णायक चरण हो सकती है। आगामी तीस अक्टूबर को अमित शाह का संभावित लखनऊ दौरा इसी पूरे लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आने वाले दिनों में उत्तर प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों में पार्टी के अन्य केंद्रीय नेताओं की सक्रियता और दौरे भी काफी हद तक बढ़ सकते हैं, जिससे राजनीतिक सरगर्मी अपने चरम पर होगी।