संयुक्त राज्य अमेरिका के कैलिफोर्निया राज्य से एक बड़ी और सनसनीखेज खबर सामने आई है, जहाँ कथित चुनाव धोखाधड़ी के गंभीर मामलों में कुल 28 ग्रीन कार्ड धारकों पर औपचारिक रूप से मामले दर्ज किए गए हैं। अमेरिकी न्याय विभाग की ओर से दी गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इन आरोपियों में दो भारतीय नागरिक भी शामिल हैं, जिन पर नवंबर 2024 में संपन्न हुए अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के दौरान अवैध रूप से मतदाता के रूप में पंजीकरण कराने और अपने मताधिकार का इस्तेमाल करने का गंभीर आरोप लगाया गया है। इस पूरी कार्रवाई ने अमेरिका की चुनावी प्रणाली और आव्रजन नियमों की सख्ती पर एक बार फिर से बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर दिया है, क्योंकि चुनावी प्रक्रिया की पवित्रता को बनाए रखने के लिए स्थानीय प्रशासन और संघीय एजेंसियां बेहद सतर्कता बरत रही हैं।
इस संपूर्ण कानूनी शिकंजे में जिन दो भारतीय नागरिकों के नाम प्रमुखता से सामने आए हैं, उनमें रेंचो पालोस वर्डेस क्षेत्र की रहने वाली 30 साल की अमनदीप कौर और सैक्रामेंटो शहर में रहने वाले 67 साल के कमलेश नवनीतलाल शाह शामिल हैं। अमेरिकी न्याय विभाग के दस्तावेजों के मुताबिक, अमनदीप कौर जो वर्तमान में अमेरिकी नागरिकता प्राप्त करने की प्रक्रिया के तहत प्रयास कर रही थीं, उन्होंने कथित तौर पर दिसंबर 2022 के दौरान मतदाता के तौर पर अपना पंजीकरण करवाया था और इसके बाद नवंबर 2024 के राष्ट्रपति पद के आम चुनाव में अपना बहुमूल्य वोट भी डाला था। वहीं दूसरी तरफ, दूसरे भारतीय नागरिक कमलेश नवनीतलाल शाह पर आरोप है कि उन्होंने नवंबर 2024 के आम चुनाव के ठीक उसी दिन मतदाता के रूप में अपना पंजीकरण कराया और उसी दिन यानी चुनाव के दिन ही अपना वोट भी डाल दिया। इन दोनों ही आरोपियों के खिलाफ एक औपचारिक कानूनी दस्तावेज के जरिए आरोप तय किए गए हैं, जिसे स्थानीय न्याय प्रणाली में 'इंफॉर्मेशन' के नाम से जाना जाता है। हालांकि, कैलिफोर्निया में सुबह के वक्त की गई ताबड़तोड़ छापेमारी के दौरान जिन 11 लोगों को गिरफ्तार किया गया था, उनमें ये दोनों भारतीय नागरिक शामिल हैं या नहीं, इस बात को लेकर अभी तक पूरी तरह से स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई है और प्रशासनिक स्तर पर इसकी पुष्टि का इंतजार किया जा रहा है।
ऑपरेशन प्रोटेक्ट द वोट के तहत हुई बड़ी कार्रवाई
अमेरिकी न्याय विभाग के अनुसार, यह पूरी कार्रवाई और जांच विशेष तौर पर 'ऑपरेशन प्रोटेक्ट द वोट' नामक एक उच्च स्तरीय पहल के अंतर्गत की जा रही है। यह एक संयुक्त और बेहद मजबूत पहल है, जिसमें कैलिफोर्निया राज्य में स्थित सभी चारों अमेरिकी अटॉर्नी कार्यालयों ने आपस में मिलकर हाथ मिलाया है। इस संयुक्त अभियान का मुख्य और एकमात्र उद्देश्य देश में किसी भी प्रकार की चुनावी धोखाधड़ी की गहराई से जांच करना और अमेरिकी चुनावों की निष्पक्षता, पारदर्शिता तथा लोकतांत्रिक गरिमा की रक्षा करना है। न्याय विभाग ने इस बात पर विशेष रूप से जोर दिया है कि अमेरिकी कानूनों के मुताबिक जो विदेशी नागरिक अमेरिका की पूर्ण नागरिकता नहीं रखते हैं, उन्हें किसी भी स्थिति में अमेरिकी चुनावों में मतदान करने की कानूनी अनुमति नहीं दी जाती है। इसके बावजूद इन नियमों का उल्लंघन करते हुए इन लोगों द्वारा उठाया गया यह कदम एक गंभीर संघीय अपराध की श्रेणी में आता है।
28 विदेशी नागरिकों पर लटकी कानूनी तलवार
न्याय विभाग की ओर से दी गई विस्तृत जानकारी के मुताबिक, जिन कुल 28 विदेशी नागरिकों पर यह गंभीर मामले दर्ज किए गए हैं, वे सभी 'कानूनी स्थायी निवासी' यानी लीगल परमानेंट रेजिडेंट्स (LPRs) हैं, जिन्हें आम बोलचाल की भाषा में 'ग्रीन कार्ड' धारक कहा जाता है। कार्यवाहक डिप्टी अटॉर्नी जनरल ट्रेंट मैककॉटटर ने इस मामले पर मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि ये सभी 28 आरोपी वास्तव में उन 20000 से अधिक संदिग्ध लोगों की एक लंबी सूची का हिस्सा हैं, जो अमेरिकी नागरिक न होने के बावजूद भी मतदाता के रूप में अवैध रूप से पंजीकृत पाए गए थे। आपको बता दें कि यह अत्यंत संवेदनशील सूची पिछले सप्ताह ही कैलिफोर्निया राज्य के संबंधित चुनाव अधिकारियों को आधिकारिक तौर पर सौंपी गई थी, जिसके बाद से लगातार इस दिशा में सख्त कदम उठाए जा रहे हैं।
फर्जीवाड़े के गंभीर आरोप और संभावित सजा का प्रावधान
इन सभी आरोपियों के खिलाफ जो कानूनी आरोप तय किए गए हैं, उनमें मुख्य रूप से अमेरिकी नागरिकता हासिल करने के लिए दिए जाने वाले आधिकारिक आवेदन पत्रों में गलत और झूठी जानकारी देना तथा धोखाधड़ी के माध्यम से मतदाता के रूप में अपना पंजीकरण करवाना शामिल हैं। कानून की नजर में ये दोनों ही कृत्य बेहद गंभीर और गैर-जमानती अपराध माने जाते हैं। न्याय विभाग के प्रावधानों के अनुसार, यदि ये आरोपी अदालत में दोषी करार दिए जाते हैं, तो इन्हें संघीय जेल में अधिकतम पांच साल की कठोर सजा का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि, न्यायिक विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि अधिकतम सजा का प्रावधान होने का यह कतई मतलब नहीं है कि हर एक आरोपी को अनिवार्य रूप से पांच साल की जेल ही काटनी होगी। अंततः सजा का वास्तविक स्वरूप क्या होगा, यह पूरी तरह से आरोपियों के खिलाफ लगाए गए विशिष्ट आरोपों, पेश किए गए पुख्ता सबूतों और पूरी अदालती कार्यवाही के अंतिम नतीजों पर ही निर्भर करेगा।
इस साल चुनाव से जुड़े मामलों में पहले भी हो चुकी हैं गिरफ्तारियां
सोमवार को सामने आई इस ताज़ा और बड़ी घोषणा से ठीक पहले, अमेरिकी न्याय विभाग ने इस वर्ष के दौरान चुनाव से जुड़ी हुई विभिन्न प्रकार की गैर-कानूनी गड़बड़ियों के आरोप में लगभग 90 लोगों के खिलाफ कड़े कानूनी मामले दर्ज किए थे। इनमें से 50 ऐसे लोग भी विशेष रूप से शामिल थे, जिन पर पूरी तरह से गैर-नागरिक होते हुए भी अमेरिकी चुनावों में मतदान करने का गंभीर आरोप लगाया गया था। गौर करने वाली बात यह है कि नवंबर 2024 में संपन्न हुए राष्ट्रपति चुनाव के दौरान पूरे अमेरिका में 227 मिलियन यानी 22 करोड़ 70 लाख से अधिक पंजीकृत मतदाता मौजूद थे, जिनके बीच इस तरह की अनियमितताओं की जांच करना न्याय विभाग के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। इस पूरे प्रकरण ने एक बार फिर से इस बात को साबित कर दिया है कि अमेरिकी प्रशासन चुनावी शुचिता को बनाए रखने के लिए किसी भी स्तर तक की कानूनी कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेगा।
