बॉलीवुड अभिनेता टाइगर श्रॉफ पर हुए हालिया हमले और फायरिंग के मामले में मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच ने एक बड़ी सफलता हासिल करते हुए तीन आरोपियों को राजस्थान के कोटा रेलवे स्टेशन से धर दबोचा है। इस सनसनीखेज मामले में मुंबई पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ सख्त कानून महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम यानी मकोका के तहत कार्रवाई की है और इस पूरे मामले का खुलासा मुंबई क्राइम ब्रांच के डीसीपी राजतिलक रौशन ने सोमवार को एक विशेष प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान किया, जिसमें उन्होंने आरोपियों की गिरफ्तारी और उनकी फरारी की पूरी योजना का सिलसिलेवार ब्योरा साझा किया। गिरफ्तार किए गए तीनों आरोपियों में से दो हरियाणा के रहने वाले हैं और एक आरोपी बिहार से ताल्लुक रखता है और पुलिस की शुरुआती जांच में यह बात पूरी तरह साफ हो गई है कि इस संगीन मामले में कोई भी आरोपी नाबालिग नहीं है। सभी आरोपियों के खिलाफ हत्या की कोशिश और आर्म्स एक्ट के तहत गंभीर धाराओं में मुकदमे दर्ज किए गए हैं। कोटा में स्थानीय मजिस्ट्रेट के सामने पेश करने के बाद अदालत ने आरोपियों की अड़तालीस घंटे की ट्रांजिट रिमांड मंजूर कर ली है, जिसके बाद मुंबई पुलिस इन्हें लेकर मुंबई के लिए रवाना हो चुकी है।
घटना की पृष्ठभूमि और मुंबई से फरारी का फिल्मी तरीका
पुलिस जांच में यह बात सामने आई है कि आरोपियों ने कानून की पकड़ से बचने के लिए बेहद शातिर तरीके से अपने परिवहन के साधन बदले। यह पूरी घटना रविवार शाम करीब सात बजे मुंबई के पॉश जुहू इलाके में घटी थी, जहां अभिनेता टाइगर श्रॉफ की गाड़ी पर ताबड़तोड़ फायरिंग की गई थी और इस सनसनीखेज वारदात को अंजाम देने के बाद हमलावरों ने पुलिस को चकमा देने के लिए ट्रांसपोर्ट के कई अलग-अलग साधनों का इस्तेमाल करते हुए भागने की एक सोची-समझी योजना बनाई थी। मुंबई क्राइम ब्रांच ने सीसीटीवी फुटेज, तकनीकी विश्लेषण और फील्ड जांच का बेहतरीन इस्तेमाल करते हुए आरोपियों की हरकतों को ट्रैक किया और समय रहते राजस्थान पुलिस को पूरी जानकारी से अवगत कराया। इसी शानदार आपसी तालमेल के चलते कोटा रेलवे स्टेशन पर आरोपियों को धर दबोचने में सफलता मिली। डीसीपी राजतिलक रौशन ने जानकारी दी कि इस फायरिंग की घटना की गुत्थी सुलझाने और अपराधियों को पकड़ने के लिए मुंबई पुलिस की करीब बीस विशेष टीमों का गठन किया गया था, जो लगातार दिन-रात काम कर रही थीं।
अंधेरी से सूरत और फिर ट्रेन से कोटा तक का सफर
जांच के मुताबिक, हमलावरों ने फायरिंग की वारदात को अंजाम देने के बाद कथित तौर पर विले पार्ले और अंधेरी के रास्ते एसवी रोड से भागने का प्रयास किया। बोरीवली की तरफ जाने वाली लोकल ट्रेन में सवार होने से ठीक पहले उन्होंने अंधेरी वेस्ट रेलवे स्टेशन के पास अपनी मोटरसाइकिल लावारिस हालत में छोड़ दी थी। अंधेरी वेस्ट के पास मोटरसाइकिल छोड़ने के बाद ये आरोपी लोकल ट्रेन के जरिए बोरीवली पहुंचे। बोरीवली से इन्होंने गुजरात के सूरत शहर तक जाने के लिए एक ऐप-बेस्ड कैब किराए पर ली। पुलिस की पूछताछ और टेक्निकल सर्विलांस से यह बात भी सामने आई कि यह कैब आरोपियों में से एक मुख्य आरोपी ने बुक की थी, जिसकी पहचान ऋतिक के रूप में हुई है। सूरत पहुंचने के बाद इन लोगों ने राजस्थान जाने के लिए पुणे-जयपुर एक्सप्रेस ट्रेन पकड़ी। मुंबई क्राइम ब्रांच ने लगातार तकनीकी तरीकों से इनकी लोकेशन का पीछा किया और कोटा पुलिस को उस विशिष्ट रेलवे कोच की सटीक जानकारी दी जिसमें वे सफर कर रहे थे। इस पुख्ता सूचना पर त्वरित कार्रवाई करते हुए कोटा पुलिस और एंटी-गैंगस्टर टास्क फोर्स ने मिलकर कोटा रेलवे स्टेशन पर दिल्ली की ओर जा रही ट्रेन से इन तीनों आरोपियों को दबोच लिया।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान और भूमिकाएं
मुंबई पुलिस द्वारा दी गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार गिरफ्तार किए गए तीनों आरोपियों की पहचान रेहान, ऋतिक कुमार और फूल सिंह के रूप में हुई है। इनमें से कोई भी नाबालिग नहीं है; एक आरोपी की उम्र अठारह साल है जबकि बाकी दोनों आरोपियों की उम्र बाईस साल है। पुलिस के अनुसार इनमें से दो आरोपी एक ही क्षेत्र के रहने वाले हैं और एक-दूसरे को अच्छी तरह से जानते थे। कथित शूटरों के रूप में फूल सिंह और रेहान की पहचान की गई है। मामले से जुड़े दस्तावेजों और वीडियो फुटेज के अनुसार फूल सिंह उन प्रमुख शूटर्स में से एक था जिसका हथियार फायरिंग के दौरान बीच में ही खराब हो गया था। इसके अलावा घटना से जुड़े वीडियो फुटेज में रेहान को एक विशेष टोपी पहने हुए भी देखा गया है और पुलिस अब इन आरोपियों की अलग-अलग व्यक्तिगत भूमिकाओं और इस पूरी शूटिंग से पहले के घटनाक्रम की गहराई से जांच कर रही है। इसके अलावा पुलिस आरोपियों के शैक्षणिक बैकग्राउंड को भी खंगाल रही है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इन्हें अभिनेता टाइगर श्रॉफ की सटीक लोकेशन की जानकारी किसने और कैसे दी थी।
मोटरसाइकिल की खरीद और ओनरशिप हिस्ट्री
पुलिस ने उस मोटरसाइकिल का भी सफलतापूर्वक पता लगा लिया है जिसका इस्तेमाल कथित तौर पर इस शूटिंग की घटना के लिए किया गया था। यह मोटरसाइकिल आरोपी ऋतिक के नाम पर पंजीकृत है, जिसे पुलिस रिकॉर्ड में एक तेज राइडर के तौर पर वर्णित किया गया है। ऋतिक ने यह बाइक इस साल ग्यारह सितंबर को खरीदी थी। शुरुआती जांच में यह भी चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि वर्ष दो हजार बाईस से लेकर अब तक यह मोटरसाइकिल चार बार बदली जा चुकी थी, लेकिन इस तरह का मालिकाना हक ट्रांसफर किसी भी आधिकारिक रजिस्टर्ड बिक्री में दर्ज नहीं था। यही वजह है कि मुंबई पुलिस अब इस गाड़ी की पूरी ओनरशिप हिस्ट्री की बारीकी से जांच कर रही है और मोटरसाइकिल के इन तमाम निशानों और कड़ियों को जोड़ने से पुलिस को यह पता लगाने में खासी मदद मिलने की उम्मीद है कि इस वाहन को वास्तव में कैसे हासिल किया गया था और क्या इस हमले में इस्तेमाल की गई गाड़ी का इंतजाम करने में किसी अन्य बाहरी व्यक्ति का हाथ था या नहीं।
हथियारों का इस्तेमाल और आपराधिक रिकॉर्ड
क्राइम ब्रांच के वरिष्ठ अधिकारियों से मिली जानकारी के मुताबिक इस सनसनीखेज हमले में कुल दो अलग-अलग हथियारों का इस्तेमाल किया गया था और अभिनेता की गाड़ी पर पांच से छह राउंड फायरिंग की गई थी। आरोपियों के खिलाफ हत्या की कोशिश और आर्म्स एक्ट के तहत गंभीर अपराध दर्ज किए गए हैं और हालांकि मुंबई पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया है कि इस मामले में इस्तेमाल किए गए मुख्य हथियारों की बरामदगी अभी बाकी है और पुलिस की टीमें उन्हें ढूंढने का प्रयास कर रही हैं। डीसीपी रौशन ने यह भी स्पष्ट किया कि जैसे-जैसे इस बहुस्तरीय जांच का दायरा आगे बढ़ेगा, वैसी-वैसी आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यदि तकनीकी या भौतिक साक्ष्यों से किसी अन्य नए संदिग्ध के इस साजिश में शामिल होने का पता चलता है, तो भविष्य में और भी गिरफ्तारियां की जा सकती हैं। इसके अलावा पुलिस उन तमाम सोशल मीडिया पोस्ट्स की भी गहनता से जांच कर रही है जिनके जरिए इस फायरिंग की जिम्मेदारी लेने का दावा किया गया था।
सोशल मीडिया दावे और सुरक्षा व्यवस्था
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान डीसीपी राजतिलक रौशन ने मीडिया को बताया कि सोशल मीडिया पर किए जा रहे उन सभी दावों को पूरी तरह से वेरिफाई किया जा रहा है, जिनमें इस हमले की जिम्मेदारी ली गई थी। हालांकि जांचकर्ताओं ने यह भी स्वीकार किया कि वे अभी तक इस पूरे हमले के पीछे की किसी बड़ी और गहरी साजिश का ठोस रूप से पता नहीं लगा पाए हैं और इसके साथ ही मुंबई पुलिस ने यह भी साफ किया है कि उनके पास इस घटना से पहले अभिनेता टाइगर श्रॉफ को इस प्रकार की किसी भी घटना से जुड़े धमकी भरे कॉल आने का कोई भी आधिकारिक रिकॉर्ड मौजूद नहीं है। पुलिस मुख्य रूप से इस बात की कड़ियां जोड़ रही है कि आखिर आरोपियों को अभिनेता की लोकेशन की सटीक जानकारी कैसे मिली और क्या किसी अंदरूनी व्यक्ति ने उन्हें इस हमले की योजना बनाने या उसे सफलता से अंजाम देने में कोई प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष मदद पहुंचाई थी। अंत में पुलिस ने यह भी दोहराया कि देश के सभी प्रमुख सार्वजनिक और प्रसिद्ध हस्तियों के लिए सुरक्षा का इंतजाम, थ्रेट असेसमेंट और उपलब्ध जानकारी के आधार पर, तयशुदा स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर के नियमों के तहत ही किया जाता है। इस सफल ऑपरेशन को अंजाम देने में दिल्ली पुलिस, गुजरात पुलिस और राजस्थान पुलिस का आपसी समन्वय और सहयोग सराहनीय रहा।
