भारत और न्यूजीलैंड के बीच बहुप्रतीक्षित टी20 सीरीज की शुरुआत आगामी बाईस अक्टूबर से होने जा रही है। इस रोमांचक टी20 सीरीज के लिए भारतीय क्रिकेट टीम में एक बड़ा और चौंकाने वाला बदलाव देखने को मिला है, जहां अनुभवी तेज गेंदबाज भुवनेश्वर कुमार की लगभग चार साल के लंबे अंतराल के बाद टीम इंडिया में शानदार वापसी हुई है। भुवनेश्वर कुमार की इस धमाकेदार वापसी ने क्रिकेट गलियारों में हलचल मचा दी है और हर कोई इस बात पर चर्चा कर रहा है कि आखिर इस अनुभवी गेंदबाज के लौटने से भारतीय टीम को कितना फायदा पहुंचेगा और इस महत्वपूर्ण दौरे पर इस टी20 सीरीज में टीम इंडिया अपना पहला मुकाबला क्राइस्टचर्च के हेगले ओवल मैदान पर खेलेगी, जहां की परिस्थितियों में तेज गेंदबाजों के लिए काफी कुछ मदद मौजूद रहती है। भुवनेश्वर कुमार अपनी बेहतरीन स्विंग और सीम मूवमेंट हासिल करने की विशेष क्षमता के लिए पूरी दुनिया में जाने जाते हैं, जो किसी भी विरोधी टीम के बल्लेबाजों के लिए सिरदर्द साबित हो सकती है।
न्यूजीलैंड के खिलाफ इस अहम सीरीज से ठीक पहले भारतीय टीम के कप्तान श्रेयस अय्यर ने भुवनेश्वर कुमार की वापसी को लेकर एक बहुत बड़ा और विस्तृत बयान दिया है। प्रतिष्ठित न्यूज एजेंसी पीटीआई के हवाले से बात करते हुए कप्तान श्रेयस अय्यर ने बताया कि आईपीएल यानी इंडियन प्रीमियर लीग के समाप्त होने के बाद से भारतीय गेंदबाजी आक्रमण में कई नए और युवा चेहरों को शामिल किया गया था। युवा खिलाड़ियों के आने से टीम में ऊर्जा तो आई थी, लेकिन मैदान पर अंतरराष्ट्रीय अनुभव की भारी कमी साफ तौर पर नजर आ रही थी। कप्तान अय्यर का मानना है कि भुवनेश्वर कुमार का यह कमबैक इसलिए भी बेहद खास और ऐतिहासिक है क्योंकि उनके पास अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के साथ-साथ आईपीएल का भी लंबा और समृद्ध अनुभव मौजूद है, जो इन युवा गेंदबाजों को सही दिशा में गाइड करने और मैच के मुश्किल समय में आने वाले दबाव को आसानी से संभालने के लिए बेहद जरूरी साबित होने वाला है। अय्यर ने आगे विस्तार से यह भी बताया कि भुवी को इस बात की बेहद अच्छी तरह से जानकारी है कि आधुनिक टी20 फॉर्मेट में विपक्षी टीम के बल्लेबाजों पर दबाव कैसे बनाया जाता है और मैदान पर अपना दबदबा कैसे कायम रखा जाता है।
विश्लेषण करने पर यह बात साफ सामने आती है कि जब भारतीय टीम में जसप्रीत बुमराह जैसे दुनिया के बड़े और मैच विनर गेंदबाज मौजूद नहीं होते हैं, तो भारत की टी20 गेंदबाजी थोड़ी कमजोर और अनुभवहीन नजर आने लगती है। मयंक यादव, प्रिंस यादव और गुरनूर बराड़ जैसे युवा तेज गेंदबाजों को अक्सर आधुनिक समय की सपाट पिचों पर रन गति को रोकने में काफी भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। विरोधी बल्लेबाज ऐसी सपाट पिचों पर इन युवा गेंदबाजों के खिलाफ खुलकर रन बनाते हैं, जिससे टीम पर अतिरिक्त दबाव बन जाता है और ऐसे नाजुक समय में भुवनेश्वर कुमार का विशाल अनुभव टीम इंडिया के लिए एक बड़े वरदान के रूप में साबित हो सकता है। उनके आने से कप्तान को डेथ ओवर्स और शुरुआती ओवरों में गेंदबाजी में विविधता लाने का पूरा मौका मिलेगा।
आंकड़ों के लिहाज से देखा जाए तो भुवनेश्वर कुमार ने भारत के लिए अब तक खेले गए अट्ठासी टी20 अंतरराष्ट्रीय मैचों में शानदार प्रदर्शन करते हुए कुल नब्बे विकेट अपने नाम किए हैं। टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में नब्बे विकेट लेना इस बात का प्रमाण है कि इस गेंदबाज की क्षमता अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कितनी घातक है। भुवी नई गेंद से गेंद को दोनों तरफ स्विंग कराने और अपनी सटीक सीम मूवमेंट से दुनिया के बेहतरीन बल्लेबाजों को लगातार परेशान करने में पूरी तरह माहिर माने जाते हैं। इसके साथ ही उन्होंने पिछले कुछ आईपीएल सत्रों में डेथ ओवर्स यानी पारी के अंतिम ओवरों में भी बेहद किफायती और बेहतरीन गेंदबाजी का नमूना पेश किया है। उनके पास मौजूद लंबा अंतरराष्ट्रीय और घरेलू अनुभव मैच के सबसे तनाव भरे और निर्णायक पलों में पूरी टीम को मानसिक रूप से संभालेगा। भुवनेश्वर कुमार की सबसे बड़ी और खास खूबी यह है कि वे पारी के शुरुआती ओवरों में रनों की गति पर पूरी तरह लगाम लगाते हैं और मैदान पर क्रीज पर टिके बल्लेबाजों को बड़ी गलती करने के लिए मजबूर कर देते हैं, जिससे विरोधी टीम बैकफुट पर आ जाती है।
