अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इजराइल के लोगों से एक बार फिर प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को चुनने की अपील की है। ट्रंप ने अपने आधिकारिक रुख में स्पष्ट किया है कि दोनों नेताओं को मिलकर ईरान के खिलाफ शुरू की गई जंग को पूरी तरह से खत्म करना है। उनका यह महत्वपूर्ण बयान ऐसे समय में सामने आया है जब इजराइल में 27 अक्टूबर को चुनाव होने जा रहे हैं और यह चुनाव से ठीक दो दिन पहले की बात है। इस राजनीतिक हलचल के बीच, चुनाव से कुछ ही घंटे पहले प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने सोशल मीडिया पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई से बनी एक बेहद विवादास्पद और सनसनीखेज तस्वीर साझा की थी। इस तस्वीर में तेल अवीव शहर पर एक परमाणु विस्फोट को दर्शाया गया था, जिसने पूरे क्षेत्र में राजनीतिक सरगर्मी को और अधिक तेज कर दिया है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर एक हफ्ते पहले प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के समर्थन में लिखी गई अपनी ही एक पुरानी पोस्ट को दोबारा साझा किया। इस पोस्ट के माध्यम से ट्रंप ने यह रेखांकित करने का प्रयास किया कि उनके और नेतन्याहू के बीच बेहद मजबूत और अच्छे संबंध हैं। उन्होंने याद दिलाया कि दोनों नेताओं ने मिलकर अतीत में कई बड़े और सफल सैन्य अभियानों को अंजाम दिया है और अपनी इस बात को पुख्ता करने के लिए ट्रंप ने वेनेजुएला में की गई अमेरिकी सैन्य कार्रवाई, ऑपरेशन मिडनाइट हैमर और ऑपरेशन एपिक फ्यूरी का विशेष तौर पर जिक्र किया। उन्होंने बड़ा दावा करते हुए कहा कि इन सभी सैन्य कार्रवाइयों के परिणामस्वरूप ईरान की नेवी और एयरफोर्स पूरी तरह से खत्म हो चुकी हैं और ट्रंप के अनुसार, इन अभियानों की वजह से ईरान की कुल सेना और उसकी अर्थव्यवस्था को भी बहुत भारी नुकसान का सामना करना पड़ा है और मौजूदा समय में वहां महंगाई दर बढ़कर 301 प्रतिशत तक पहुंच गई है।
दूसरी ओर, प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने चुनाव प्रचार के दौरान रविवार को एआई से बनी उस तस्वीर को सार्वजनिक किया जिसमें तेल अवीव पर परमाणु विस्फोट दिखाया गया था। इसके साथ ही उन्होंने देश की जनता को कड़ी चेतावनी दी कि अगर इजराइल के लोग उन्हें चुनाव में नहीं चुनते हैं, तो देश के सामने यहूदियों के बड़े नरसंहार यानी दूसरे होलोकॉस्ट का बहुत बड़ा खतरा पैदा हो सकता है। नेतन्याहू ने यह भी तर्क दिया कि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के कार्यकाल के दौरान ही ईरान के खिलाफ कड़े कदम उठाने और कार्रवाई करने का सीमित समय बचा हुआ है और हालांकि, यह भी ध्यान देने योग्य है कि नेतन्याहू पहले ही यह दावा कर चुके हैं कि अमेरिका और इजराइल ने मिलकर ईरान के परमाणु कार्यक्रम को भारी नुकसान पहुंचाया है। इस पूरे घटनाक्रम के बीच इजराइल के सेना प्रमुख इयाल जमीर और प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच भी अंदरखाने तनाव की खबरें सामने आ रही हैं और इजराइल के चैनल 12 के मुताबिक, सेना प्रमुख इयाल जमीर ने चुनाव से ठीक पहले किसी भी संभावित सैन्य कार्रवाई के आदेश पर और अधिक गहराई से चर्चा करने की मांग की है। साथ ही उन्होंने इस कार्रवाई से जुड़े कानूनी मंजूरी के लिखित दस्तावेजों की भी मांग की है, हालांकि इस संभावित सैन्य कार्रवाई के बारे में अभी तक पूरी और स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक सामने नहीं आई है। इन तमाम राजनीतिक और सामरिक उठापटक के बीच ट्रंप ने इजराइल की आम जनता से अपील की है कि वे नेतन्याहू को एक मजबूत और सक्षम प्रधानमंत्री के रूप में देखें और उन्हें ही अपना बहुमूल्य वोट दें।
इस पूरे संघर्ष और भू-राजनीतिक तनाव की शुरुआत ठीक 8 महीने पहले हुई थी, जब इजराइल और अमेरिका ने मिलकर 28 फरवरी को ईरान के खिलाफ एक जॉइंट ऑपरेशन की शुरुआत की थी। इस भीषण युद्ध के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें काफी बढ़ गई हैं, जिसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ा है और इसके अलावा, आगामी महीने में होने वाले अमेरिकी मिडटर्म इलेक्शन से ठीक पहले ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी का समर्थन घटने की खबरें भी मीडिया में लगातार सामने आई हैं। हालांकि इस संकट के बीच कूटनीतिक प्रयास भी जारी रहे, जिसके तहत इसी साल जून के महीने में अमेरिका और ईरान के बीच इस युद्ध को पूरी तरह से खत्म करने के लिए एक समझौते की दिशा में महत्वपूर्ण सहमति बनती नजर आई थी, लेकिन दोनों पक्षों की ओर से एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगाए जाने के बाद वह बातचीत बीच में ही टूट गई थी। अब एक बार फिर से ईरान इस दिशा में आगे बढ़कर बातचीत करना चाहता है। इसी सिलसिले में ताजा घटनाक्रम के तहत रविवार को कतर के मध्यस्थ दोनों देशों के बीच तनाव को कम करने की गंभीर कोशिश के तहत राजधानी तेहरान पहुंचे हैं और स्थिति को संभालने का प्रयास कर रहे हैं।
