टी20 वर्ल्ड कप 2026 में भारतीय टीम की ऐतिहासिक जीत के बाद मुख्य कोच गौतम गंभीर ने अपनी कोचिंग यात्रा और व्यक्तिगत दर्शन पर महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। एक हालिया साक्षात्कार में गंभीर ने स्पष्ट किया कि एक कोच के रूप में उनसे भी गलतियां हो सकती हैं और उन्हें भी अन्य मनुष्यों की तरह गलती करने का अधिकार है। गंभीर के अनुसार पिछले 18 महीनों के दौरान उन्होंने कई ऐसे निर्णय लिए जो चुनौतीपूर्ण थे और उनमें से कुछ गलत भी साबित हुए। हालांकि उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि उनके सभी निर्णयों के पीछे टीम की भलाई का नेक इरादा था। भारतीय टीम ने गंभीर के मार्गदर्शन में लगातार दूसरी बार टी20 वर्ल्ड कप का खिताब जीतकर अपनी बादशाहत कायम की है।
ईमानदारी और मानवीय भूलों पर गंभीर का दृष्टिकोण
गौतम गंभीर ने REVZSPORTZ के साथ बातचीत में अपनी कार्यशैली का बचाव करते हुए कहा कि वह ड्रेसिंग रूम में हर खिलाड़ी के साथ पूरी तरह ईमानदार रहते हैं। गंभीर के अनुसार वह खिलाड़ियों की आंखों में आंखें डालकर बात करने में विश्वास रखते हैं चाहे वह अच्छी खबर हो या बुरी और उन्होंने स्वीकार किया कि पिछले 18 महीनों में उनसे कई गलतियां हुई हैं लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि यदि इरादा सही हो तो गलतियां स्वीकार्य होनी चाहिए। गंभीर ने स्पष्ट किया कि वह अपने कार्यकाल के शेष समय में भी इसी ईमानदारी और पारदर्शिता के साथ काम करना जारी रखेंगे। उनके लिए ड्रेसिंग रूम का माहौल और खिलाड़ियों का भरोसा सबसे महत्वपूर्ण है।
खराब दौर में खिलाड़ियों का अटूट समर्थन
कोच के रूप में गंभीर की सबसे बड़ी खूबी खिलाड़ियों का समर्थन करना रही है। टी20 वर्ल्ड कप 2026 के दौरान जब अभिषेक शर्मा खराब फॉर्म से जूझ रहे थे तब गंभीर ने उन पर अपना भरोसा कम नहीं होने दिया। इसी तरह सूर्यकुमार यादव के फॉर्म को लेकर उठ रहे सवालों के बीच भी गंभीर उनके साथ खड़े रहे। गंभीर का मानना है कि केवल 3-4 मैचों के प्रदर्शन के आधार पर किसी खिलाड़ी की क्षमता पर संदेह करना गलत है। उन्होंने कहा कि एक कोच का काम खिलाड़ी को असुरक्षा की भावना से बाहर निकालना और उसे अपनी स्वाभाविक शैली में खेलने के लिए प्रेरित करना है।
संजू सैमसन और अभिषेक शर्मा पर रणनीतिक भरोसा
गौतम गंभीर ने टूर्नामेंट के दौरान कुछ कड़े फैसले लिए जिनमें संजू सैमसन को ईशान किशन की जगह अभिषेक शर्मा के साथ ओपनिंग कराना शामिल था। यह फैसला शुरुआत में आलोचनाओं के घेरे में रहा लेकिन संजू सैमसन ने अपनी बल्लेबाजी से सभी को प्रभावित किया और अंततः वह टी20 वर्ल्ड कप के 'प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट' बने। गंभीर ने बताया कि उन्होंने संजू की प्रतिभा को पहचाना और उन्हें वह मंच दिया जिसकी उन्हें आवश्यकता थी। अभिषेक शर्मा के संदर्भ में भी गंभीर ने कहा कि वह कभी भी 'आउट ऑफ फॉर्म' नहीं थे बल्कि केवल रन नहीं बना पा रहे थे।
'आउट ऑफ फॉर्म' और 'आउट ऑफ रन' का अंतर
गौतम गंभीर ने क्रिकेट की तकनीकी बारीकियों पर चर्चा करते हुए 'आउट ऑफ फॉर्म' और 'आउट ऑफ रन' के बीच एक स्पष्ट रेखा खींची। उनके अनुसार कई बार खिलाड़ी अच्छी लय में होता है और गेंद को अच्छी तरह हिट कर रहा होता है लेकिन वह बड़े स्कोर में तब्दील नहीं हो पाता। इसे 'आउट ऑफ रन' कहा जाना चाहिए न कि 'आउट ऑफ फॉर्म'। गंभीर ने कहा कि अभिषेक शर्मा जैसे खिलाड़ी इसी श्रेणी में थे और उन्होंने तर्क दिया कि जब कोई खिलाड़ी वास्तव में फॉर्म से बाहर होता है तो उसकी तकनीक और फुटवर्क में समस्या दिखती है जो इन खिलाड़ियों के मामले में नहीं थी।
अगला लक्ष्य: लॉस एंजेलिस ओलंपिक 2028 में स्वर्ण पदक
टी20 वर्ल्ड कप में सफलता हासिल करने के बाद अब गौतम गंभीर की नजरें भविष्य की बड़ी चुनौतियों पर हैं। उन्होंने अपनी इच्छा व्यक्त करते हुए कहा कि वह ओलंपिक का हिस्सा बनना चाहते हैं और लॉस एंजेलिस ओलंपिक 2028 में क्रिकेट को शामिल किया गया है और गंभीर का मानना है कि ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व करना किसी भी खिलाड़ी या कोच के लिए गर्व का क्षण होगा। उन्होंने कहा कि भारतीय टीम ओलंपिक में स्वर्ण पदक की प्रबल दावेदार होगी और वह इस ऐतिहासिक यात्रा का हिस्सा बनने के लिए उत्सुक हैं। गंभीर के अनुसार ओलंपिक पदक जीतना भारतीय क्रिकेट के लिए एक नया मील का पत्थर साबित होगा।
