बिना एथेनॉल वाले पेट्रोल की नहीं होगी वापसी सरकार ने संसद में दी बड़ी जानकारी

भारत सरकार ने संसद में स्पष्ट कर दिया है कि देश में अब बिना एथेनॉल वाले पेट्रोल (E0) की वापसी का कोई प्रस्ताव नहीं है। भारत ने 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य समय से पांच साल पहले ही हासिल कर लिया है, जिससे अर्थव्यवस्था और पर्यावरण को बड़ा लाभ हुआ है।

भारत सरकार ने देश में ईंधन के मानकों को लेकर अपनी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट कर दी है और संसद में दिए गए एक महत्वपूर्ण जवाब में केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने साफ किया कि अब देश में बिना एथेनॉल वाले पेट्रोल यानी E0 की वापसी नहीं होगी। सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल का मिश्रण जिसे E20 कहा जाता है, एक सुरक्षित, स्वच्छ और तकनीकी रूप से उन्नत ईंधन है। सरकार का मानना है कि देश को एक श्रेष्ठ और बेहतर तकनीक की ओर आगे बढ़ना चाहिए, न कि किसी पुराने या घटिया मानक की ओर वापस लौटना चाहिए। सरकार ने संसद में यह भी बताया कि E0 या E10 पेट्रोल पर फिर से लौटने का फिलहाल कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है।

निर्धारित समय से पांच साल पहले हासिल किया लक्ष्य

भारत ने ऊर्जा के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य अपने निर्धारित समय से पांच साल पहले ही प्राप्त कर लिया है। संसद में पेश किए गए आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2022-23 में औसत एथेनॉल मिश्रण लगभग 12 प्रतिशत था। इसके बाद वर्ष 2023-24 में यह बढ़कर लगभग 14 दशमलव 6 प्रतिशत हो गया। वर्ष 2024-25 में यह आंकड़ा 19 दशमलव 2 प्रतिशत तक पहुंच गया और अंततः वर्ष 2025-26 के नवंबर से जून की अवधि के दौरान भारत ने 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य सफलतापूर्वक हासिल कर लिया। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि फिलहाल 20 प्रतिशत से अधिक ब्लेंडिंग करने का कोई नया फैसला नहीं लिया गया है। वहीं, फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों के लिए विशेष रूप से तैयार किया गया E85 ईंधन, जिसमें 85 प्रतिशत एथेनॉल होता है, केवल उन्हीं वाहनों के लिए प्रमाणित है और इसे सामान्य पेट्रोल की आपूर्ति में शामिल नहीं किया गया है।

इंजन की सुरक्षा पर सरकार का स्पष्टीकरण

सोशल मीडिया और विभिन्न मीडिया माध्यमों में एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल से इंजन खराब होने या माइलेज कम होने की जो खबरें चल रही थीं, सरकार ने उन्हें पूरी तरह से खारिज कर दिया है। सरकार ने बताया कि नीति आयोग, आईओसीएल (IOCL), एआरएआई (ARAI), आईआईपी (IIP) और सियाम (SIAM) जैसी प्रतिष्ठित संस्थाओं द्वारा व्यापक प्रयोगशाला परीक्षण और फील्ड सत्यापन किए गए हैं और इन परीक्षणों और वास्तविक इस्तेमाल के आंकड़ों से यह साबित हो चुका है कि E20 ईंधन से वाहनों या उनके इंजनों को कोई असामान्य नुकसान या घिसावट नहीं होती है। देश के एक प्रमुख पैसेंजर वाहन निर्माता के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया गया कि वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान कंपनी ने 2 करोड़ 84 लाख वाहनों की सर्विसिंग की। इनमें से लगभग 1 करोड़ 50 लाख वाहन पुराने थे जो E20 प्रमाणित नहीं थे, लेकिन इसके बावजूद एथेनॉल के कारण इंजन खराब होने की एक भी शिकायत सामने नहीं आई। वर्तमान में देश की सड़कों पर 20 करोड़ से अधिक दोपहिया वाहन और 3 करोड़ से अधिक पेट्रोल कारें E15+ और E20 ब्लेंड पर बिना किसी तकनीकी खराबी के चल रही हैं।

माइलेज और वाहन के प्रदर्शन पर प्रभाव

वाहन के माइलेज को लेकर सरकार ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि ईंधन दक्षता कई अलग-अलग कारकों पर निर्भर करती है, जैसे कि चालक की ड्राइविंग की आदतें, वाहन का रखरखाव और सड़क की स्थिति। सरकार ने स्वीकार किया कि पुराने E10 डिजाइन वाले वाहनों में E20 ईंधन के इस्तेमाल से माइलेज में अधिकतम 3 से 5 प्रतिशत की मामूली कमी देखी जा सकती है। हालांकि, इसके साथ ही एक बड़ा फायदा यह भी है कि E20 ईंधन का ऑक्टेन नंबर अधिक होता है। अधिक ऑक्टेन रेटिंग होने के कारण वाहन का पिक-अप यानी एक्सीलरेशन बेहतर होता है, राइड क्वालिटी में सुधार आता है और इंजन का कुल प्रदर्शन भी पहले से बेहतर हो जाता है।

देश की अर्थव्यवस्था और किसानों को मिला बड़ा लाभ

एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम ने देश को आर्थिक और पर्यावरणीय रूप से बहुत मजबूत बनाया है। सरकार द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, इस पहल से अब तक 1 लाख 97 हजार करोड़ रुपये से अधिक की विदेशी मुद्रा की बचत की गई है। कच्चे तेल के आयात में लगभग 316 लाख मीट्रिक टन की कटौती हुई है, जिससे विदेशी निर्भरता कम हुई है। पर्यावरण के मोर्चे पर भी बड़ी सफलता मिली है और लगभग 952 लाख मीट्रिक टन कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) उत्सर्जन को कम करने में मदद मिली है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस कार्यक्रम से देश के अन्नदाताओं को सीधा लाभ हुआ है। भारत के किसानों को एथेनॉल उत्पादन के बदले अब तक 1 लाख 66 हजार करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया जा चुका है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ है।

उपभोक्ताओं के लिए शिकायत निवारण तंत्र

उपभोक्ताओं की सुविधा और E20 ईंधन से जुड़ी किसी भी समस्या के समाधान के लिए सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों (OMCs) ने एक मजबूत व्यवस्था तैयार की है। यदि किसी उपभोक्ता को कोई शिकायत या सुझाव देना है, तो वह पेट्रोल पंपों पर उपलब्ध शिकायत पुस्तिका का उपयोग कर सकता है। इसके अलावा, टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर, कंपनियों की आधिकारिक वेबसाइट, मोबाइल ऐप और सोशल मीडिया के माध्यम से भी अपनी बात रखी जा सकती है। सरकार ने यह भी बताया कि उपभोक्ता CPGRAMS पोर्टल का उपयोग करके भी अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं, जिनका एक निश्चित समय सीमा के भीतर समाधान सुनिश्चित किया जाता है।