पेट्रोल डीजल की कीमतों पर हरदीप सिंह पुरी का बड़ा बयान, कटौती पर दी सफाई

केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कटौती की संभावनाओं पर स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने कहा कि भारत ने वैश्विक संकट के दौरान कीमतें नहीं बढ़ाई थीं, इसलिए अब बड़ी कटौती की उम्मीद करना उचित नहीं है।

केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों को लेकर उठ रहे विभिन्न सवालों और चिंताओं पर अपनी विस्तृत प्रतिक्रिया दी है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में हालिया गिरावट के बाद, आम जनता और विभिन्न हलकों में यह उम्मीद की जा रही थी कि भारत में भी ईंधन के दामों में बड़ी कटौती की जाएगी। इस पर मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों के कम होने का फायदा तुरंत उपभोक्ताओं तक नहीं पहुंचता है। उन्होंने समझाया कि वैश्विक बाजार में कच्चे तेल के दाम गिरने और भारत में तेल कंपनियों की लागत में इसका असर दिखने के बीच एक निश्चित समय अंतराल होता है। मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि तेल की खरीद, उसका परिवहन, रिफाइनिंग यानी शोधन की प्रक्रिया और फिर देश भर में उसका वितरण एक लंबी प्रक्रिया है जिसमें समय लगता है। इसी कारण से वैश्विक कीमतों में होने वाली किसी भी कमी का लाभ भारतीय उपभोक्ताओं तक पहुंचने में कुछ समय लग सकता है।

वैश्विक संकट और भारत की स्थिति

हरदीप सिंह पुरी ने बताया कि होर्मुज संकट और अन्य वैश्विक परिस्थितियों के दौरान दुनिया के कई विकसित देशों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 20 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई थी। भारत के पड़ोसी देशों की स्थिति और भी खराब थी, जहां पाकिस्तान, श्रीलंका, नेपाल और बांग्लादेश जैसे देशों में ईंधन के दाम औसतन 35 प्रतिशत तक बढ़ा दिए गए थे। इन वैश्विक परिस्थितियों के बावजूद, भारत में कीमतों में केवल 5 प्रतिशत के आसपास की बढ़ोतरी की गई थी। मंत्री ने तर्क दिया कि चूंकि भारत ने कीमतों को उस स्तर तक बढ़ने ही नहीं दिया था, इसलिए अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दाम कम होने पर बहुत बड़ी कटौती की उम्मीद करना तर्कसंगत नहीं है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जब कीमत बढ़ी ही नहीं, तो अब बड़ी कटौती की बात क्यों की जा रही है।

कच्चे तेल की कीमतों का गणित

मंत्री ने उन तर्कों का भी जवाब दिया जिनमें कहा जा रहा है कि कच्चे तेल की कीमत 128 डॉलर प्रति बैरल से घटकर अब करीब 70 डॉलर पर आ गई है, इसलिए पेट्रोल-डीजल भी सस्ता होना चाहिए। इस पर उन्होंने कहा कि इस तरह की तुलना पूरी तस्वीर पेश नहीं करती है और उन्होंने समझाया कि जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें अपने चरम पर थीं, तब भारत सरकार ने आम उपभोक्ताओं पर इसका बोझ नहीं पड़ने दिया था। सरकार और तेल कंपनियों ने उस दौरान कीमतों को स्थिर रखकर जनता को राहत दी थी। अब जब कीमतें कम हुई हैं, तो उसे उस समय के नुकसान और स्थिरता के संदर्भ में देखा जाना चाहिए। मंत्री ने कहा कि भारत की रणनीति हमेशा से उपभोक्ताओं को वैश्विक बाजार की अत्यधिक अस्थिरता से बचाने की रही है, और इसी कारण भारत में कीमतों में वह उछाल नहीं देखा गया जो दुनिया के अन्य हिस्सों में दिखा था।

भविष्य की संभावनाएं और समय सीमा

हरदीप सिंह पुरी ने स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट का असर भारतीय बाजार में तुरंत दिखाई नहीं देता क्योंकि तेल खरीद से लेकर वितरण तक की पूरी प्रक्रिया में समय लगता है। हालांकि, उन्होंने भविष्य के लिए एक संभावना की ओर इशारा जरूर किया। उन्होंने कहा कि अगर अगले 2 से 3 महीने तक अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें स्थिर रहती हैं और कम बनी रहती हैं, तो आगे कीमतों में राहत देने की संभावना पर विचार किया जा सकता है। उन्होंने यह भी साफ किया कि फिलहाल इस बारे में कोई भी निश्चित घोषणा करना जल्दबाजी होगी और यह पूरी तरह से अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थितियों और संभावनाओं पर आधारित चर्चा है। सरकार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और भविष्य का कोई भी फैसला बाजार की स्थिरता पर निर्भर करेगा।