इथेनॉल न होता तो 125 रुपये लीटर बिकता पेट्रोल, सरकार ने संसद में बताया गणित

सरकार ने संसद में बताया कि इथेनॉल ब्लेंडिंग न होने पर पेट्रोल 125 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच सकता था। वर्तमान में 23 करोड़ से अधिक वाहन सुरक्षित रूप से इस ईंधन का उपयोग कर रहे हैं, जिससे विदेशी मुद्रा की बचत और किसानों को लाभ हो रहा है।

केंद्र सरकार ने संसद में पेट्रोल की कीमतों पर इथेनॉल ब्लेंडिंग के प्रभाव को लेकर एक विस्तृत स्पष्टीकरण दिया है। लोकसभा के एक सत्र के दौरान, सरकार ने स्पष्ट किया कि कैसे इथेनॉल सम्मिश्रण नीति ने वैश्विक ईंधन लागत में वृद्धि के खिलाफ एक सुरक्षा कवच के रूप में काम किया है। यह बताया गया कि यदि पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने की नीति लागू नहीं की गई होती, तो मिडिल ईस्ट संकट के चरम के दौरान पेट्रोल की खुदरा कीमत 125 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच सकती थी। यह खुलासा अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अस्थिरता के बीच घरेलू ईंधन की कीमतों में स्थिरता बनाए रखने में इथेनॉल कार्यक्रम के रणनीतिक महत्व को रेखांकित करता है।

ईंधन की कीमतों का गणितीय विश्लेषण

लोकसभा में पूछे गए एक सवाल के लिखित जवाब में पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने ईंधन के मूल्य निर्धारण के पीछे के जटिल गणित को समझाया और उन्होंने बताया कि मिडिल ईस्ट संकट के दौरान, जब कच्चे तेल की कीमत लगभग 135 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी, तब भारत में पेट्रोल की घरेलू कीमत 125 रुपये प्रति लीटर तक पहुंचने का खतरा था। हालांकि, सरकार की सक्रिय इथेनॉल ब्लेंडिंग नीति, कच्चे तेल की उपलब्धता और तेल विपणन कंपनियों द्वारा अपनाई गई रणनीतिक खरीद विधियों के कारण, सरकार उपभोक्ताओं को लगभग 94 रुपये 77 पैसे प्रति लीटर की दर से पेट्रोल उपलब्ध कराने में सक्षम रही। यह महत्वपूर्ण अंतर ईंधन आपूर्ति श्रृंखला में इथेनॉल के एकीकरण के माध्यम से आम आदमी को दी गई सीधी वित्तीय राहत को प्रदर्शित करता है।

E20 ईंधन की सुरक्षा और प्रदर्शन

मिश्रित ईंधन के तकनीकी प्रभाव के संबंध में चिंताओं को दूर करते हुए, सरकार ने स्पष्ट किया कि इस बात का कोई प्रमाण नहीं है कि E20 पेट्रोल पुराने या नए वाहनों के इंजन को नुकसान पहुंचाता है। E20 ईंधन के कार्यान्वयन से पहले, कई प्रमुख संगठनों के सहयोग से व्यापक और कठोर परीक्षण किए गए थे। इनमें ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI), सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (SIAM), इंडियन ऑयल और विभिन्न वाहन निर्माता शामिल थे। इन व्यापक परीक्षणों के परिणामों ने पुष्टि की कि इंजन की क्षमता, समग्र प्रदर्शन या इंजन के पुर्जों के जीवनकाल पर कोई बड़ा नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता है। सरकार ने इस बात पर जोर दिया कि E20 में परिवर्तन को उपभोक्ता विश्वास सुनिश्चित करने के लिए वैज्ञानिक सत्यापन का समर्थन प्राप्त है।

पूरे भारत में व्यापक उपयोग

भारत में इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल के उपयोग का पैमाना बहुत बड़ा है, जिसमें लाखों वाहन पहले से ही कई वर्षों से इस ईंधन पर चल रहे हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, देश भर में वर्तमान में 20 करोड़ से अधिक दोपहिया वाहन और 3 करोड़ से अधिक पेट्रोल से चलने वाली कारें इथेनॉल मिश्रित ईंधन पर चल रही हैं। इतने बड़े पैमाने पर उपयोग के बावजूद, इंजन खराब होने, जंग लगने या वाहन के पुर्जों के समय से पहले घिसने के संबंध में कोई व्यापक रिपोर्ट या शिकायत सामने नहीं आई है। यह ट्रैक रिकॉर्ड भारत में मौजूदा ऑटोमोटिव इकोसिस्टम के साथ मिश्रित ईंधन की अनुकूलता के प्रमाण के रूप में कार्य करता है।

आर्थिक लाभ और किसानों के लिए समर्थन

पेट्रोल की कीमतों को नियंत्रित करने के अलावा, इथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था और कृषि क्षेत्र को बहुआयामी लाभ प्रदान करता है। सरकार ने कहा कि तेल कंपनियां न केवल पर्याप्त ईंधन आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए बल्कि कृषि समुदाय को महत्वपूर्ण सहायता प्रदान करने के लिए भी इथेनॉल की खरीद करती हैं और फसलों से इथेनॉल प्राप्त करके, यह नीति किसानों की आय बढ़ाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में मदद करती है। इसके अलावा, यह कार्यक्रम विदेशी मुद्रा पर भारत के खर्च को कम करने और कच्चे तेल के आयात पर देश की भारी निर्भरता को घटाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। सरकार का मानना है कि इथेनॉल ब्लेंडिंग पहल भारत की ऊर्जा सुरक्षा रणनीति का आधार बनी रहेगी और साथ ही कृषि आबादी को सशक्त बनाएगी।