होर्मुज जलडमरूमध्य: ट्रंप की ईरान को चेतावनी, 10 बारूदी नौकाएं कीं नष्ट

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को होर्मुज जलडमरूमध्य में बारूदी सुरंगें बिछाने पर गंभीर सैन्य कार्रवाई की चेतावनी दी है। अमेरिकी सेना ने ईरान की 10 बारूदी नौकाओं को नष्ट कर दिया है। व्हाइट हाउस ने ईरान में जमीनी सेना भेजने के विकल्प को भी खारिज नहीं किया है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर उसने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में बारूदी सुरंगें बिछाने का प्रयास किया, तो उसे अभूतपूर्व सैन्य परिणामों का सामना करना पड़ेगा और ट्रंप ने स्पष्ट किया कि यदि ईरान ने इस रणनीतिक समुद्री मार्ग में कोई भी सुरंग बिछाई है, तो उन्हें तुरंत हटाया जाना चाहिए। इस चेतावनी के कुछ ही समय बाद, अमेरिकी राष्ट्रपति ने घोषणा की कि अमेरिकी सेना ने ईरान की 10 निष्क्रिय बारूदी सुरंग बिछाने वाली नौकाओं को सफलतापूर्वक निशाना बनाकर नष्ट कर दिया है। यह घटनाक्रम पश्चिम एशिया में जारी व्यापक संघर्ष के बीच आया है, जिससे वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा पर संकट गहरा गया है।

ट्रंप की सोशल मीडिया पर सीधी चेतावनी

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर पोस्ट करते हुए ईरान को सीधे तौर पर संबोधित किया। उन्होंने कहा कि हालांकि वर्तमान में अमेरिका के पास ऐसी कोई पुख्ता रिपोर्ट नहीं है कि ईरान ने होर्मुज में सुरंगें बिछाई हैं, लेकिन यदि ऐसा किया गया है, तो उन्हें तत्काल हटाया जाना चाहिए। ट्रंप ने चेतावनी दी कि यदि इन सुरंगों को नहीं हटाया गया, तो ईरान को ऐसे गंभीर सैन्य परिणाम भुगतने होंगे जो उसने पहले कभी नहीं देखे होंगे। उन्होंने यह भी कहा कि अगर ईरान इन सुरंगों को हटाने का निर्णय लेता है, तो यह तनाव कम करने की दिशा में एक सकारात्मक कदम माना जाएगा।

ईरानी बारूदी नौकाओं पर अमेरिकी सैन्य कार्रवाई

अपनी पहली चेतावनी के कुछ समय बाद, राष्ट्रपति ट्रंप ने एक और अपडेट साझा किया जिसमें उन्होंने बताया कि अमेरिकी बलों ने ईरान के 10 जहाजों को नष्ट कर दिया है। ट्रंप के अनुसार, ये जहाज बारूदी सुरंगें बिछाने के लिए उपयोग किए जाने वाले थे और इन्हें निष्क्रिय अवस्था में ही निशाना बनाया गया और उन्होंने कहा कि आने वाले समय में ऐसे और भी जहाजों को नष्ट किया जा सकता है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने स्पष्ट किया कि होर्मुज जलडमरूमध्य में किसी भी प्रकार की बाधा उत्पन्न करने वाली गतिविधियों को रोकने के लिए अमेरिका उन उन्नत तकनीकों और मिसाइल क्षमताओं का उपयोग कर रहा है, जो आमतौर पर मादक पदार्थों के तस्करों के खिलाफ इस्तेमाल की जाती हैं।

यूएस सेंट्रल कमांड और व्हाइट हाउस का आधिकारिक रुख

अमेरिकी सेना के यूएस सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने इस सैन्य कार्रवाई की पुष्टि करते हुए एक वीडियो जारी किया है। कमांड के अनुसार, अमेरिकी सेनाएं अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में जहाजों को परेशान करने और नौवहन की स्वतंत्रता को बाधित करने की ईरानी शासन की क्षमता को कमजोर करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। अधिकारियों ने कहा कि ईरानी सेनाएं लंबे समय से उन जलक्षेत्रों के लिए खतरा बनी हुई हैं जो वैश्विक सुरक्षा और आर्थिक समृद्धि के लिए महत्वपूर्ण हैं। वहीं, व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लीविट ने एक प्रेस ब्रीफिंग में संकेत दिया कि अमेरिका ने ईरान में जमीनी स्तर पर सेना भेजने के विकल्प को पूरी तरह से खारिज नहीं किया है। उन्होंने बताया कि 'एपिक फ्यूरी' नामक सैन्य अभियान के उद्देश्यों की पूर्ति होने तक यह कार्रवाई जारी रह सकती है।

पश्चिम एशिया में बढ़ता सैन्य संघर्ष और क्षेत्रीय प्रभाव

यह तनावपूर्ण स्थिति ऐसे समय में उत्पन्न हुई है जब पूरे पश्चिम एशिया में सुरक्षा व्यवस्था अस्थिर बनी हुई है। रिपोर्टों के अनुसार, ईरान ने जवाबी कार्रवाई के रूप में मिसाइलों और ड्रोन के माध्यम से कई अमेरिकी सैन्य ठिकानों और ऊर्जा बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया है और ये हमले केवल इराक या सीरिया तक सीमित नहीं हैं, बल्कि संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, कतर, कुवैत, बहरीन और जॉर्डन जैसे पड़ोसी देशों में स्थित अमेरिकी हितों पर भी प्रभाव डाल रहे हैं। क्षेत्रीय सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच यह सीधा टकराव क्षेत्र में एक बड़े युद्ध की संभावना को बढ़ा रहा है, जिससे कई खाड़ी देश चिंता में हैं।

वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और होर्मुज का सामरिक महत्व

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल पारगमन मार्गों में से एक है। आंकड़ों के अनुसार, वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 20% हिस्सा इसी संकीर्ण जलमार्ग से होकर गुजरता है। यह मार्ग ओमान और ईरान के बीच स्थित है और फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है। यदि इस मार्ग में बारूदी सुरंगों या सैन्य संघर्ष के कारण बाधा उत्पन्न होती है, तो इसका सीधा असर वैश्विक तेल कीमतों और अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। अमेरिका का कहना है कि वह इस अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग को खुला रखने और सुरक्षित नौवहन सुनिश्चित करने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार है।