अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के बीच एक चौंकाने वाला वित्तीय आंकड़ा सामने आया है। तुर्की की अनादोलु एजेंसी और पेंटागन के शुरुआती अनुमानों के अनुसार, ईरान के खिलाफ सैन्य अभियानों में अमेरिका द्वारा इस्तेमाल किए गए गोला-बारूद की कीमत पाकिस्तान के कुल वार्षिक रक्षा बजट से भी अधिक हो गई है। 35 बिलियन डॉलर का गोला-बारूद खर्च किया है। यह राशि पाकिस्तान के 9 बिलियन डॉलर के कुल रक्षा बजट की तुलना में काफी अधिक है।
दैनिक खर्च और पेंटागन के आंकड़े
6 बिलियन डॉलर का गोला-बारूद इस्तेमाल किया। 8 बिलियन डॉलर (लगभग 23,000 करोड़ रुपये से अधिक) का गोला-बारूद दाग रहा है। 5 प्रतिशत हिस्सा केवल गोला-बारूद पर खर्च कर दिया है। इस भारी खर्च ने अमेरिकी संसद यानी कैपिटल हिल में हलचल पैदा कर दी है, जहां राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सैन्य नीति पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
सैन्य अभियानों का प्रभाव और कमांडरों की मौत
अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के शुरुआती दो दिनों में ही ईरान को बड़ा रणनीतिक नुकसान होने का दावा किया गया है। रिपोर्टों के अनुसार, इन हमलों में ईरान के सुप्रीम लीडर के करीबी 40 शीर्ष कमांडरों को मार गिराया गया है। अमेरिका लगातार ईरान पर हवाई और समुद्री मार्ग से हमले कर रहा है। अमेरिकी रक्षा विभाग के दावों के मुताबिक, अब तक ईरान के 9 युद्धपोतों को समुद्र में डुबो दिया गया है। तेहरान और उसके आसपास के क्षेत्रों में हवाई हमलों के जरिए व्यापक क्षति पहुंचाई गई है। इन हवाई हमलों में इजराइल द्वारा भी अमेरिकी सेना को सहयोग प्रदान किए जाने की खबरें हैं।
ईरान की जवाबी कार्रवाई और अमेरिकी नुकसान
दूसरी ओर, ईरान ने भी अमेरिकी हमलों का कड़ा जवाब दिया है और ईरान ने मध्य पूर्व में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाना शुरू कर दिया है। रिपोर्टों के अनुसार, ईरान ने कुवैत, कतर, बहरीन, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में स्थित अमेरिकी ठिकानों पर हवाई हमले किए हैं। इन जवाबी हमलों में अब तक 7 अमेरिकी सैनिकों के मारे जाने की पुष्टि हुई है। इसके अतिरिक्त, कुवैत में स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डे पर 3 एफ-15 लड़ाकू विमान नष्ट हो गए हैं। हालांकि, अमेरिकी अधिकारियों ने कुवैत में हुए इस नुकसान के लिए स्थानीय समन्वय की कमी को जिम्मेदार ठहराया है।
सीजफायर की संभावना और राजनीतिक दबाव
जंग के 10 दिन बीत जाने के बाद अब अमेरिका के भीतर से ही युद्ध रोकने का दबाव बढ़ने लगा है। वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सलाहकारों ने उन्हें युद्ध को और अधिक न खींचने की सलाह दी है और सलाहकारों का मानना है कि यदि युद्ध तत्काल नहीं रुकता है, तो अमेरिका को और अधिक वित्तीय और सामरिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। राष्ट्रपति ट्रंप ने भी हाल ही में एक बयान में संकेत दिया है कि जंग अब अपने अंतिम चरण में है और जल्द ही युद्धविराम की स्थिति बन सकती है। फिलहाल, अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें इस क्षेत्र में होने वाले अगले कूटनीतिक बदलावों पर टिकी हैं।
