अमेरिका का THAAD मिसाइल डिफेंस रडार हमलों में क्षतिग्रस्त, सुरक्षा चिंताएं बढ़ीं

मिडिल ईस्ट में हालिया हमलों के दौरान अमेरिका के अत्याधुनिक THAAD मिसाइल रक्षा प्रणाली के रडार नष्ट होने की खबरें आई हैं। ईरान के मिसाइल और ड्रोन हमलों ने इन महंगे सिस्टम की संवेदनशीलता को उजागर किया है। विशेषज्ञ अब भविष्य की सुरक्षा के लिए लेजर और उन्नत कैमोफ्लाज जैसी तकनीकों पर जोर दे रहे हैं।

अमेरिका की टर्मिनल हाई एल्टीट्यूड एरिया डिफेंस (THAAD) प्रणाली के महत्वपूर्ण रडार घटकों को मिडिल ईस्ट में हालिया संघर्षों के दौरान नुकसान पहुंचने की खबरें आई हैं। रक्षा विशेषज्ञों और सैटेलाइट इमेजरी के अनुसार, ईरान द्वारा किए गए बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन हमलों ने इस उच्च-तकनीकी सुरक्षा कवच की सीमाओं को चुनौती दी है। THAAD प्रणाली को दुनिया के सबसे प्रभावी मिसाइल रोधी तंत्रों में से एक माना जाता है, जिसका प्राथमिक कार्य आने वाली बैलिस्टिक मिसाइलों को उनके अंतिम चरण में नष्ट करना है। हालांकि, हालिया घटनाओं ने इन प्रणालियों की भौतिक सुरक्षा और उनकी रडार इकाइयों की संवेदनशीलता पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।

रडार प्रणालियों को पहुंचा व्यापक नुकसान

सैन्य रिपोर्टों और सैटेलाइट तस्वीरों के विश्लेषण के अनुसार, जॉर्डन में तैनात AN/TPY-2 रडार सिस्टम को हमलों के दौरान गंभीर क्षति पहुंची है। इसके अतिरिक्त, कतर में स्थित अमेरिका के AN/FPS-132 फेज्ड अरे रडार के भी प्रभावित होने की सूचना है। ये रडार प्रणालियां किसी भी मिसाइल रक्षा नेटवर्क की आंख और कान मानी जाती हैं, क्योंकि ये खतरों की पहचान करने, उन्हें ट्रैक करने और इंटरसेप्टर मिसाइलों को निर्देशित करने के लिए जिम्मेदार होती हैं। संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन, कुवैत और सऊदी अरब में भी कुछ रडार बुनियादी ढांचों को नुकसान पहुंचने की खबरें हैं। इन प्रणालियों के निष्क्रिय होने से संबंधित क्षेत्रों में हवाई निगरानी क्षमता काफी कम हो गई है, जिससे सुरक्षा अंतराल पैदा होने की आशंका है।

ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइलों का बढ़ता खतरा

युद्ध के बदलते स्वरूप में कम लागत वाले ड्रोन और सटीक बैलिस्टिक मिसाइलें बड़े रक्षा तंत्रों के लिए गंभीर चुनौती बन गई हैं और ईरान के शाहेद जैसे छोटे हमलावर ड्रोन, जो कम ऊंचाई पर और धीमी गति से उड़ते हैं, अक्सर पारंपरिक रडार प्रणालियों की पकड़ में नहीं आते। विशेषज्ञों के अनुसार, ये ड्रोन विस्फोटक ले जाने में सक्षम हैं और महंगे रक्षा उपकरणों को लंबे समय तक अनुपयोगी बना सकते हैं। मिडिल ईस्ट में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हुए हमलों में ड्रोन की भूमिका प्रमुख रही है। हालांकि अमेरिकी सैन्य कमांडरों के अनुसार, हाल के हफ्तों में बैलिस्टिक मिसाइल हमलों में 90% और ड्रोन हमलों में 83% की कमी दर्ज की गई है, लेकिन मौजूदा बुनियादी ढांचे को हुआ नुकसान अभी भी एक बड़ी चिंता का विषय बना हुआ है।

वित्तीय लागत और प्रतिस्थापन की चुनौतियां

THAAD जैसी प्रणालियों के रडार घटकों का नुकसान न केवल सामरिक बल्कि भारी वित्तीय बोझ भी डालता है। आधिकारिक आंकड़ों और रक्षा बजट रिपोर्टों के अनुसार, एक एकल रडार सिस्टम को बदलने की लागत लगभग $500 million (₹4200 crore) तक हो सकती है। इन प्रणालियों का निर्माण और तैनाती एक जटिल प्रक्रिया है, जिसमें लंबा समय लगता है। वर्तमान में अमेरिका ने मिडिल ईस्ट में पांच और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में दो THAAD सिस्टम तैनात किए हुए हैं। इन प्रणालियों की सीमित संख्या और उनके प्रतिस्थापन में लगने वाला समय अमेरिकी रक्षा विभाग के लिए एक बड़ी लॉजिस्टिक चुनौती पेश करता है, विशेष रूप से ऐसे समय में जब वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव बढ़ रहा है।

रक्षा प्रणालियों के आधुनिकीकरण की आवश्यकता

हालिया हमलों से मिले अनुभवों के आधार पर रक्षा विशेषज्ञ अब 'मल्टी-लेयर्ड' सुरक्षा रणनीति की आवश्यकता पर बल दे रहे हैं। इसमें केवल इंटरसेप्टर मिसाइलों पर निर्भर रहने के बजाय हाई-पावर लेजर (HPL), हाई-पावर माइक्रोवेव (HPM) और उन्नत इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणालियों का एकीकरण शामिल है। इजरायली रक्षा फर्म स्पेक्ट्रल-एक्स जैसी कंपनियां अब ऐसी तकनीकों पर काम कर रही हैं जो सैन्य उपकरणों को थर्मल, इन्फ्रारेड और रडार सेंसर से छिपाने में मदद कर सकें। उन्नत कैमोफ्लाज और सिग्नेचर रिडक्शन तकनीकें भविष्य के युद्धक्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन प्रणालियों को ड्रोन और मिसाइल हमलों के खिलाफ अधिक लचीला नहीं बनाया गया, तो भविष्य में चीन जैसे प्रतिस्पर्धियों के खिलाफ सैन्य और नागरिक ठिकानों की सुरक्षा करना कठिन हो सकता है।