ट्रंप ने बताया ऐसे होगा ईरान युद्ध खत्म… खामेनेई के बाद हिट लिस्ट में कौन?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ चल रहे संघर्ष पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि युद्ध की समाप्ति तभी संभव है जब ईरान की सैन्य शक्ति और उसके नेतृत्व को पूरी तरह हटा दिया जाए। उन्होंने ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन द्वारा पड़ोसी देशों से मांगी गई माफी को अमेरिकी दबाव का परिणाम बताया।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के संदर्भ में एक बड़ा बयान देते हुए कहा है कि तेहरान के साथ चल रहा संघर्ष तभी समाप्त हो सकता है जब देश की सैन्य क्षमता को पूरी तरह से नष्ट कर दिया जाए और उसके वर्तमान नेतृत्व को सत्ता से बेदखल कर दिया जाए। ट्रंप के अनुसार, ईरान की हार का एकमात्र तरीका उसके सैन्य ढांचे का पूर्ण खात्मा है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब मध्य पूर्व में तनाव अपने चरम पर है और इजराइल व ईरान के बीच सैन्य टकराव दूसरे सप्ताह में प्रवेश कर चुका है।

एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बातचीत के दौरान राष्ट्रपति ट्रंप ने स्पष्ट किया कि वर्तमान परिस्थितियों में उनकी तेहरान के साथ किसी भी प्रकार की कूटनीतिक वार्ता में कोई रुचि नहीं है। उन्होंने संकेत दिया कि चल रहे सैन्य अभियान का उद्देश्य ईरान की युद्ध लड़ने की क्षमता को इस स्तर तक कम करना है कि बातचीत की आवश्यकता ही समाप्त हो जाए और ट्रंप ने यह भी दावा किया कि यदि ईरान का सैन्य ढांचा और नेतृत्व समाप्त हो जाता है, तो युद्ध स्वतः ही अपने अंत की ओर बढ़ जाएगा।

सैन्य ढांचे के पूर्ण विनाश की आवश्यकता

राष्ट्रपति ट्रंप ने जोर देकर कहा कि ईरान की सैन्य शक्ति को खत्म करना क्षेत्रीय शांति के लिए अनिवार्य है। उन्होंने संवाददाताओं से कहा कि यदि ईरान के पास कोई कार्यशील सैन्य संरचना या प्रभावी नेतृत्व नहीं बचता है, तो युद्ध प्रभावी रूप से समाप्त माना जाएगा। ट्रंप ने एक कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि उन्हें नहीं लगता कि भविष्य में ऐसी स्थिति आएगी जब कोई यह कहने के लिए बचेगा कि वे आत्मसमर्पण कर रहे हैं। उनके अनुसार, चल रहा हवाई अभियान ईरान की रक्षात्मक और आक्रामक क्षमताओं को लक्षित कर रहा है, जिससे तेहरान की स्थिति कमजोर हुई है।

कूटनीतिक वार्ता पर ट्रंप का रुख

तेहरान के साथ संभावित बातचीत के सवाल पर ट्रंप ने स्पष्ट किया कि फिलहाल कूटनीति उनकी प्राथमिकता नहीं है। उन्होंने तर्क दिया कि जब तक सैन्य लक्ष्य प्राप्त नहीं हो जाते, तब तक बातचीत का कोई औचित्य नहीं है। ट्रंप का मानना है कि ईरान पर बढ़ता सैन्य दबाव ही उसे पीछे हटने पर मजबूर कर सकता है। अधिकारियों के अनुसार, अमेरिकी प्रशासन का ध्यान फिलहाल ईरान की उन संपत्तियों और कमांड सेंटरों को निष्क्रिय करने पर है जो क्षेत्रीय अस्थिरता का कारण बनते रहे हैं।

ईरानी राष्ट्रपति की माफी और अमेरिकी दबाव

ट्रंप ने ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन द्वारा पड़ोसी खाड़ी देशों से मांगी गई सार्वजनिक माफी पर भी प्रतिक्रिया दी। पेजेशकियन ने हाल ही में एक टेलीविजन संबोधन में पड़ोसी देशों से तेहरान की पिछली कार्रवाइयों के लिए माफी मांगी थी और वादा किया था कि जब तक ईरान पर हमला नहीं होता, तब तक वे किसी भी पड़ोसी देश पर मिसाइल नहीं दागेंगे। ट्रंप ने इस कदम को ईरान की कमजोरी का संकेत बताया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर लिखा कि यह माफी केवल अमेरिका और इजराइल द्वारा बनाए गए निरंतर सैन्य दबाव का परिणाम है।

क्षेत्रीय सुरक्षा समीकरणों में बदलाव

ईरान के भीतर एक 'अस्थायी नेतृत्व परिषद' के गठन और पड़ोसी देशों के प्रति नरम रुख को ट्रंप ने एक रणनीतिक हार के रूप में परिभाषित किया है। उन्होंने कहा कि तेहरान इस क्षेत्रीय संघर्ष में अपनी पकड़ खो चुका है। ट्रंप के अनुसार, पड़ोसी देशों को निशाना न बनाने का ईरान का वादा उसकी अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने की एक हताश कोशिश है। अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि ईरान की यह कूटनीतिक नरमी उसके सैन्य संसाधनों में आई कमी और नेतृत्व के भीतर बढ़ते डर को दर्शाती है।

मध्य पूर्व में जारी सैन्य अभियान की स्थिति

वर्तमान में इजराइल और ईरान के बीच हमलों का सिलसिला जारी है। ट्रंप ने संकेत दिया कि अमेरिका इस क्षेत्र में इजराइल के साथ समन्वय बनाए हुए है। उन्होंने कहा कि ईरान की सैन्य क्षमताओं को लक्षित करने वाले हवाई हमले तब तक जारी रह सकते हैं जब तक कि तेहरान की जवाबी कार्रवाई करने की शक्ति पूरी तरह समाप्त नहीं हो जाती। ट्रंप के बयानों से यह स्पष्ट होता है कि अमेरिकी रणनीति अब केवल नियंत्रण तक सीमित नहीं है, बल्कि वह ईरान के मौजूदा सत्ता ढांचे और सैन्य तंत्र में आमूल-चूल परिवर्तन की पक्षधर है।