पाकिस्तान में पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के राजनीतिक भविष्य को लेकर एक बड़ा मोड़ आ गया है। सेना और सरकार ने मिलकर इमरान खान के 'चैप्टर' को बंद करने की तैयारी कर ली है। पिछले 24 घंटों के भीतर, इमरान खान और उनके सहयोगियों के खिलाफ पांच महत्वपूर्ण और कड़े कदम उठाए गए हैं, जो यह दर्शाते हैं कि पाकिस्तान की शक्तिशाली सेना अब इस मामले में किसी भी तरह की 'किचकिच' या असहमति नहीं चाहती है। जियो टीवी के अनुसार, सेना के शीर्ष अधिकारियों ने इमरान खान की पार्टी, पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के नेतृत्व को स्पष्ट संदेश दे दिया है कि "अब बहुत हो गया। हम अपना काम करेंगे। अपने खिलाफ एक भी टिप्पणी नहीं सुनेंगे और " इस स्पष्ट चेतावनी के बाद, अदालतों से लेकर सरकारी विभागों तक, सभी हरकत में आ गए हैं, और इमरान खान के राजनीतिक प्रभाव को कम करने के लिए तेजी से कार्रवाई की जा रही है।
आलिमा खान पर कार्रवाई: जमानत राशि जब्त
पहला बड़ा एक्शन इमरान खान की बहन आलिमा खान पर लिया गया है। गुरुवार को पाकिस्तान की एक अदालत ने आलिमा खान द्वारा जमानत के लिए जमा की गई राशि को जब्त करने का आदेश दिया। आलिमा खान के खिलाफ कई मामलों में मुकदमा चल रहा है, और वह इमरान खान के समर्थन में सबसे ज्यादा सक्रिय रही हैं और सरकार की इस कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य आलिमा खान को शांत कराना और उनकी सक्रियता पर लगाम लगाना बताया जा रहा है, ताकि इमरान खान के समर्थन में उठने वाली आवाजों को कमजोर किया जा सके। यह कदम इमरान खान के परिवार पर दबाव बनाने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिससे उनके राजनीतिक नेटवर्क को और भी कमजोर किया जा सके।
पूर्व आईएसआई चीफ फैज हामिद को 14 साल की सजा
दूसरा महत्वपूर्ण एक्शन इमरान खान के करीबी माने जाने वाले पूर्व आईएसआई चीफ फैज हामिद के खिलाफ आया है। सैन्य अदालत ने फैज हामिद को चार अलग-अलग मामलों में दोषी ठहराते हुए 14 साल की सजा सुनाई है। फैज हामिद पर सत्ता का दुरुपयोग करने का गंभीर आरोप लगा है। इस फैसले के जरिए, सत्ताधारी पीएमएल-एन (पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज) इमरान खान पर परोक्ष रूप से निशाना साध रही है। फैज हामिद को सजा सुनाना इमरान खान के करीबी सहयोगियों को कमजोर करने और उनके नेटवर्क को तोड़ने की दिशा में एक। बड़ा कदम है, जो इमरान खान के लिए एक बड़ा झटका है और उनके समर्थकों के मनोबल को तोड़ने का प्रयास है।
इमरान खान की जेल बदलने की तैयारी
तीसरा बड़ा एक्शन इमरान खान की जेल बदलने की योजना से संबंधित है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के राजनीतिक सलाहकार राणा सनाउल्लाह ने जानकारी दी है कि सरकार इमरान खान के जेल को बदलने पर विचार कर रही है। उन्हें रावलपिंडी के किसी ऐसे जेल में भेजने की तैयारी हो रही है, जहां पीटीआई के कार्यकर्ता आसानी से पहुंच न सकें। इस कदम का उद्देश्य इमरान खान और उनकी पार्टी के कार्यकर्ताओं के बीच संपर्क को तोड़ना और जेल से उनके राजनीतिक प्रभाव को कम करना है। यह सुनिश्चित करना है कि इमरान खान जेल से भी अपने समर्थकों को संगठित न कर पाएं और उनकी राजनीतिक गतिविधियों पर पूरी तरह से अंकुश लगाया जा सके।
इमरान खान से मुलाकात पर प्रतिबंध
चौथा बड़ा एक्शन इमरान खान से मिलने वालों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाना है। पाकिस्तान के सूचना मंत्री अता तरार ने घोषणा की है कि अब किसी को भी इमरान खान से मिलने की इजाजत नहीं दी जाएगी। तरार का तर्क है कि इमरान खान हर मुलाकात में सेना के खिलाफ बयान देते हैं, जो कि "सही नहीं है। " सरकार ने यह फैसला इसलिए लिया है ताकि इमरान खान जेल के अंदर से भी सेना के खिलाफ किसी भी तरह का दुष्प्रचार न कर सकें और उनके बयानों से देश में अस्थिरता न फैले। यह कदम इमरान खान को पूरी तरह से अलग-थलग करने की रणनीति का हिस्सा है, जिससे उनकी आवाज को दबाया जा सके।
पीटीआई पर प्रतिबंध का प्रस्ताव
पांचवां और संभवतः सबसे बड़ा एक्शन इमरान खान की पार्टी, पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के खिलाफ आया है। पाकिस्तान की पंजाब असेंबली ने पीटीआई के खिलाफ एक प्रस्ताव पारित किया है, जिसमें कहा गया है कि इमरान की पार्टी "शत्रु राज्य का मोहरा" है और उस पर तुरंत प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए। इस प्रस्ताव को एक गंभीर चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है। हाल ही में पंजाब असेंबली ने तहरीक-ए-लब्बैक पर प्रतिबंध लगाया था, जिसके बाद पूरे पाकिस्तान में इस संगठन पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। पीटीआई पर प्रतिबंध का यह प्रस्ताव इमरान खान के राजनीतिक करियर को पूरी तरह से समाप्त करने की दिशा में एक निर्णायक कदम। हो सकता है, जिससे उनकी पार्टी का अस्तित्व ही खतरे में पड़ जाएगा और उनकी राजनीतिक विरासत को मिटाने का प्रयास किया जाएगा।
सेना का स्पष्ट संदेश और आगे की राह
ये सभी पांच एक्शन पाकिस्तान की सेना के उस स्पष्ट संदेश का हिस्सा हैं, जिसमें। कहा गया है कि वे अब इमरान खान के मामले में "ज्यादा किचकिच नहीं चाहते हैं। " सेना ने पीटीआई नेतृत्व को साफ-साफ कह दिया है कि "अब बहुत हो गया। " इन कार्रवाइयों से यह स्पष्ट होता है कि पाकिस्तान की शक्तिशाली सैन्य प्रतिष्ठान इमरान खान के राजनीतिक प्रभाव को पूरी तरह से खत्म करने और उन्हें मुख्यधारा की राजनीति से बाहर करने के लिए दृढ़ संकल्पित है। आने वाले दिनों में इन फैसलों के पाकिस्तान की राजनीतिक परिदृश्य पर गहरे और दूरगामी परिणाम देखने को मिल सकते हैं, जिससे इमरान खान के लिए वापसी की राह और भी कठिन हो जाएगी और देश में एक नए राजनीतिक युग की शुरुआत हो सकती है।
