भारत में डेटा सेंटर के क्षेत्र में हो रहा तीव्र विस्तार देश की आर्थिक और सामाजिक तस्वीर को बदलने की क्षमता रखता है। प्रॉपटेक कंपनी स्क्वायर यार्ड्स की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, इस सेक्टर में होने वाली प्रगति से अगले कुछ वर्षों में युवाओं के लिए रोजगार के अपार अवसर खुलेंगे। 33 लाख नई नौकरियां पैदा हो सकती हैं। रोजगार के इन अवसरों के साथ-साथ रिहायशी इलाकों में घरों की मांग में भी भारी बढ़ोतरी देखने को मिलेगी। यह विस्तार न केवल टेक्नोलॉजी सेक्टर को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा, बल्कि रियल एस्टेट सेक्टर के लिए भी एक बड़ा बूस्टर साबित होगा।
रोजगार और आवासीय मांग में भारी वृद्धि
5 करोड़ वर्ग फुट आवासीय क्षेत्र की मांग भी पैदा होने का अनुमान है। भारत में वर्तमान में करीब 9,030 मेगावाट डेटा सेंटर क्षमता बढ़ाने की योजना पर काम चल रहा है। डेटा सेंटर के आसपास विकसित होने वाले बुनियादी ढांचे और संबंधित व्यवसायों से रोजगार के नए रास्ते खुलेंगे। इन केंद्रों में काम करने वाले लोगों की जरूरतों को पूरा करने के लिए आसपास के क्षेत्रों में घर, दुकानें, स्कूल और अन्य नागरिक सुविधाओं की मांग में तेजी आएगी। यह पूरा इकोसिस्टम स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करेगा।
डेटा सेंटर के आसपास बनेगा गोल्डन रिंग
रिपोर्ट में डेटा सेंटर के इस प्रभाव को डोनट इफेक्ट का नाम दिया गया है। इसके अनुसार, डेटा सेंटर के मुख्य परिसर के भीतर रियल एस्टेट की गतिविधियां उतनी अधिक नहीं होंगी, जितनी उसके आसपास के इलाकों में होंगी और डेटा सेंटर से करीब 5 से 15 किलोमीटर के दायरे में सबसे ज्यादा असर देखने को मिल सकता है, जिसे रिपोर्ट में गोल्डन रिंग कहा गया है। इस गोल्डन रिंग वाले इलाके में सड़क, बिजली, इंटरनेट, लॉजिस्टिक्स और अन्य सुविधाओं के बेहतर होने की पूरी उम्मीद है। इसके साथ ही यहां नए रिहायशी प्रोजेक्ट, टाउनशिप, दुकानें, ऑफिस और अन्य जरूरी सुविधाएं विकसित हो सकती हैं। इस प्रकार, जहां भी डेटा सेंटर बनेगा, उसके आसपास का पूरा इलाका एक नए शहरी कॉरिडोर के रूप में उभर सकता है।
महाराष्ट्र और अन्य राज्यों में घरों की मांग
डेटा सेंटर के विस्तार से होने वाली आवासीय मांग का सबसे ज्यादा फायदा महाराष्ट्र को मिलने का अनुमान है। 4 करोड़ वर्ग फुट घरों की मांग पैदा हो सकती है। 8 करोड़ वर्ग फुट की मांग का अनुमान है। 94 करोड़ वर्ग फुट आवासीय मांग पैदा होने की संभावना जताई गई है। ये आंकड़े दर्शाते हैं कि डेटा सेंटर का प्रभाव देश के विभिन्न हिस्सों में व्यापक रूप से फैलेगा।
भारत में विस्तार की अपार संभावनाएं
रिपोर्ट में एक महत्वपूर्ण तथ्य यह भी सामने आया है कि भारत दुनिया के कुल डिजिटल डेटा का लगभग 20 प्रतिशत उत्पादन करता है। हालांकि, वैश्विक डेटा सेंटर क्षमता में भारत की हिस्सेदारी अभी केवल 4 प्रतिशत के आसपास ही है। इसका सीधा मतलब यह है कि देश में डेटा सेंटर के विस्तार की अभी बहुत बड़ी गुंजाइश मौजूद है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), क्लाउड कंप्यूटिंग और कंपनियों के तेजी से डिजिटल होने के कारण इस क्षेत्र में निवेश और बढ़ने की उम्मीद है। इससे बिजली, फाइबर नेटवर्क और लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों में भी निवेश को बढ़ावा मिलेगा।
छोटे शहरों को भी मिलेगा लाभ
डेटा सेंटर का यह सकारात्मक प्रभाव केवल दिल्ली और मुंबई जैसे महानगरों तक ही सीमित नहीं रहेगा। आने वाले समय में टियर-2 और टियर-3 शहरों को भी इसका बड़ा फायदा मिल सकता है। हालांकि डेटा सेंटर सीधे तौर पर बहुत बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार नहीं देते, लेकिन उनके आसपास बनने वाला पूरा इकोसिस्टम नौकरियों की झड़ी लगा सकता है। बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर से स्थानीय व्यापार और रियल एस्टेट गतिविधियों को गति मिलेगी। इस तरह, आने वाले वर्षों में डेटा सेंटर भारत के नए डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर हब बनने के साथ-साथ नए रियल एस्टेट और रोजगार के प्रमुख केंद्र भी साबित होंगे।
