देशभर के पेट्रोल पंपों पर 2000 रुपये से अधिक के यूपीआई (UPI) ट्रांजैक्शन पर 5 रुपये का फ्लैट एमडीआर (MDR) शुल्क लगाने के फैसले ने एक बड़े विवाद को जन्म दे दिया है। इस नए नियम का देश के विभिन्न हिस्सों में कड़ा विरोध हो रहा है। विशेष रूप से पंजाब, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र जैसे बड़े राज्यों में पेट्रोल पंप एसोसिएशनों ने इस शुल्क के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। इन राज्यों के डीलरों ने स्पष्ट कर दिया है कि वे अपने पंपों पर 2000 रुपये से अधिक के पेट्रोल या डीजल के लिए यूपीआई भुगतान स्वीकार नहीं करेंगे। यह स्थिति तब उत्पन्न हुई है जब सरकार और एनपीसीआई ने डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देने के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं, लेकिन पेट्रोल पंप मालिकों के लिए यह एक बड़ा आर्थिक बोझ बन गया है।
समझिए 5 रुपये के चार्ज का पूरा गणित
पेट्रोल पंप मालिकों के विरोध को समझने के लिए इसके पीछे के गणित को समझना जरूरी है और पेट्रोल पंपों को प्रति लीटर की बिक्री के आधार पर कमीशन मिलता है, न कि कुल बिक्री मूल्य के प्रतिशत के रूप में। उदाहरण के लिए, दिल्ली में एक पेट्रोल पंप डीलर को पेट्रोल की बिक्री पर औसतन 4 रुपये 41 पैसे प्रति लीटर का कमीशन मिलता है। यदि कोई ग्राहक अपने वाहन में 3000 रुपये का पेट्रोल भरवाता है, तो उसे लगभग 29 दशमलव 37 लीटर पेट्रोल मिलेगा। इस बिक्री से पेट्रोल पंप डीलर का कुल कमीशन 129 रुपये 55 पैसे बनता है।
अब यदि ग्राहक इस 3000 रुपये का भुगतान यूपीआई के माध्यम से करता है, तो नए नियमों के अनुसार डीलर को 5 रुपये का एमडीआर शुल्क देना होगा। इस शुल्क को घटाने के बाद डीलर के पास 124 रुपये 55 पैसे का कमीशन बचेगा। डीलरों का तर्क है कि हालांकि एक ट्रांजैक्शन पर यह राशि छोटी लग सकती है, लेकिन दिन भर में होने वाले सैकड़ों ट्रांजैक्शन पर इसका कुल असर बहुत बड़ा होता है। यदि एक पंप पर दिन भर में 3000 रुपये वाले 40 ट्रांजैक्शन होते हैं, तो डीलर को 200 रुपये का शुल्क देना होगा। हालांकि इसके बाद भी डीलर के पास 4982 रुपये का कमीशन बचेगा, लेकिन वे इसे अपनी मेहनत की कमाई में कटौती मान रहे हैं।
पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन की मांगें
ऑल इंडिया पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन ने इस मामले में वित्त मंत्री को पत्र लिखकर हस्तक्षेप की मांग की है। एसोसिएशन के अध्यक्ष अजय बंसल द्वारा भेजे गए इस पत्र में कहा गया है कि पेट्रोल पंप डीलर फिक्स्ड मार्जिन पर काम करते हैं, जो पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की देखरेख में तेल विपणन कंपनियों (OMCs) द्वारा तय किया जाता है। पत्र में इस बात पर जोर दिया गया है कि अक्टूबर 2017 के बाद से इन कमीशन दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। दूसरी ओर, बिजली, मजदूरी और अन्य नियामक खर्चों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है और ऐसी स्थिति में 5 रुपये का अतिरिक्त बोझ उठाना उनके लिए मुश्किल हो रहा है।
एनपीसीआई के नियम और डीलरों की चिंता
एनपीसीआई के निर्देशों के अनुसार, 2000 रुपये तक के यूपीआई ट्रांजैक्शन पर कोई शुल्क नहीं लगेगा। लेकिन 2000 रुपये से अधिक के भुगतान पर डीलर को प्रति ट्रांजैक्शन 5 रुपये तक का चार्ज देना होगा। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि एनपीसीआई ने स्पष्ट किया है कि यह चार्ज ग्राहकों से नहीं वसूला जा सकता, बल्कि इसका पूरा बोझ डीलर को ही उठाना होगा। एसोसिएशन ने केंद्र सरकार से मांग की है कि रिटेल पेट्रोल पंपों को सभी यूपीआई भुगतान पर एमडीआर और ट्रांजैक्शन चार्जेज से पूरी तरह छूट दी जाए। उनका कहना है कि डिजिटल पेमेंट ने ईंधन की खरीद को पारदर्शी और सुविधाजनक बनाया है, इसलिए डीलरों पर इसका आर्थिक बोझ नहीं डाला जाना चाहिए।
ऐतिहासिक संदर्भ और विरोध की चेतावनी
डीलरों ने सरकार को याद दिलाया कि पहले भी कार्ड पेमेंट के मामले में सरकार ने ईंधन लेनदेन की विशेष प्रकृति को समझते हुए छूट दी थी। डीलरों का कहना है कि वही नियम यूपीआई पर भी लागू होना चाहिए। एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि यदि इन शुल्कों को वापस नहीं लिया गया, तो डीलर अपने मार्जिन को बचाने के लिए एक निश्चित राशि से अधिक के यूपीआई भुगतान को सीमित कर सकते हैं और पंजाब, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में पहले से ही इसका विरोध शुरू हो चुका है, जिससे आने वाले समय में ग्राहकों को डिजिटल भुगतान में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
