सरकार ने डीजल और एटीएफ पर विंडफॉल टैक्स घटाया पेट्रोलियम कंपनियों को राहत

केंद्र सरकार ने 1 अक्टूबर से डीजल और एटीएफ के निर्यात पर लगने वाले विंडफॉल टैक्स में कटौती करने का फैसला किया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच पेट्रोलियम कंपनियों के लिए यह एक बड़ी राहत मानी जा रही है, हालांकि पेट्रोल पर टैक्स यथावत रखा गया है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में करीब 2 प्रतिशत की तेजी देखने को मिल रही है, लेकिन इसके बावजूद कीमतें अभी भी 100 डॉलर प्रति बैरल के आंकड़े से नीचे बनी हुई हैं। इसी स्थिति को देखते हुए केंद्र सरकार ने पेट्रोलियम कंपनियों को एक बड़ी राहत दी है। सरकार ने डीजल और एटीएफ (विमानन ईंधन) के निर्यात पर लगाए जाने वाले विंडफॉल टैक्स में कटौती करने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब पेट्रोलियम कंपनियों को घरेलू स्तर पर ईंधन बेचने में चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।

डीजल और एटीएफ पर टैक्स में कितनी हुई कटौती

वित्त मंत्रालय द्वारा जारी की गई अधिसूचना के अनुसार, सरकार ने बुधवार को डीजल और एटीएफ के निर्यात पर विंडफॉल टैक्स कम कर दिया है। यह नई दरें 1 अक्टूबर से शुरू होने वाले पखवाड़े के लिए प्रभावी होंगी। डीजल के निर्यात पर लगने वाले सड़क और बुनियादी ढांचा उपकर के साथ विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (एसएईडी) की दर को अब 20 रुपये प्रति लीटर से घटाकर 16 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। इस कटौती से डीजल निर्यातकों को प्रति लीटर 4 रुपये की सीधी राहत मिलेगी।

वहीं अगर एटीएफ यानी विमानन ईंधन की बात करें, तो इसके निर्यात पर एसएईडी को 10 रुपये 50 पैसे प्रति लीटर निर्धारित किया गया है। इससे पहले यह दर 15 रुपये प्रति लीटर थी, जिसका अर्थ है कि एटीएफ पर टैक्स में 4 रुपये 50 पैसे प्रति लीटर की कमी की गई है। हालांकि, सरकार ने पेट्रोल के निर्यात पर लगने वाले शुल्क में कोई बदलाव नहीं किया है और इसे अगले पखवाड़े के लिए भी 0 रुपये 50 पैसे प्रति लीटर पर बरकरार रखा गया है।

विंडफॉल टैक्स लगाने के पीछे का मुख्य कारण

सरकार द्वारा विंडफॉल टैक्स लगाने का मुख्य उद्देश्य घरेलू बाजार में पेट्रोलियम उत्पादों की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करना है। वर्तमान में पेट्रोलियम कंपनियों को घरेलू स्तर पर पेट्रोल, डीजल और एटीएफ बेचने पर प्रति लीटर नुकसान उठाना पड़ रहा है। ऐसी स्थिति में कंपनियों के लिए कमाई का एकमात्र रास्ता इन उत्पादों का निर्यात करना रह जाता है। सरकार घरेलू सप्लाई में इजाफा करने और कंपनियों को केवल निर्यात पर ध्यान केंद्रित करने से रोकने के लिए यह टैक्स लगाती है।

पश्चिम एशिया संकट और सरकारी नीतियां

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और युद्ध जैसी स्थितियों के बीच ईंधन की घरेलू उपलब्धता बनाए रखना सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती रही है। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने 27 मार्च को डीजल और एटीएफ पर निर्यात शुल्क लगाया था और तब से हर पखवाड़े इन दरों की समीक्षा की जाती है। पेट्रोल निर्यात पर यह लेवी 16 मई से लागू की गई थी। मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि घरेलू खपत के लिए स्वीकृत पेट्रोल और डीजल पर मौजूदा शुल्क दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

इस अप्रत्याशित कर (विंडफॉल टैक्स) का उद्देश्य निर्यातकों को अंतरराष्ट्रीय और घरेलू कीमतों के अंतर के कारण होने वाले अनुचित लाभ को रोकना भी है। युद्ध की स्थितियों के कारण जब वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें बढ़ती हैं, तो निर्यातक अधिक लाभ के लिए घरेलू बाजार की तुलना में विदेशों में तेल बेचना पसंद करते हैं। सरकार की यह नीति पश्चिम एशिया संकट के बीच निर्यात को हतोत्साहित कर देश के भीतर पेट्रोलियम उत्पादों की उपलब्धता सुनिश्चित करने की दिशा में काम करती है। 1 अक्टूबर से प्रभावी होने वाली यह कटौती कंपनियों के मार्जिन में सुधार लाएगी और उन्हें वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धी बने रहने में मदद करेगी।