भारतीय अर्थव्यवस्था ने वैश्विक स्तर पर जारी भारी उथल-पुथल और भू-राजनीतिक तनाव के बीच अपनी मजबूती का लोहा मनवाया है। वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में भारत की जीडीपी विकास दर 7,8 प्रतिशत दर्ज की गई है। यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इस समय दुनिया अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते युद्ध के तनाव और अस्थिर वैश्विक बाजारों से जूझ रही है। पिछले साल की इसी समान तिमाही में विकास दर का यह आंकड़ा 6,9 प्रतिशत था, जिससे स्पष्ट होता है कि भारतीय अर्थव्यवस्था ने अपनी गति को और तेज किया है। सबसे बड़ी बात यह है कि यह प्रदर्शन भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा लगाए गए 7 प्रतिशत के अनुमान से कहीं अधिक बेहतर है, जो देश की आर्थिक नीतियों की सफलता को दर्शाता है।
आर्थिक आंकड़ों की गहराई और जीवीए का प्रदर्शन
अर्थव्यवस्था के बुनियादी ढांचे को समझने के लिए ग्रॉस वैल्यू एडेड (जीवीए) के आंकड़े भी काफी उत्साहजनक रहे हैं। पहली तिमाही में रियल जीवीए ग्रोथ 8,2 प्रतिशत रही है, जो पिछले साल की इसी अवधि में 7,1 प्रतिशत थी। इसके साथ ही नॉमिनल जीवीए ग्रोथ 11,5 प्रतिशत दर्ज की गई है। नॉमिनल जीडीपी के मोर्चे पर भी बड़ी बढ़त देखी गई है, जो 8,1 प्रतिशत से बढ़कर 10,3 प्रतिशत के स्तर पर पहुंच गई है। ये आंकड़े बताते हैं कि महंगाई और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में आने वाली बाधाओं के बावजूद भारतीय बाजार में मांग और उत्पादन का संतुलन बना हुआ है। बाजार में ग्राहकों की बढ़ती दिलचस्पी ने अर्थव्यवस्था को एक मजबूत सुरक्षा कवच प्रदान किया है।
विकास को रफ्तार देने वाले मुख्य कारक
इस शानदार आर्थिक तेजी के पीछे कई महत्वपूर्ण कारण रहे हैं। सरकार द्वारा बुनियादी ढांचे पर किए जाने वाले पूंजीगत खर्च (कैपेक्स) में 18,6 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी की गई है, जिसने सीधे तौर पर औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा दिया है। इसके अलावा, पिछले समय में गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (जीएसटी) और आयकर में दी गई राहत ने आम जनता की खर्च करने की क्षमता को बढ़ाया है। महंगाई के दबाव के बावजूद लोगों के पास निवेश और खरीदारी के लिए पर्याप्त धन उपलब्ध रहा। इसका सबसे बड़ा उदाहरण पैसेंजर वाहनों की बिक्री में देखने को मिला, जिसमें 25,6 प्रतिशत का जबरदस्त उछाल आया है। बिजली की मांग भी 1,9 प्रतिशत से बढ़कर 8,4 प्रतिशत हो गई है, जो औद्योगिक और व्यावसायिक गतिविधियों में आई तेजी का सीधा संकेत है।
सेक्टरवार प्रदर्शन और विशेषज्ञों की राय
सर्विस सेक्टर ने एक बार फिर अर्थव्यवस्था की रीढ़ के रूप में काम किया है, जहां परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (पीएमआई) 58,6 के उच्च स्तर पर पहुंच गया है। डीबीएस बैंक की वरिष्ठ अर्थशास्त्री राधिका राव के अनुसार, कंपनियों की कमाई के आंकड़े सकारात्मक रहे हैं, जिससे बाजार में स्थिरता बनी हुई है। एचडीएफसी बैंक की प्रधान अर्थशास्त्री साक्षी गुप्ता का मानना है कि बिक्री में हुई वृद्धि ने कंपनियों के मुनाफे पर कच्चे माल की बढ़ती कीमतों के दबाव को कम करने में मदद की है। हालांकि, सभी क्षेत्रों का प्रदर्शन एक जैसा नहीं रहा। कृषि क्षेत्र की विकास दर पिछले साल के 4,4 प्रतिशत से घटकर 3,6 प्रतिशत रह गई है। माइनिंग सेक्टर में सबसे बड़ी गिरावट देखी गई है, जहां पिछले साल की 12,4 प्रतिशत की बढ़त के मुकाबले इस बार 2,4 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है।
वैश्विक चुनौतियां और भविष्य का रास्ता
आने वाली तिमाहियों के लिए अर्थशास्त्री कुछ सावधानियां भी बरतने की सलाह दे रहे हैं। भारत अपनी जरूरत का 85 प्रतिशत से अधिक कच्चा तेल आयात करता है और वर्तमान में कच्चे तेल की कीमतें 90 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं। इकरा की मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर के मुताबिक, अगर अमेरिका-ईरान युद्ध का प्रभाव और बढ़ता है, तो ऊर्जा की बढ़ती कीमतें भारतीय अर्थव्यवस्था पर दबाव डाल सकती हैं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2047 तक 'विकसित भारत' बनाने के सपने के लिए भी चुनौतियां कम नहीं हैं। थिंक-टैंक के वरिष्ठ अधिकारी अशोक लाहिड़ी के विश्लेषण के अनुसार, इस लक्ष्य को पाने के लिए भारत को अगले 21 वर्षों तक लगातार 9,25 प्रतिशत की दर से विकास करना होगा। ऐतिहासिक रूप से देखें तो साल 2000 से 2024 के बीच भारत की औसत विकास दर 6,3 प्रतिशत रही है और पिछले 50 वर्षों में केवल तीन बार ही देश ने 9,25 प्रतिशत का आंकड़ा पार किया है।
प्रधानमंत्री का संदेश और आलोचकों को जवाब
जीडीपी के इन शानदार आंकड़ों पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी खुशी जाहिर की है और उन्होंने इसे देशवासियों की एकजुटता और कड़ी मेहनत का परिणाम बताया है। प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया के माध्यम से कहा कि दुनिया भर में फैले तनाव, महंगे कच्चे तेल और सप्लाई चैन की दिक्कतों के बावजूद भारत ने यह मुकाम हासिल किया है। ' उन्होंने इस सफलता का पूरा श्रेय जनता के परिश्रम और एनडीए सरकार की दूरदर्शी नीतियों को दिया है। सरकार का लक्ष्य अब इस विकास दर को और अधिक ऊंचाई पर ले जाना है ताकि विकसित भारत का सपना समय पर पूरा हो सके।
