ईरान-इजराइल युद्ध के बीच भारत में नहीं बढ़ेंगे पेट्रोल-डीजल के दाम

ईरान और इजराइल के बीच जारी सैन्य तनाव के बीच भारत सरकार ने स्पष्ट किया है कि घरेलू बाजार में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। सरकारी अधिकारियों के अनुसार, भारत के पास कच्चे तेल और एलएनजी का पर्याप्त भंडार मौजूद है और वैकल्पिक आयात मार्गों के माध्यम से आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है।

ईरान और इजराइल के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच भारत सरकार ने घरेलू उपभोक्ताओं के लिए एक महत्वपूर्ण घोषणा की है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में अस्थिरता के बावजूद भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बढ़ोतरी नहीं की जाएगी। सरकार ने स्पष्ट किया है कि देश की ऊर्जा सुरक्षा को बनाए रखने के लिए पर्याप्त रणनीतिक उपाय किए गए हैं। अधिकारियों के मुताबिक, भारत के पास कच्चे तेल और तरल प्राकृतिक गैस (LNG) का सुरक्षित और भरपूर स्टॉक मौजूद है, जो किसी भी आपातकालीन स्थिति से निपटने में सक्षम है। सरकार की ओर से यह आश्वासन ऐसे समय में आया है जब वैश्विक बाजारों में कच्चे तेल की आपूर्ति को लेकर चिंताएं जताई जा रही थीं।

रणनीतिक आयात नीति और समुद्री मार्गों में बदलाव

भारत सरकार ने मध्य पूर्व के संकट को देखते हुए अपनी तेल आयात रणनीति में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। पेट्रोलियम मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार, पहले भारत कच्चे तेल के आयात के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर अत्यधिक निर्भर था। वर्तमान स्थिति को देखते हुए, सरकार ने दूसरे सुरक्षित समुद्री मार्गों से तेल का आयात 10% तक बढ़ा दिया है। आंकड़ों के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य के बाहरी रास्तों से होने वाला आयात, जो पहले 60% था, अब बढ़कर 70% हो गया है। इस रणनीतिक विविधीकरण का उद्देश्य आपूर्ति श्रृंखला में किसी भी संभावित व्यवधान को रोकना है और अधिकारियों ने बताया कि यह बदलाव भारतीय रिफाइनरियों को निरंतर कच्चा तेल उपलब्ध कराने में सहायक सिद्ध हो रहा है।

कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों का सुरक्षित भंडार

भारत ने अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए कच्चे तेल और रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पादों का एक आरामदायक स्टॉक बनाए रखा है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, देश के रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार (SPR) और तेल विपणन कंपनियों के पास मौजूद स्टॉक वर्तमान मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त है। विशाखापत्तनम, मंगलुरु और पादुर में स्थित रणनीतिक भंडार देश की ऊर्जा सुरक्षा की रीढ़ हैं। अधिकारियों ने पुष्टि की है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद, घरेलू स्तर पर कीमतों को स्थिर रखने के लिए सरकार के पास पर्याप्त संसाधन हैं। यह भंडार न केवल परिवहन क्षेत्र बल्कि औद्योगिक गतिविधियों को भी सुचारू रूप से चलाने में सहायक होगा।

एलपीजी आपूर्ति और उज्ज्वला योजना की स्थिति

रसोई गैस (LPG) के मोर्चे पर भी सरकार ने स्थिति स्पष्ट की है। पिछले 12 वर्षों के आंकड़ों का हवाला देते हुए अधिकारियों ने बताया कि उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों के लिए सिलेंडर की कीमतों में केवल ₹110 की वृद्धि हुई है। वर्ष 2014 में जो कीमत ₹500 प्रति सिलेंडर थी, वह अब ₹610 के स्तर पर है। हाल के दिनों में एलपीजी स्टॉक को लेकर उत्पन्न हुई चिंताओं को दूर करते हुए सरकार ने उत्पादन की प्राथमिकताओं (re-prioritisation) पर काम शुरू कर दिया है। इससे घरेलू आपूर्ति में किसी भी प्रकार की कमी आने की संभावना को समाप्त कर दिया गया है। सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में रसोई गैस की उपलब्धता निर्बाध बनी रहे।

एलएनजी भंडार और अंतरराष्ट्रीय सहयोग

प्राकृतिक गैस (LNG) के क्षेत्र में भारत की स्थिति काफी मजबूत बताई गई है। हालांकि ईरान के हमलों और होर्मुज में तनाव के कारण कतर की ‘रास लफ्फान’ उत्पादन इकाई अस्थायी रूप से प्रभावित हुई है, लेकिन कतर सरकार ने भारत को निरंतर आपूर्ति का आश्वासन दिया है। कतर के अधिकारियों के अनुसार, जैसे ही समुद्री मार्ग पूरी तरह सुरक्षित होंगे, आपूर्ति फिर से शुरू कर दी जाएगी। वर्तमान में भारत के पास एलएनजी का अतिरिक्त (surplus) स्टॉक है। इसके अलावा, कई अन्य वैश्विक आपूर्तिकर्ताओं ने भी भारत को गैस प्रदान करने के प्रस्ताव भेजे हैं। उर्वरक मंत्रालय के साथ भी समन्वय स्थापित किया गया है ताकि खाद उत्पादन के लिए गैस की कमी न हो, जिससे कृषि क्षेत्र पर कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।

होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही

क्षेत्रीय सुरक्षा के संदर्भ में एक सकारात्मक अपडेट यह है कि होर्मुज जलडमरूमध्य से मालवाहक जहाजों (कार्गो) की आवाजाही पुनः शुरू हो गई है। यह विकास ईरानी राष्ट्रपति महमूद पेजेशकियन के उस बयान के बाद हुआ है जिसमें उन्होंने क्षेत्रीय स्थिरता का आश्वासन दिया था। ईरानी नेतृत्व ने स्पष्ट किया है कि जब तक पड़ोसी देश अपनी भूमि का उपयोग ईरान के विरुद्ध हमले के लिए नहीं होने देते, तब तक उन्हें निशाना नहीं बनाया जाएगा। इस आश्वासन के बाद समुद्री व्यापारिक मार्गों पर तनाव कम हुआ है, जिससे भारत जैसे आयातक देशों को बड़ी राहत मिली है। भारतीय जहाजरानी मंत्रालय और सुरक्षा एजेंसियां स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं ताकि आपूर्ति श्रृंखला में कोई बाधा न आए।