भारत में 2026 में 9.1% औसत वेतन वृद्धि का अनुमान, रिपोर्ट।

डेलॉयट इंडिया के सर्वे के अनुसार, 2026 में भारतीय कंपनियों में औसत वेतन वृद्धि 9.1% रहने का अनुमान है। लाइफ साइंसेज और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में सबसे अधिक बढ़ोतरी की संभावना है, जबकि जूनियर कर्मचारियों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

1% की वृद्धि कर सकती हैं। 0% की वृद्धि से थोड़ा अधिक है, जो देश के कॉर्पोरेट जगत में वेतन वृद्धि के रुझान के स्थिर रहने का संकेत देता है। रिपोर्ट के अनुसार, कंपनियां वर्तमान में वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और परिचालन लागतों को संतुलित करने के लिए एक सतर्क दृष्टिकोण अपना रही हैं। इस सर्वेक्षण में लगभग 500 कंपनियों की भागीदारी रही है, जिसमें विभिन्न उद्योगों के वेतन ढांचे का विस्तृत विवरण दिया गया है।

लाइफ साइंसेज और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में सर्वाधिक वृद्धि

सर्वेक्षण के आंकड़ों के अनुसार, लाइफ साइंसेज और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर वर्ष 2026 में वेतन वृद्धि के मामले में अग्रणी रहने की संभावना है। 8% रहने की उम्मीद है। इन क्षेत्रों में बढ़ती मांग और कुशल प्रतिभाओं को बनाए रखने की आवश्यकता को इस बढ़ोतरी का मुख्य कारण माना जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, इन क्षेत्रों में निवेश और उत्पादन क्षमताओं में विस्तार के कारण कंपनियां प्रतिस्पर्धी वेतन देने पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं।

जूनियर कर्मचारियों और व्यक्तिगत योगदानकर्ताओं पर विशेष ध्यान

रिपोर्ट में एक महत्वपूर्ण बदलाव यह देखा गया है कि कंपनियां अब अपने इंक्रीमेंट बजट का एक बड़ा हिस्सा जूनियर स्तर के कर्मचारियों और व्यक्तिगत योगदानकर्ताओं (Individual Contributors) की ओर स्थानांतरित कर रही हैं। 7% तक की वेतन वृद्धि मिलने की संभावना है, जो राष्ट्रीय औसत से अधिक है। यह रणनीति जमीनी स्तर पर प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने और कार्यबल की स्थिरता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से अपनाई जा रही है। कंपनियों का मानना है कि जूनियर स्तर पर बेहतर प्रदर्शन करने वाले कर्मचारियों को पुरस्कृत करना दीर्घकालिक विकास के लिए आवश्यक है।

आईटीईएस और वित्तीय सेवा क्षेत्रों की स्थिति

कंज्यूमर प्रोडक्ट्स, आईटी और फाइनेंशियल सर्विसेज जैसे प्रमुख क्षेत्रों में वेतन वृद्धि का रुख स्थिर रहने की उम्मीद है। 5% रहने का अनुमान है। रिपोर्ट के अनुसार, तकनीकी क्षेत्र में वैश्विक मांग में उतार-चढ़ाव और लागत प्रबंधन की रणनीतियों के कारण इस क्षेत्र में वेतन वृद्धि की गति धीमी हुई है। इसके विपरीत, वित्तीय सेवाओं में डिजिटल परिवर्तन और नए बैंकिंग मॉडल्स के कारण वेतन वृद्धि के आंकड़े सकारात्मक बने हुए हैं।

सीईओ के पारिश्रमिक में धीमी वृद्धि का रुझान

डेलॉयट की रिपोर्ट में पेशेवर मुख्य कार्यपालक अधिकारियों (सीईओ) के वेतन के बारे में भी जानकारी दी गई है। 50 करोड़ हो गया है। यह वृद्धि दर कोविड-19 महामारी के बाद की अवधि में सबसे धीमी मानी जा रही है। रिपोर्ट के अनुसार, शीर्ष नेतृत्व के वेतन में यह सीमित वृद्धि कंपनियों द्वारा लागत नियंत्रण और प्रदर्शन-आधारित प्रोत्साहन संरचनाओं पर अधिक जोर देने का परिणाम है।

वेतन वृद्धि को प्रभावित करने वाले बाहरी कारक

1% के दायरे में काफी स्थिर रही है। हालांकि, नए लेबर कोड्स के कार्यान्वयन से बढ़ती संभावित लागत और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के कारण उत्पन्न अनिश्चितताओं ने कंपनियों को सतर्क कर दिया है। इसके अतिरिक्त, पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान भी कॉर्पोरेट बजट को प्रभावित कर सकते हैं। कंपनियां वर्तमान में इन बाहरी कारकों की बारीकी से निगरानी कर रही हैं ताकि भविष्य की वित्तीय योजनाओं को तदनुसार समायोजित किया जा सके।