देश में त्योहारी सीजन की शुरुआत से ठीक पहले चीनी की बढ़ती कीमतों ने आम जनता के बजट पर दबाव डालना शुरू कर दिया है और पिछले एक महीने के दौरान रिटेल और थोक बाजारों में चीनी के दामों में 24 प्रतिशत तक का भारी उछाल देखा गया है। इस बढ़ोतरी के कारण चीनी की कीमतें 56 से 60 रुपये प्रति किलो के स्तर तक पहुंच गई हैं। बाजार की इस स्थिति को देखते हुए और कीमतों को नियंत्रित करने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने 20 अगस्त को एक बड़ा फैसला लिया। सरकार ने 10 लाख टन कच्ची चीनी के ड्यूटी फ्री यानी शुल्क मुक्त आयात को मंजूरी दे दी है। इस कदम का मुख्य उद्देश्य घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता को बढ़ाना और कीमतों में हो रही अनियंत्रित वृद्धि पर लगाम लगाना है।
स्टॉक की स्थिति और इस्मा का स्पष्टीकरण
चीनी की कीमतों में आई इस तेजी के बीच इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन (इस्मा) ने देश में चीनी की उपलब्धता को लेकर स्थिति स्पष्ट की है। इस्मा के अध्यक्ष नीरज शिरगांवकर ने जानकारी दी है कि देश में चीनी की कोई वास्तविक कमी नहीं है। उनके अनुसार 1 अगस्त तक देश में साढ़े तीन महीने की खपत के बराबर चीनी का स्टॉक उपलब्ध था। शिरगांवकर ने स्पष्ट किया कि इस महीने घबराने की कोई आवश्यकता नहीं है क्योंकि भंडार पर्याप्त है। सरकार द्वारा ड्यूटी फ्री आयात का निर्णय किसी कमी को पूरा करने के लिए नहीं बल्कि एक एहतियाती कदम के रूप में लिया गया है। इस फैसले से देश के अनुमानित क्लोजिंग स्टॉक में 25 से 29 प्रतिशत की बढ़ोतरी होने की उम्मीद है। यह कदम मुख्य रूप से बाजार में सट्टेबाजी और जमाखोरी की संभावनाओं को खत्म करने के लिए उठाया गया है, जो हालिया कीमतों में वृद्धि का एक बड़ा कारण माना जा रहा है।
उत्पादन अनुमान और खपत का गणित
नेशनल फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज (एनएफसीएसएफ) के अध्यक्ष प्रकाश नाइकनवरे ने भी घरेलू आपूर्ति को लेकर भरोसा दिलाया है। उनके अनुसार घरेलू सप्लाई पूरी तरह से पर्याप्त है और किसी भी तरह की किल्लत की स्थिति नहीं है। आंकड़ों के अनुसार 2025-26 सीजन के लिए चीनी उत्पादन का अनुमान 279 लाख टन रखा गया है। वहीं 1 अक्टूबर से शुरू होने वाले 2026-27 सीजन के लिए शुरुआती स्टॉक 35 लाख टन रहने की उम्मीद जताई गई है। चूंकि भारत में हर महीने लगभग 22 लाख टन चीनी की खपत होती है, ऐसे में गणना के अनुसार नवंबर तक देश में 15 से 20 लाख टन चीनी का स्टॉक बचा रहेगा। तब तक नई पेराई का सीजन शुरू हो जाएगा और बाजार में चीनी की ताजा सप्लाई भी आने लगेगी।
ब्राजील से आयात और लॉजिस्टिक्स
आयात की प्रक्रिया पर प्रकाश डालते हुए नाइकनवरे ने बताया कि 15 अक्टूबर से पहले चीनी की कुछ खेप भारतीय बंदरगाहों पर पहुंच सकती है। वर्तमान में ब्राजील ही आयात के लिए एकमात्र विकल्प के रूप में उभरा है क्योंकि थाईलैंड खुद चीनी की कमी का सामना कर रहा है। ब्राजील से भारतीय बंदरगाहों तक चीनी की खेप पहुंचने में सामान्यतः 40 से 45 दिन का समय लगता है। इसके बाद बंदरगाहों से मिलों तक इसे पहुंचाने में अतिरिक्त समय लगेगा। यह पूरी प्रक्रिया डीजीएफटी की मंजूरी और लेटर ऑफ क्रेडिट जारी होने जैसे प्रशासनिक चरणों पर निर्भर करेगी। समुद्री तटों वाले राज्यों जैसे महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु, गुजरात और आंध्र प्रदेश को आयातित चीनी सबसे पहले प्राप्त होगी और इसके बाद उत्तरी राज्यों में इसे सड़क या रेल मार्ग के जरिए भेजा जाएगा।
डेडलाइन और निर्यात पर प्रतिबंध
सरकार ने आयात के लिए 31 अक्टूबर की समयसीमा तय की है, लेकिन इसमें कुछ लचीलापन देखने को मिल सकता है। नाइकनवरे के अनुसार जो खेप रास्ते में होगी, उसे तय समय के बाद भी स्वीकार किया जा सकता है। निर्यात के मोर्चे पर बात करें तो भारत ने 20 लाख टन के निर्धारित कोटे के मुकाबले अब तक केवल 8 लाख टन चीनी का ही निर्यात किया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनुकूल कीमतें न मिलने के कारण निर्यात का लक्ष्य पूरा नहीं हो सका है। घरेलू बाजार में चीनी की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने 13 मई से 30 सितंबर तक चीनी के निर्यात पर रोक लगाई हुई है। सरकार के इन कदमों का उद्देश्य त्योहारी सीजन के दौरान आम उपभोक्ताओं को राहत देना और बाजार में स्थिरता बनाए रखना है।
