बिहार में आपराधिक मामलों की गहन जांच के बीच पुलिस प्रशासन ने एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। इस कार्रवाई के तहत लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के विधायक अमित रानू और जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के सांसद गिरिधारी यादव से जुड़े विभिन्न ठिकानों पर छापेमारी की गई है। चिराग पासवान की अगुवाई वाली पार्टी के विधायक और नीतीश कुमार की पार्टी के सांसद पर हुई इस पुलिसिया कार्रवाई ने राज्य के सियासी गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। दोनों ही मामलों में पुलिस की सक्रियता को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं और राजनीतिक माहौल गरमा गया है।
विधायक अमित रानू के ठिकानों पर छापेमारी और हथियार बरामदगी
बेलसंड से लोजपा (आर) के विधायक अमित रानू के खिलाफ यह कार्रवाई मुजफ्फरपुर के अहियापुर थाना क्षेत्र के झपहां इलाके में हुई एक घटना से जुड़ी है। इस मामले में 50 से अधिक लोगों के घरों और जमीन पर बने निर्माणों को तोड़े जाने का आरोप है। इसी जांच के सिलसिले में पुलिस ने विधायक के बैरिया स्थित आवास और बेलसंड स्थित उनके कार्यालय-सह-आवास पर एक साथ छापेमारी की। पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि इस बड़े पैमाने पर हुए विध्वंस में विधायक की क्या भूमिका थी।
तलाशी अभियान के दौरान पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। विधायक के ठिकानों से एक ऑटोमेटिक पिस्टल, 2 मैगजीन और 9 कारतूस बरामद किए गए हैं। हथियारों की इस बरामदगी ने मामले को और अधिक गंभीर बना दिया है। इस छापेमारी के दौरान पुलिस ने 2 संदिग्ध व्यक्तियों को गिरफ्तार किया है, जिनकी पहचान नवीन कुमार उर्फ नन्हे और छोटू यादव के रूप में हुई है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, विधायक के भाई सोनू सिंह उर्फ अभिनव को भी इस मामले में नामजद किया गया है और पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस पूरे प्रकरण में विधायक अमित रानू की भूमिका की भी सूक्ष्मता से जांच की जा रही है ताकि सच्चाई सामने आ सके।
जदयू सांसद गिरिधारी यादव के आवास पर देर रात कार्रवाई और विवाद
दूसरी ओर, बांका से जदयू सांसद गिरिधारी यादव के ठिकानों पर भी पुलिस ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। शनिवार की देर रात करीब 11 बजकर 30 मिनट पर पुलिस की टीमों ने सांसद के पैतृक आवास सहित कुल 3 ठिकानों पर छापेमारी की। इसमें उनके देवघर और चांदन स्थित आवास भी शामिल थे और एनडीए सरकार में सहयोगी दल के सांसद पर हुई इस कार्रवाई ने प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
सांसद गिरिधारी यादव ने इस पुलिसिया कार्रवाई पर कड़ी आपत्ति जताई है और उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस बिना किसी सर्च वारंट के उनके घर पहुंची थी। सांसद ने इस पूरी प्रक्रिया को अपनी सामाजिक प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाने वाला बताया और इसे लोकतंत्र की हत्या करार दिया। उनका कहना है कि आधी रात को इस तरह की कार्रवाई करना अनुचित है और यह उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित करने का प्रयास है। उन्होंने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए इसे राजनीति से प्रेरित बताया है।
पुलिस का पक्ष और अवैध खनन का मामला
सांसद के आरोपों पर पुलिस प्रशासन ने अपना रुख स्पष्ट किया है। पुलिस का कहना है कि यह कार्रवाई सीधे तौर पर सांसद को निशाना बनाकर नहीं की गई थी और दरअसल, ओढ़नी डैम के पास हुए अवैध मिट्टी खनन के मामले में पुलिस को एक आरोपी की तलाश थी। इस मामले में मुख्य आरोपी लालधारी यादव हैं, जो सांसद गिरिधारी यादव के छोटे भाई हैं। पुलिस का उद्देश्य लालधारी यादव को गिरफ्तार करना था, जिसके लिए उनके संभावित ठिकानों पर दबिश दी गई थी।
बांका के एसपी अमितेश कुमार ने सांसद द्वारा लगाए गए सभी आरोपों को निराधार बताया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पुलिस की टीम वहां किसी राजनीतिक द्वेष या सांसद के खिलाफ छापेमारी करने नहीं गई थी, बल्कि वे केवल अपराधी लालधारी यादव की तलाश में थे और एसपी ने जोर देकर कहा कि पुलिस की यह पूरी कार्रवाई पूरी तरह से नियमानुसार और कानूनी प्रक्रिया के तहत की गई है। पुलिस का प्राथमिक लक्ष्य कानून का उल्लंघन करने वाले आरोपियों को पकड़ना है और इसी क्रम में यह कदम उठाया गया था और पुलिस ने स्पष्ट किया है कि कानून सबके लिए बराबर है और अपराधियों की धरपकड़ जारी रहेगी।
