अमेरिका और भारत के बीच लंबे समय से चल रही व्यापार समझौते की प्रक्रिया अब अपने अंतिम चरण में पहुंच गई है, जो दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों में एक महत्वपूर्ण मोड़ है। भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने आधिकारिक तौर पर कहा है कि समझौते के अधिकांश हिस्सों पर सैद्धांतिक रूप से सहमति बन चुकी है और वर्तमान में, पूरा ध्यान कानूनी और तकनीकी भाषा से जुड़े कुछ विशिष्ट बिंदुओं को अंतिम रूप देने पर है, जो समझौते पर औपचारिक हस्ताक्षर से पहले की आखिरी प्रक्रिया है। एक बड़े कूटनीतिक घटनाक्रम में, राजदूत गोर ने यह भी घोषणा की कि अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो इन चर्चाओं को आगे बढ़ाने के लिए अक्टूबर में एक बार फिर भारत आएंगे।
तकनीकी ढांचे को अंतिम रूप देना
द इकोनॉमिक टाइम्स वर्ल्ड लीडर्स फोरम में बोलते हुए, राजदूत सर्जियो गोर ने व्यापार वार्ता की वर्तमान स्थिति के बारे में विस्तार से जानकारी दी और उन्होंने उल्लेख किया कि व्यापार समझौते के संबंध में सैद्धांतिक रूप से लगभग सब कुछ पूरा हो चुका है। अमेरिकी प्रशासन वर्तमान में समझौते के कुछ टेक्स्ट को फिर से सेट करने और उसे बेहतर बनाने की प्रक्रिया में है। गोर ने स्पष्ट किया कि इसे अंतिम रूप देने में समय इसलिए लग रहा है क्योंकि कानूनी और तकनीकी शब्दावली को पूरी तरह सटीक बनाना आवश्यक है ताकि दोनों देशों के हितों का सही प्रतिनिधित्व और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। यह सूक्ष्म दृष्टिकोण भविष्य के आर्थिक सहयोग के लिए एक मजबूत ढांचा तैयार करने के उद्देश्य से अपनाया जा रहा है।
मार्को रूबियो के आगामी दौरे का महत्व
विदेश मंत्री मार्को रूबियो के आगामी दौरे की घोषणा ने कूटनीतिक हलकों में काफी ध्यान आकर्षित किया है। सर्जियो गोर ने इस बात पर जोर दिया कि भारत संयुक्त राज्य अमेरिका के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बना हुआ है। उन्होंने बताया कि विदेश मंत्री रूबियो इससे पहले मई में 5 दिन के भारत दौरे पर आए थे और अब अक्टूबर में कई दिनों के एक और दौरे पर भारत आने वाले हैं। राजदूत के अनुसार, किसी शीर्ष अमेरिकी अधिकारी का इतने कम समय में दो बार भारत आना दोनों देशों के बीच संबंधों की गहराई और महत्व को दर्शाता है। इन उच्च-स्तरीय मुलाकातों का उद्देश्य लगातार संपर्क बनाए रखना और विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ाना है।
रूसी तेल पर टैरिफ को लेकर स्पष्टीकरण
फोरम के दौरान, राजदूत गोर ने रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 100 फीसदी टैरिफ लगाने की अमेरिकी कांग्रेस की पहल पर भी सफाई दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि हालांकि इस बिल को कांग्रेस में रिपब्लिकन और डेमोक्रेट्स दोनों का समर्थन मिल रहा है, लेकिन इसे व्हाइट हाउस की पहल के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। गोर के मुताबिक, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस तरह के टैरिफ की वकालत नहीं की है। उन्होंने आगे कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप शुरुआत से ही रूस-यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने के लिए प्रयास कर रहे हैं। गोर ने चल रहे युद्ध को दोनों पक्षों के लिए एक गंभीर त्रासदी बताया और इस संघर्ष के जल्द और शांतिपूर्ण समाधान के लिए अमेरिका की इच्छा व्यक्त की।
ट्रंप और मोदी की व्यक्तिगत दोस्ती
राजदूत गोर ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच के संबंधों को एक गहरी और व्यक्तिगत दोस्ती के रूप में वर्णित किया। उन्होंने उल्लेख किया कि दोनों नेता शासन के प्रति एक समान दृष्टिकोण साझा करते हैं, जिसमें त्वरित निर्णय लेने और ठोस परिणाम प्राप्त करने पर जोर दिया जाता है और गोर के अनुसार, उनके रिश्ते का एक उल्लेखनीय पहलू यह है कि राष्ट्रपति ट्रंप इस बात को याद रखते हैं कि 2020 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के बाद जब वे 4 साल तक सत्ता से बाहर रहे, तब प्रधानमंत्री मोदी ने उनकी आलोचना नहीं की थी। इसी आपसी भरोसे और व्यक्तिगत तालमेल को भारत-अमेरिका संबंधों को मजबूत और लचीला बनाए रखने वाला मुख्य स्तंभ माना जाता है।
क्षेत्रीय गतिशीलता और कूटनीतिक आवश्यकता
अमेरिका-चीन संबंधों और पाकिस्तान के साथ अमेरिका के रिश्तों पर गोर ने एक व्यावहारिक दृष्टिकोण पेश किया और उन्होंने टिप्पणी की कि देशों के पास अपने पड़ोसी चुनने का विकल्प नहीं होता है, और इसलिए कूटनीति में क्षेत्रीय वास्तविकताओं को ध्यान में रखना पड़ता है। उन्होंने कहा कि संयुक्त राज्य अमेरिका अपने हितों और वैश्विक स्थिरता के आधार पर दुनिया भर के विभिन्न देशों के साथ अपने द्विपक्षीय संबंध बनाए रखता है। गोर ने जोर देकर कहा कि क्षेत्रीय राजनीति की जटिलताओं के बावजूद, साझा चुनौतियों का समाधान करने और अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था बनाए रखने के लिए मौजूदा सरकारों के साथ काम करना अमेरिका की एक आवश्यकता है।
