अमेरिकी चुनाव में क्रिप्टो, एआई और ऑनलाइन बेटिंग कंपनियों का दबदबा, फंडिंग के टूटे पुराने रिकॉर्ड

अमेरिकी राजनीति में फंडिंग का चेहरा बदल रहा है। 2026 के मध्यावधि चुनावों के लिए क्रिप्टो, एआई और ऑनलाइन बेटिंग कंपनियां वॉल स्ट्रीट और तेल कंपनियों को पीछे छोड़ते हुए सबसे बड़ी दानदाता बनकर उभरी हैं। अब तक 51 करोड़ 70 लाख डॉलर से अधिक का खर्च हो चुका है।

अमेरिकी राजनीति के परिदृश्य में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। पारंपरिक रूप से वॉल स्ट्रीट, तेल और दवा कंपनियों को राजनीतिक फंडिंग की सबसे बड़ी ताकत माना जाता था, लेकिन अब 2026 के मध्यावधि चुनावों में स्थिति पूरी तरह बदल गई है। चुनावी फंडिंग में अब क्रिप्टोकरेंसी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और ऑनलाइन बेटिंग से जुड़ी नई और जेन अल्फा कंपनियां सबसे बड़े नए खिलाड़ी बनकर उभर रही हैं। यह बदलाव अमेरिकी राजनीति में शक्ति संतुलन के बदलने का एक स्पष्ट संकेत है, जहां डिजिटल अर्थव्यवस्था से पैदा हुए अरबपति और कंपनियां नए किंगमेकर बन रहे हैं।

2026 मध्यावधि चुनाव के लिए फंडिंग का नया रिकॉर्ड

रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी कंपनियों ने 2026 के हाउस और सीनेट चुनावों के लिए 15 महीनों के दौरान पहली तिमाही के अंत तक 51 करोड़ 70 लाख डॉलर खर्च कर दिए हैं। यह आंकड़ा 2024 के पूरे चुनावी चक्र में हुए 46 करोड़ 10 लाख डॉलर के पिछले रिकॉर्ड से भी अधिक है। नवंबर में होने वाले चुनावों से पहले इस खर्च में और भी बड़ी बढ़ोतरी होने की उम्मीद जताई जा रही है, जो अमेरिकी चुनावी इतिहास में एक नया कीर्तिमान स्थापित कर सकता है।

तीन प्रमुख सेक्टरों का भारी निवेश

पब्लिक सिटिजन द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के मुताबिक, 1 जनवरी 2025 से पहली तिमाही तक क्रिप्टो, टेक और ऑनलाइन गेमिंग उद्योगों ने मिलकर कम से कम 29 करोड़ 40 लाख डॉलर चुनावी राजनीति में लगाए हैं। इन उद्योगों की कंपनियों का मुख्य उद्देश्य ऐसे उम्मीदवारों और नीतियों को समर्थन देना है, जो उनके सेक्टरों पर अपेक्षाकृत कम सख्त नियमन या रेगुलेशन के पक्ष में हों। ये कंपनियां चाहती हैं कि भविष्य की नीतियां उनके व्यापारिक हितों के अनुकूल बनी रहें।

सुपर पीएसी और डार्क मनी का इस्तेमाल

क्रिप्टो, टेक और ऑनलाइन गेमिंग उद्योगों से जुड़ी कंपनियों ने अपनी फंडिंग के लिए बड़े पैमाने पर सुपर पीएसी (Super PAC), उससे जुड़े पीएसी और तथाकथित डार्क मनी संगठनों का सहारा लिया है। ये संगठन बड़ी मात्रा में धन जुटाने में सक्षम होते हैं और फिर उस पैसे को चुनावी विज्ञापन, मतदाता अभियानों और रैलियों पर खर्च करते हैं। हालांकि, नियम के अनुसार वे सीधे उम्मीदवारों को पैसा नहीं दे सकते और न ही चुनावी खर्च का उनके साथ समन्वय कर सकते हैं, लेकिन उनका प्रभाव चुनाव परिणामों पर बहुत गहरा होता है।

एलन मस्क और सर्गेई ब्रिन जैसे बड़े दानदाता

रिपोर्ट में कुछ प्रमुख व्यक्तिगत दानदाताओं के नामों का भी उल्लेख किया गया है। स्पेसएक्स (SpaceX) के संस्थापक एलन मस्क 2026 के संघीय चुनावों के लिए अब तक 9 करोड़ डॉलर से ज्यादा खर्च कर चुके हैं। वहीं, गूगल के सह-संस्थापक सर्गेई ब्रिन ने कैलिफोर्निया में प्रस्तावित वेल्थ टैक्स सहित राज्य से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर 10 करोड़ 60 लाख डॉलर से अधिक की राशि खर्च की है। मेटा (Meta) ने भी कैलिफोर्निया, टेक्सास, इलिनॉय और अन्य राज्यों में दोनों राजनीतिक दलों के उम्मीदवारों का समर्थन करने वाले चार अलग-अलग सुपर पीएसी को 6 करोड़ 50 लाख डॉलर दिए हैं।

2024 के सफल क्रिप्टो मॉडल का अनुसरण

क्रिप्टो कंपनियों ने 2024 के चुनाव में भी भारी निवेश किया था, जो काफी सफल रहा था। कॉइनबेस, रिपल और निवेश फर्म आंद्रेसेन होरोविट्ज़ जैसे बड़े नामों ने फेयरशेक सुपर पीएसी के माध्यम से चुनावी राजनीति में पैसा लगाया था। कंपनियों की यह रणनीति इतनी प्रभावी साबित हुई कि अब एआई, बिग टेक और स्पोर्ट्स बेटिंग जैसे अन्य उद्योग भी इसी मॉडल को अपना रहे हैं ताकि वे राजनीतिक गलियारों में अपना प्रभाव बढ़ा सकें।

राजनीतिक विज्ञापनों पर अरबों का खर्च

एडइंपैक्ट के अनुमानों के अनुसार, 2026 के मध्यावधि चुनावों में कुल राजनीतिक विज्ञापनों पर 11 अरब 60 करोड़ डॉलर खर्च होने की संभावना है। यदि ऐसा होता है, तो यह 2023-24 के चुनावी चक्र के 11 अरब 20 करोड़ डॉलर के पिछले रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ देगा। यह भारी-भरकम खर्च दर्शाता है कि अमेरिकी राजनीति में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए नई तकनीक वाली कंपनियां किस हद तक जाने को तैयार हैं।

शक्ति संतुलन में बदलाव का संकेत

अमेरिका के 2026 मध्यावधि चुनावों में क्रिप्टो, एआई और ऑनलाइन बेटिंग कंपनियों का बढ़ता दखल इस बात का प्रमाण है कि अब सत्ता के केंद्र बदल रहे हैं। कभी वॉल स्ट्रीट और तेल कंपनियां राजनीतिक फंडिंग की धुरी हुआ करती थीं, लेकिन अब नई तकनीक और डिजिटल अर्थव्यवस्था के अरबपति अमेरिकी चुनावी राजनीति के नए सूत्रधार बन रहे हैं। यह बदलाव न केवल फंडिंग के मामले में है, बल्कि यह भविष्य की नीतियों और नियमों को प्रभावित करने की एक बड़ी कोशिश भी है।