30 सितंबर को फ्लाईदुबई की उड़ान FZ1073 के कॉकपिट के भीतर हुई हिंसक घटना ने अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क कर दिया है। इस मामले में अब ऑस्ट्रेलिया और इजराइल की एजेंसियां भी शामिल हो गई हैं और वे ओमान के नागरिक और को-पायलट हमाम अल-हमामी के ऑस्ट्रेलिया से संबंधों की गहराई से जांच कर रही हैं। यह जांच इस बात पर केंद्रित है कि एक ऐसा व्यक्ति, जिसे ओमान में पहले ही प्रतिबंधित किया जा चुका था, वह तेल अवीव जाने वाली फ्लाईदुबई की उड़ान के चालक दल का हिस्सा कैसे बन गया।
कॉकपिट में हमले और हाईजैक की कोशिश
रिपोर्ट्स के अनुसार, को-पायलट हमाम अल-हमामी पर उड़ान के दौरान विमान को हाईजैक करने और उसे दुर्घटनाग्रस्त करने की कोशिश करने का गंभीर आरोप है। संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के अटॉर्नी जनरल हमद सैफ अल शम्सी ने 2 अक्टूबर को जानकारी दी कि हमामी ने पायलट पर हमला करने के लिए विमान में मौजूद कुल्हाड़ी का इस्तेमाल किया था। उसका मुख्य उद्देश्य विमान पर नियंत्रण हासिल करना और एक बड़ी आतंकी घटना को अंजाम देना था। यूएई के नेतृत्व में चल रही इस जांच में हमामी के इरादों, उसके संपर्कों और इस साजिश के पीछे की पूरी परिस्थितियों का पता लगाया जा रहा है।
ऑस्ट्रेलियाई जांच और वीजा का इतिहास
ऑस्ट्रेलियाई ब्रॉडकास्टिंग कॉरपोरेशन (एबीसी) की 4 अक्टूबर की रिपोर्ट के अनुसार, ऑस्ट्रेलियाई संघीय पुलिस ने पुष्टि की है कि उनकी आतंकवाद रोधी टीम इस मामले की जांच कर रही है। विक्टोरिया संयुक्त आतंकवाद रोधी टीम, जिसमें संघीय पुलिस, विक्टोरिया पुलिस और सुरक्षा खुफिया संगठन (ASIO) शामिल हैं, हमामी के ऑस्ट्रेलिया प्रवास के दौरान की गतिविधियों को खंगाल रही है। दस्तावेजों से पता चला है कि हमामी को 2014 में एक छात्र वीजा जारी किया गया था। उसने 2015 से 2017 के बीच ऑस्ट्रेलिया में रहकर पढ़ाई की थी, जिसके बाद वह देश छोड़कर चला गया था। 2019 में उसका वीजा रद्द कर दिया गया था, हालांकि इसका कारण उसका आचरण नहीं बल्कि किसी कोर्स में पंजीकृत न होना था।
चरमपंथी विचारधारा और ओमान में प्रतिबंध
जांच में यह भी सामने आया है कि हमाम अल-हमामी चरमपंथी वेबसाइटें देखता था और उसकी विचारधारा कट्टरपंथी थी। इसी कारण से ओमान एयर ने उसे पहले ही प्रतिबंधित कर दिया था और उसे ओमान में उड़ान भरने की अनुमति नहीं थी। इसके बावजूद, वह फ्लाईदुबई में को-पायलट के रूप में नियुक्त होने में सफल रहा। अब विभिन्न देशों की एजेंसियां इस बात की पड़ताल कर रही हैं कि क्या उसके किसी आतंकी संगठन से संबंध थे। हालांकि आधिकारिक तौर पर उसकी पहचान की पुष्टि की प्रक्रिया जारी है, लेकिन मीडिया रिपोर्ट्स में उसे ओमान का नागरिक हमाम अल-हमामी ही बताया गया है।
