भारत और यूनाइटेड किंगडम (UK) के बीच आर्थिक संबंधों में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है और दोनों देशों के बीच हुआ ऐतिहासिक कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक एंड ट्रेड एग्रीमेंट (CETA) 15 जुलाई 2026 से आधिकारिक तौर पर लागू होने जा रहा है। इस समझौते का व्यापक प्रभाव न केवल बड़े कारोबारियों पर पड़ेगा, बल्कि आम जनता को भी इसका सीधा लाभ मिलेगा। इस ट्रेड डील के प्रभावी होने के बाद ब्रिटेन से आयात होने वाले कई उत्पाद भारतीय बाजारों में पहले की तुलना में काफी सस्ते हो जाएंगे। साथ ही, भारतीय कंपनियों के लिए ब्रिटेन के विशाल बाजार में अपनी पैठ बनाना और व्यापार करना काफी सुगम हो जाएगा।
स्कॉच और कारों की कीमतों में आएगी बड़ी गिरावट
नई ट्रेड डील के लागू होने के साथ ही स्कॉच व्हिस्की, जिन, चॉकलेट, बिस्कुट और कॉस्मेटिक्स जैसे उत्पादों पर लगने वाली इंपोर्ट ड्यूटी यानी आयात शुल्क में धीरे-धीरे कटौती की जाएगी और इसके अलावा, कुछ चुनिंदा ब्रिटिश कारों पर भी टैक्स का बोझ कम होगा। इन शुल्कों में कमी का सीधा असर आने वाले समय में इन उत्पादों की खुदरा कीमतों पर दिखाई देगा, जिससे ग्राहकों को अपनी जेब से कम पैसे खर्च करने पड़ेंगे। यह कदम प्रीमियम उत्पादों के शौकीनों के लिए एक बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है।
टैक्स कटौती का विस्तृत ढांचा
अगर आंकड़ों की बात करें, तो वर्तमान में भारत में स्कॉच व्हिस्की पर 150 प्रतिशत तक का भारी आयात शुल्क लगाया जाता है। नए समझौते के प्रावधानों के अनुसार, इसे पहले घटाकर 75 प्रतिशत किया जाएगा। इसके बाद अगले 10 वर्षों की अवधि में इसे चरणबद्ध तरीके से कम करते हुए 40 प्रतिशत के स्तर पर लाया जाएगा। इसी तरह, ब्रिटिश कारों पर लगने वाला 110 प्रतिशत तक का आयात शुल्क भी धीरे-धीरे घटाकर केवल 10 प्रतिशत तक कर दिया जाएगा। विशेष बात यह है कि इस रियायती व्यवस्था का लाभ इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड कारों को भी मिलेगा, जो पर्यावरण के अनुकूल वाहनों को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
भारतीय निर्यातकों के लिए सुनहरे अवसर
इस समझौते का एक अत्यंत महत्वपूर्ण पहलू भारतीय निर्यातकों को मिलने वाला लाभ है। अब भारत अपने लगभग 99 प्रतिशत उत्पादों को बिना किसी इंपोर्ट टैक्स के ब्रिटेन भेज सकेगा। इस शुल्क मुक्त पहुंच से अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी और निर्यात में भारी तेजी आने की संभावना है। इस डील से विशेष रूप से टेक्सटाइल, रेडीमेड कपड़े, लेदर, फुटवियर, सीफूड, स्पोर्ट्स गुड्स, खिलौने, जेम्स एंड ज्वेलरी, इंजीनियरिंग गुड्स, ऑटो पार्ट्स और ऑर्गेनिक केमिकल्स जैसे क्षेत्रों को सबसे अधिक लाभ मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
किसानों और डेयरी उद्योग की सुरक्षा का संकल्प
व्यापार को बढ़ावा देने के साथ-साथ भारत सरकार ने अपने घरेलू कृषि क्षेत्र के हितों की रक्षा का भी पूरा ध्यान रखा है। समझौते के तहत डेयरी उत्पाद, चीनी, चावल, सेब, चीज, चिकन, पोर्क और अंडों जैसे संवेदनशील कृषि उत्पादों को शामिल नहीं किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य भारतीय किसानों और स्थानीय डेयरी उद्योग को विदेशों से आने वाले सस्ते उत्पादों की प्रतिस्पर्धा से बचाना और उनकी आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करना है। सरकार का यह निर्णय ग्रामीण अर्थव्यवस्था को स्थिर रखने में सहायक सिद्ध होगा।
2040 तक व्यापार में ऐतिहासिक वृद्धि का अनुमान
यह समझौता भारत और ब्रिटेन के बीच आर्थिक साझेदारी को एक नई ऊंचाई पर ले जाने वाला साबित होगा। आर्थिक विशेषज्ञों का अनुमान है कि वर्ष 2040 तक दोनों देशों के बीच होने वाले कुल व्यापार में लगभग 39 प्रतिशत की बड़ी बढ़ोतरी दर्ज की जा सकती है। इससे न केवल हर साल अरबों पाउंड का अतिरिक्त कारोबार होगा, बल्कि भारत में विदेशी निवेश के प्रवाह में भी वृद्धि होगी। इसके परिणामस्वरूप देश में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और निर्यात क्षेत्र को एक नई मजबूती मिलेगी। यह डील भविष्य की आर्थिक प्रगति के लिए एक मजबूत आधारशिला रखने का काम करेगी।
