मिडिल ईस्ट संकट के बीच भारत में यूरिया का भारी स्टॉक, खरीफ 2026 की 50% जरूरत पूरी

पश्चिम एशिया संकट के बावजूद भारत में यूरिया की कोई कमी नहीं होगी। सरकार ने बताया कि खरीफ 2026 की 50% जरूरत के बराबर भंडार मौजूद है और 37 लाख टन यूरिया का आयात सुनिश्चित कर लिया गया है।

पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध और भू-राजनीतिक संकट के बावजूद भारत में यूरिया की कमी नहीं होगी। भारत सरकार ने स्पष्ट किया है कि देश में यूरिया का भंडार खरीफ सीजन 2026 की कुल जरूरत के हिसाब से करीब 50 प्रतिशत तक पहुंच चुका है। 49 लाख टन रहा है, जो पिछले साल की इसी अवधि के लगभग बराबर है। इसके साथ ही, आगामी खरीफ सत्र से पहले किसी भी संभावित कमी को पूरा करने के लिए 37 लाख टन यूरिया का आयात भी सुनिश्चित किया गया है। 39 लाख टन दर्ज किया गया।

घरेलू उत्पादन और आयात के आंकड़े

पश्चिम एशिया की स्थिति पर जानकारी देने के लिए आयोजित एक अंतर-मंत्रालयी संवाददाता सम्मेलन में उर्वरक विभाग की अतिरिक्त सचिव अपर्णा एस. शर्मा ने बताया कि संकट के बाद भी उर्वरकों का घरेलू उत्पादन और आयात मजबूत बना हुआ है। उन्होंने जानकारी दी कि इस अवधि में लगभग 78 लाख टन उर्वरक की उपलब्धता बढ़ाई गई है। 49 लाख टन हो गया। यह उत्पादन स्तर पिछले वर्ष की समान अवधि के लगभग बराबर बना हुआ है। यूरिया की किसी भी कमी को रोकने के लिए सरकार ने वैश्विक निविदा के माध्यम से लगभग 37 लाख टन यूरिया की आपूर्ति सुनिश्चित की है।

विभिन्न उर्वरकों की उपलब्धता और निविदाएं

यूरिया के अलावा अन्य उर्वरकों के उत्पादन पर भी विस्तृत जानकारी साझा की गई। 79 लाख टन रहा। 40 लाख टन दर्ज किया गया। फॉस्फेटिक उर्वरकों की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए 19 लाख टन की वैश्विक निविदा भी जारी की गई है। सरकार द्वारा कच्चे माल की उपलब्धता की नियमित रूप से समीक्षा की जा रही है ताकि उत्पादन प्रक्रिया में कोई बाधा न आए।

खरीफ 2026 के लिए स्टॉक की स्थिति

अतिरिक्त सचिव अपर्णा एस. शर्मा ने कहा कि उर्वरकों की उपलब्धता वर्तमान में बहुत मजबूत है और आपूर्ति मांग से अधिक बनी हुई है। 38 लाख टन है, जो कुल जरूरत का लगभग 50 प्रतिशत हिस्सा है। 47 लाख टन है, जबकि अन्य उर्वरक भी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं।

उर्वरक विभाग के अनुसार, यह मजबूत स्थिति बेहतर योजना, अग्रिम भंडारण और कुशल लॉजिस्टिक प्रबंधन का परिणाम है। राज्यों में आपूर्ति की स्थिति पूरी तरह स्थिर बनी हुई है। इसके अतिरिक्त, सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि उर्वरकों के अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) में कोई बदलाव नहीं किया गया है, जिससे किसानों पर कोई अतिरिक्त आर्थिक बोझ नहीं पड़ेगा।